गोलियों की खनक में बचपन की चमक
-डॉ शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी की कलम से गर्मी की दोपहर, धूल भरी गली, और जेब में खनखनाती काँच की गोलियाँ — बस यही तो था हमारा खज़ाना। “गोलियाँ” या “काँचा” खेलना केवल खेल नहीं था, वह हमारी दोस्ती, प्रतिस्पर्धा और मासूम खुशियों का उत्सव था। ज़मीन पर उँगली से छोटा सा गड्ढा बनाना, निशाना साधते समय सांस रोक लेना, और जैसे ही अपनी गोली सटीक टकराती — मन में विजयी मुस्कान खिल उठती। कभी हारते तो उदासी भी होती, पर अगले ही पल फिर चुनौती देने को तैयार। न कोई मोबाइल, न कोई स्क्रीन — बस मिट्टी की सोंधी खुशबू और दोस्तों की खिलखिलाहट। आज जब उन पलों को याद करता हूँ, तो लगता है कि असली अमीरी जेब में नहीं, उन रंग-बिरंगी गोलियों और बेफिक्र हँसी में थी। बचपन की वही छोटी-सी दुनिया, सच में सबसे बड़ी दुनिया थी।
निगम मुख्यालय में ‘निगम आलोक पत्रिका-2025’ का लोकार्पण, हिंदी के प्रोत्साहन पर जोर
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के राजभाषा विभाग द्वारा निगम मुख्यालय, सिविक सेंटर में “निगम आलोक पत्रिका-2025” का भव्य लोकार्पण एवं हिंदी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्थायी समिति की अध्यक्षा सत्या शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वहीं अतिरिक्त आयुक्त संजीव मित्तल की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर निगम के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान “निगम आलोक पत्रिका-2025” का विधिवत विमोचन किया गया। इसके उपरांत आयोजित हिंदी कार्यशाला में प्रशासनिक कार्यों में राजभाषा हिंदी के प्रभावी उपयोग, सरल एवं सशक्त अभिव्यक्ति तथा कार्यालयीन कार्यप्रणाली में हिंदी के व्यापक संवर्धन पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। अपने संबोधन में सत्या शर्मा ने कहा कि राजभाषा हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक सुदृढ़ता का आधार है। उन्होंने कहा कि निगम में हिंदी के अधिकतम प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की अपील करते हुए प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के व्यापक उपयोग पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ।