चार स्वर्ण पदक जीतने वाले सूरज कुमार को पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने किया सम्मानित

औरंगाबाद: भाजपा के पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने अपने आवासीय कार्यालय ‘सिंह कोठी’ पर जिले एवं लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत देव प्रखंड के ग्राम रियासत पवई निवासी सूरज कुमार को नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित WRP Federation वर्ल्ड कप पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में चार स्वर्ण पदक जीतने पर अंगवस्त्र देकर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।पूर्व सांसद ने कहा कि सूरज कुमार ने अपनी शानदार उपलब्धि से देश और औरंगाबाद जिले का नाम रोशन किया है।उनकी यह सफलता युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।कठिन परिश्रम,अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।9 से 11 अक्टूबर तक आयोजित इस प्रतियोगिता में 67.5 किलोग्राम भार वर्ग के अंतर्गत सूरज कुमार ने कुल 560 किलोग्राम वजन उठाकर फुल पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया।इसके अलावा उन्होंने बेंच प्रेस में 127.5 किलोग्राम,स्क्वाट में 205 किलोग्राम और डेडलिफ्ट में 227.5 किलोग्राम वजन उठाकर तीन अन्य स्वर्ण पदक भी अपने नाम किए।इस प्रकार उन्होंने प्रतियोगिता में कुल चार स्वर्ण पदक जीतकर जिले को गौरवान्वित किया है।सूरज कुमार की इस शानदार उपलब्धि से पूरे जिले में खुशी का माहौल है। उनकी सफलता पर जिले के जनप्रतिनिधियों,भाजपा नेताओं, खेल प्रेमियों और गणमान्य लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।इस अवसर पर बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील सिंह,कोच सुबेस्टिन जॉन,पूर्व सांसद प्रतिनिधि अश्विनी सिंह,देव के पूर्व उप प्रमुख मनीष पाठक,सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता आदित्य शेखर,युवा भाजपा नेता प्रवीर सिंह, शुभेन्दु शेखर,रवि सिंह,महेन्द्र भगत,भाजपा जिलामंत्री सुबोध सिंह,भाजपा नेता पप्पू सिंह,आलोक सिंह,दीपक सिंह,धीरज पांडेय,पूर्व मुखिया विनय मिश्रा,रविन्द्र शर्मा,अशोक सिंह,जिला मीडिया प्रभारी मितेन्द्र सिंह सहित अनेक समाजसेवी, बुद्धिजीवी एवं शिक्षाविदों ने सूरज कुमार को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं व्यक्त की।

क्या है स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho? जिसे रेलमंत्री भी कर चुके हैं इस्तेमाल — माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को टक्कर देने वाला भारतीय टेक दिग्गजक्या है स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho? जिसे रेलमंत्री भी रहे इस्तेमाल, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को देगा टक्कर

Zoho

स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho: भारतीय टेक्नोलॉजी की दुनिया में क्रांति भारत ने पिछले कुछ वर्षों में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। इन्हीं में से एक चमकता हुआ नाम है Zoho Corporation, जो पूरी तरह से भारतीय स्वदेशी सॉफ्टवेयर कंपनी है। यह प्लेटफॉर्म न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों को चुनौती दे रहा है। रेलमंत्री समेत कई सरकारी अधिकारी हैं इसके यूज़र Zoho की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत के रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की पुष्टि की थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि वे Zoho का प्रयोग करते हैं क्योंकि यह “पूरी तरह भारतीय और सुरक्षित” है।यह बयान आने के बाद Zoho का नाम देशभर में ट्रेंड करने लगा और लोगों ने इस प्लेटफॉर्म को विदेशी विकल्पों के मुकाबले अपनाने की दिशा में रुचि दिखानी शुरू की। क्या है Zoho? Zoho Corporation एक भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी है जिसकी स्थापना 1996 में श्रीधर वेम्बू (Sridhar Vembu) ने की थी। इसका मुख्यालय चेन्नई और अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित है।Zoho कई तरह के क्लाउड-आधारित बिज़नेस टूल्स और एप्लिकेशन प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं: इन सेवाओं के ज़रिए कंपनियां अपने पूरे बिज़नेस सिस्टम को डिजिटल रूप से चला सकती हैं — बिना माइक्रोसॉफ्ट 365 या गूगल वर्कस्पेस पर निर्भर हुए। Zoho क्यों है खास? दुनिया में बढ़ता प्रभाव Zoho के आज 100 मिलियन (10 करोड़) से ज़्यादा यूज़र हैं। यह 180 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है।भारत के अलावा अमेरिका, जापान, सिंगापुर और यूरोप में भी Zoho का बड़ा ग्राहक आधार है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब Zoho के टूल्स को अपने सिस्टम में इंटीग्रेट कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को दे रहा है टक्कर Zoho का पूरा ईकोसिस्टम (ईमेल, डॉक्यूमेंट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, अकाउंटिंग, CRM आदि) इसे सीधे तौर पर Microsoft 365 और Google Workspace के बराबर खड़ा करता है।जहां विदेशी प्लेटफॉर्म्स के लिए भारत को केवल एक “मार्केट” के रूप में देखा जाता है, वहीं Zoho ने भारत को “इनोवेशन सेंटर” बना दिया है। संस्थापक का विज़न Zoho के सीईओ श्रीधर वेम्बू का कहना है — “हमारा लक्ष्य सिर्फ सॉफ्टवेयर बेचना नहीं, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।” वेम्बू ने ग्रामीण क्षेत्रों में Zoho के R&D सेंटर खोलकर यह साबित किया है कि भारत के छोटे कस्बों से भी विश्वस्तरीय तकनीक विकसित की जा सकती है। निष्कर्ष Zoho आज भारत की उस नई टेक पहचान का प्रतीक बन चुका है जो “Made in India, Built for the World” की भावना को साकार करता है।रेलमंत्री से लेकर छोटे स्टार्टअप तक, हर कोई इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म की ओर रुख कर रहा है। आने वाले समय में Zoho, भारत की डिजिटल स्वतंत्रता की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।