पढ़ाई के लिए मां ने डांटा, किशोरी ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

मदनपुर: सलैया थाना क्षेत्र के कोल्हुआ गांव में रविवार की सुबह एक 14 वर्षीय किशोरी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। मृतका की पहचान कोल्हुआ निवासी धनंजय पासवान की 14 वर्षीय पुत्री प्रियंका कुमारी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, रविवार की सुबह प्रियंका घर से बाहर से वापस लौटी थी। इसी दौरान उसकी मां कविता देवी ने उसे पढ़ाई करने के लिए डांटा। इसके कुछ देर बाद मां अपने घरेलू काम में व्यस्त हो गयी। काम निपटाने के बाद जब वह घर के अंदर गयी तो बेटी को फंदे से लटका हुआ पाया। यह देखकर परिजनों के होश उड़ गये। परिजनों ने आनन-फानन में किशोरी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मदनपुर पहुंचाया, जहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. कुमार जय ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। चिकित्सक ने बताया कि 14 वर्षीय किशोरी को परिजन मृत अवस्था में अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उसके गर्दन पर निशान पाए गए थे। प्रथम दृष्टया मामला फांसी लगाने का प्रतीत हुआ। घटना की सूचना मिलने पर सलैया थाना के एसआई लक्ष्मण पांडेय पुलिस बल के साथ सीएचसी मदनपुर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल औरंगाबाद भेज दिया। सलैया थानाध्यक्ष कन्हैया शर्मा ने बताया कि 14 वर्षीय किशोरी द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की सूचना मिली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद मृतका के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी घटना को लेकर शोक का माहौल है।

पांच दिवसीय कला महोत्सव का होगा भव्य आयोजन

21 अक्टूबर से सभी प्रखंडों में ऑडिशन, 25 अक्टूबर को होगा फाइनल मुकाबला; संगीत और नृत्य की प्रतिभाओं को मिलेगा राष्ट्रीय स्तर पर पहचान औरंगाबाद : आगामी 25 अक्टूबर को राष्ट्रीय कला दिवस के अवसर पर पांच दिवसीय कला महोत्सव आयोजित किया जायेगा। कला महोत्सव की तैयारियों को लेकर अधिवक्ता संघ सभागार में एक बैठक आयोजित की गई।बैठक की अध्यक्षता कला कौशल मंच के संरक्षक एवं वरिष्ठ कवि लवकुश प्रसाद सिंह ने की। बैठक में महोत्सव के आयोजन, प्रखंडवार ऑडिशन, प्रतियोगिताओं की रूपरेखा और कलाकारों को सम्मानित करने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक का संचालन करते हुए कला कौशल मंच के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक आदित्य श्रीवास्तव ने बताया कि महोत्सव की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। इस बार राष्ट्रीय कला दिवस के अवसर पर कला महोत्सव को व्यापक स्तर पर आयोजित करने की योजना बनाई गई है। पांच दिवसीय कला महोत्सव का मुख्य उद्देश्य जिले में छिपी हुई कलात्मक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना तथा उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का एक शुभ अवसर उपलब्ध कराना है।आदित्य श्रीवास्तव ने बताया कि महोत्सव में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के चयन के लिए 21 अक्टूबर से प्रखंडवार ऑडिशन आयोजित किए जाएंगे। पहले चरण में 21 अक्टूबर को दाउदनगर में ऑडिशन होगा, जिसमें हसपुरा, गोह, ओबरा और दाउदनगर प्रखंड के प्रतिभागी शामिल होंगे।दूसरे चरण का ऑडिशन 22 अक्टूबर को नवीनगर में आयोजित किया जाएगा। इसमें नवीनगर, कुटुंबा, अंबा और बारुण क्षेत्र के प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इसके बाद देव में आयोजित ऑडिशन में रफीगंज, मदनपुर और देव क्षेत्र के प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। 24 अक्टूबर को जिला स्तरीय ऑडिशन आयोजित किया जाएगा,जबकि 25 अक्टूबर को चयनित कलाकारों के बीच फाइनल मुकाबला होगा।इस बार कला महोत्सव में संगीत और नृत्य की विधाओं को विशेष रूप से शामिल किया गया है। संगीत प्रतियोगिता में शास्त्रीय संगीत एवं लोकगीत के प्रतिभागी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे,वहीं,नृत्य प्रतियोगिता में कथक और भरतनाट्यम विधाओं को प्रमुख स्थान दिया गया है।संगीत प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विजेता बनने वाले प्रतिभागियों को ‘सुरों का बादशाह’ सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। वहीं, नृत्य प्रतियोगिता के विजेताओं को ‘भरतनाट्यम नृत्य सम्मान’ प्रदान किया जाएगा। आयोजन समिति का उद्देश्य इन प्रतिभाओं को प्रोत्साहित कर उनकी पहचान जिले से आगे राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है।इसके अतिरिक्त, जिले के नामचीन एवं वरिष्ठ कलाकारों को भी महोत्सव के मंच से ‘कला गौरव सम्मान’ प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। इसके माध्यम से कला और संस्कृति के क्षेत्र में लंबे समय से योगदान दे रहे कलाकारों के प्रति सम्मान प्रकट किया जाएगा।महोत्सव परिवार के प्रमुख एवं महोत्सव पुरुष सिद्धेश्वर विद्यार्थी ने कहा कि कला महोत्सव का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को उचित मंच प्रदान करना, उनकी प्रतिभा को निखारना और कला-संस्कृति की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाना है।बैठक में महोत्सव के सफल संचालन के लिए विभिन्न पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। कार्यक्रम प्रभारी के रूप में राम श्लोक रामा तथा सह प्रभारी के रूप में अक्षय पाठक को जिम्मेदारी दी गई। कार्यक्रम प्रमुख के रूप में मुकेश चौबे,राम श्याम और धर्मेंद्र यादव को दायित्व सौंपा गया। वहीं, महिला कार्यक्रम प्रमुख के रूप में कंचन,प्रज्ञा और सविता सिन्हा सहित अन्य सहयोगियों को जिम्मेदारी दी गई।

एनआईपीईआर रायबरेली और एस्ट्राजेनेका मिलकर 25 क्षेत्रों में मजबूत करेंगे क्लिनिकल रिसर्च

बायोफार्मा शक्ति पहल के तहत देश में क्लिनिकल ट्रायल की क्षमता बढ़ाने और प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करने पर जोर नई दिल्ली। भारत में क्लिनिकल रिसर्च की क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक क्लिनिकल ट्रायल में देश की भागीदारी बढ़ाने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (NIPER), रायबरेली और एस्ट्राजेनेका इंडिया ने साझेदारी की है। इसके तहत देश के 25 उभरते अनुसंधान क्षेत्रों में क्लिनिकल ट्रायल केंद्रों की क्षमता विकसित की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना और अनुसंधान केंद्रों को निर्धारित गुणवत्ता एवं निरीक्षण संबंधी मानकों के अनुरूप बनाना है। इस संबंध में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर बुधवार को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग के सचिव मनोज जोशी उपस्थित रहे। यह सहयोग केंद्र सरकार की ‘बायोफार्मा शक्ति’ पहल के उद्देश्यों को आगे बढ़ाएगा। इस पहल के तहत देशभर में 1,000 क्लिनिकल ट्रायल केंद्र स्थापित करने की परिकल्पना की गई है। 25 क्लिनिकल ट्रायल केंद्रों को मिलेगा प्रशिक्षण इस साझेदारी के शुरुआती चरण में 25 क्लिनिकल ट्रायल केंद्रों की पहचान कर उनकी मौजूदा क्षमताओं का आकलन किया जाएगा। इसके बाद केंद्रों को उनकी जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग दिया जाएगा। नैतिक मानकों, सुरक्षा, दस्तावेजीकरण और ट्रायल की व्यवहार्यता से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी मजबूत किया जाएगा। औषध विभाग इस पहल को दिशा और समर्थन प्रदान करेगा, जबकि एस्ट्राजेनेका इंडिया क्लिनिकल डेवलपमेंट के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगी। कंपनी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण, कार्यशालाओं, निगरानी व्यवस्था और अनुसंधान केंद्रों की तैयारी में सहयोग करेगी। प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करने पर जोर औषध विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि भारत में वैश्विक क्लिनिकल ट्रायल में बड़ी भूमिका निभाने के लिए प्रतिभा और विशेषज्ञता मौजूद है। महानगरों से बाहर अनुसंधान क्षमताओं का विस्तार करने से कुशल पेशेवरों और शोध के लिए तैयार केंद्रों की संख्या बढ़ेगी। सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग की साझेदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण है। एनआईपीईआर रायबरेली की निदेशक डॉ. शुभिनी सराफ ने कहा कि संस्थान में उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से क्लिनिकल रिसर्च में व्यवस्थित प्रशिक्षण और प्रमाणन की सुविधा विकसित की जाएगी। इससे प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करने और इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। एस्ट्राजेनेका फार्मा इंडिया लिमिटेड के कंट्री प्रेसिडेंट एवं प्रबंध निदेशक प्रवीण राव अक्किनेपल्ली ने कहा कि क्लिनिकल रिसर्च नई दवाओं को मरीजों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह पहल शुरुआती चरण में ऑन्कोलॉजी यानी कैंसर संबंधी अनुसंधान पर केंद्रित होगी। सफल परिणाम मिलने पर इसे अन्य चिकित्सा क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों तक विस्तारित किया जा सकेगा।

क्या है स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho? जिसे रेलमंत्री भी कर चुके हैं इस्तेमाल — माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को टक्कर देने वाला भारतीय टेक दिग्गजक्या है स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho? जिसे रेलमंत्री भी रहे इस्तेमाल, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को देगा टक्कर

Zoho

स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho: भारतीय टेक्नोलॉजी की दुनिया में क्रांति भारत ने पिछले कुछ वर्षों में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। इन्हीं में से एक चमकता हुआ नाम है Zoho Corporation, जो पूरी तरह से भारतीय स्वदेशी सॉफ्टवेयर कंपनी है। यह प्लेटफॉर्म न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों को चुनौती दे रहा है। रेलमंत्री समेत कई सरकारी अधिकारी हैं इसके यूज़र Zoho की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत के रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की पुष्टि की थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि वे Zoho का प्रयोग करते हैं क्योंकि यह “पूरी तरह भारतीय और सुरक्षित” है।यह बयान आने के बाद Zoho का नाम देशभर में ट्रेंड करने लगा और लोगों ने इस प्लेटफॉर्म को विदेशी विकल्पों के मुकाबले अपनाने की दिशा में रुचि दिखानी शुरू की। क्या है Zoho? Zoho Corporation एक भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी है जिसकी स्थापना 1996 में श्रीधर वेम्बू (Sridhar Vembu) ने की थी। इसका मुख्यालय चेन्नई और अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित है।Zoho कई तरह के क्लाउड-आधारित बिज़नेस टूल्स और एप्लिकेशन प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं: इन सेवाओं के ज़रिए कंपनियां अपने पूरे बिज़नेस सिस्टम को डिजिटल रूप से चला सकती हैं — बिना माइक्रोसॉफ्ट 365 या गूगल वर्कस्पेस पर निर्भर हुए। Zoho क्यों है खास? दुनिया में बढ़ता प्रभाव Zoho के आज 100 मिलियन (10 करोड़) से ज़्यादा यूज़र हैं। यह 180 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है।भारत के अलावा अमेरिका, जापान, सिंगापुर और यूरोप में भी Zoho का बड़ा ग्राहक आधार है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब Zoho के टूल्स को अपने सिस्टम में इंटीग्रेट कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को दे रहा है टक्कर Zoho का पूरा ईकोसिस्टम (ईमेल, डॉक्यूमेंट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, अकाउंटिंग, CRM आदि) इसे सीधे तौर पर Microsoft 365 और Google Workspace के बराबर खड़ा करता है।जहां विदेशी प्लेटफॉर्म्स के लिए भारत को केवल एक “मार्केट” के रूप में देखा जाता है, वहीं Zoho ने भारत को “इनोवेशन सेंटर” बना दिया है। संस्थापक का विज़न Zoho के सीईओ श्रीधर वेम्बू का कहना है — “हमारा लक्ष्य सिर्फ सॉफ्टवेयर बेचना नहीं, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।” वेम्बू ने ग्रामीण क्षेत्रों में Zoho के R&D सेंटर खोलकर यह साबित किया है कि भारत के छोटे कस्बों से भी विश्वस्तरीय तकनीक विकसित की जा सकती है। निष्कर्ष Zoho आज भारत की उस नई टेक पहचान का प्रतीक बन चुका है जो “Made in India, Built for the World” की भावना को साकार करता है।रेलमंत्री से लेकर छोटे स्टार्टअप तक, हर कोई इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म की ओर रुख कर रहा है। आने वाले समय में Zoho, भारत की डिजिटल स्वतंत्रता की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।