चारधाम यात्रा में अब तक 59.08 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन: सतपाल महाराज
अब तक 72.45 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण कुलदीप कुमार हरिद्वार, 15 अक्टूबर। कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज ने वर्तमान यात्राकाल में चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की है। हरिद्वार भ्रमण के दौरान उन्होंने बताया कि अब तक कुल 59,08,972 श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा सुचारू एवं सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही है और श्रद्धालुओं में यात्रा को लेकर व्यापक उत्साह बना हुआ है।श्री महाराज ने बताया कि वर्तमान यात्राकाल में यमुनोत्री धाम में 8,26,965, गंगोत्री धाम में 9,29,664, केदारनाथ धाम में 17,29,170 तथा बदरीनाथ धाम में 20,32,477 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।उन्होंने बताया कि वर्तमान सीजन की चारधाम यात्रा के लिए अब तक कुल 72,45,218 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है। राज्य सरकार श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी में अंकित भंडारी प्रकरण और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाये जाने पर लेकर की पत्रकार वार्ता
राकेश कुमार देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड के आरोपी दुष्यन्त कुमार गौतम को सिक्किम प्रदेश का राज्यपाल बनाये जाने के विरोध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। पत्रकार वार्ता को प्रदेश कंाग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, प्रदेश चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डॉ0 हरक सिंह रावत, प्रदेश सहप्रभारी सुरेन्द्र शर्मा ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।पत्रकारों को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सितम्बर 2022 में जनपद पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनन्तरा रिजॉर्ट में कार्यरत उत्तराखण्ड की बेटी अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या ने न केवल देवभूमि उत्तराखण्ड, बल्कि पूरे देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था। इस जघन्य हत्याकांड के बाद से ही प्रदेश की जनता, विशेषकर महिलाओं, युवाओं एवं सामाजिक संगठनों द्वारा इस प्रकरण में कथित वीवीआईपी की भूमिका उजागर करने तथा पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराये जाने की मांग लगातार उठाई जाती रही है।कंग्रेस नेताओं ने कहा कि यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण एवं चिंताजनक है कि चार वर्ष से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बावजूद अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीवीआईपी की पहचान एवं उसकी भूमिका को लेकर जनता के मन में व्याप्त संदेह का संतोषजनक निराकरण नहीं हो पाया है। इस प्रकरण में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री दुष्यंत कुमार गौतम का नाम भी सार्वजनिक आरोपों एवं चर्चाओं में सामने आया है। ऐसे समय में जब अंकिता भंडारी के परिजन एवं उत्तराखण्ड की जनता कथित वीवीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच तथा सम्पूर्ण सत्य सामने लाये जाने की मांग कर रहे हैं, श्री दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम प्रदेश के महामहिम राज्यपाल जैसे अत्यन्त गरिमामय एवं संवैधानिक पद पर नियुक्त किये जाने के निर्णय से प्रदेश की जनता की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का स्पष्ट मानना है कि किसी भी व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नियुक्त किये जाने से पूर्व उससे जुड़े गंभीर सार्वजनिक आरोपों एवं विवादों का निष्पक्ष निराकरण होना चाहिए, ताकि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर किसी प्रकार का प्रश्नचिह्न न लगे। राज्यपाल का पद भारतीय संविधान के अन्तर्गत अत्यन्त सम्मानित एवं महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है। इस पद पर आसीन व्यक्ति से उच्चतम नैतिक मानदण्डों, निष्पक्षता एवं सार्वजनिक जीवन में निर्विवाद आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसी स्थिति में अंकिता भंडारी जैसे संवेदनशील हत्याकांड में कथित भूमिका को लेकर सार्वजनिक आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति की नियुक्ति से जनमानस में गलत संदेश जाने की आशंका है।यह भी अत्यन्त पीड़ादायक है कि उत्तराखण्ड की एक बेटी को न्याय दिलाने के लिए उसके परिजनों एवं प्रदेश की जनता को वर्षों से संघर्ष करना पड़ रहा है तथा उनके माता पिता को उत्तराखंड एवं दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर प्रताडित किया जा रहा है। अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता तथा सत्ता के प्रभाव से मुक्त जांच सुनिश्चित करने की संवैधानिक जिम्मेदारी से जुड़ा अत्यन्त गंभीर विषय है।प्रदेश कांग्रेस कमेटी का यह भी कहना है कि यदि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। कानून की दृष्टि में सभी नागरिक समान हैं तथा किसी भी व्यक्ति की राजनीतिक हैसियत अथवा संवैधानिक पद न्यायिक जांच में बाधा नहीं बनना चाहिए।
मेजर जनरल ने लिया अग्निवीर रैली का जायजानिष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई
कुलदीप कुमार रुड़की, 15 अक्टूबर। मुख्यालय भर्ती क्षेत्र (उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) के अतिरिक्त महानिदेशक, मेजर जनरल मनीष कुमार वायएसएम, एसएम ने रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर के पैवेलियन ग्राउंड में चल रही ‘अग्निवीर भर्ती रैली’ का व्यापक निरीक्षण किया। 05 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक चलने वाला यह बड़ा भर्ती अभियान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होने का एक सुनहरा अवसर है, जो भर्ती वर्ष 2027 के लिए है। रैली का आज का चरण विशेष रूप से चमोली जिले के उन ‘अग्निवीर जनरल ड्यूटी’ उम्मीदवारों के लिए था, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में आयोजित कॉमन एंट्रेंस एग्जाम पास किया है। वहाँ पहुँचने पर, मेजर जनरल ने रैली ग्राउंड का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने शारीरिक फिटनेस परीक्षण क्षेत्रों, बायोमेट्रिक सत्यापन केंद्रों और दस्तावेजों की डिजिटल जाँच प्रक्रिया का जायजा लिया। युवाओं से बातचीत करते हुए, उन्होंने उनके साहस, बड़ी संख्या में उपस्थिति और देश सेवा के प्रति उनके दृढ़ संकल्प की सराहना की। मेजर जनरल ने दोहराया कि भारतीय सेना, नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर, एक पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और केवल योग्यता (मेरिट) पर आधारित भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीदवारों को सलाह दी कि वे किसी भी दलाल, एजेंट या बिचौलिए के संपर्क में न आएँ और न ही उन्हें कोई पैसा दें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी प्रक्रिया स्वचालित और डिजिटल रूप से सुरक्षित है, जिसे कोई भी व्यक्ति प्रभावित नहीं कर सकता।इतने बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली रैली के लिए किए गए भारी प्रशासनिक और शारीरिक प्रयासों को देखते हुए, ADG ने आयोजन टीम से बातचीत की और उनके निरंतर समर्पण तथा कार्यकुशलता की प्रशंसा की। अपने दौरे के दौरान, ADG ने BEG एंड सेंटर के कमांडेंट, नागरिक प्रशासन के अधिकारियों, तथा शिक्षा और चिकित्सा विभागों के कर्मचारियों से भी मुलाकात की, ताकि प्रशासनिक तालमेल और लॉजिस्टिक सहयोग की समीक्षा की जा सके। मेजर जनरल ने नागरिक और सैन्य प्रशासन के बीच बेहतरीन समन्वय की सराहना की, जिसकी बदौलत हजारों युवाओं के लिए एक सुचारू, सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित हो पा रहा है।
उत्तराखण्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल : सीएम
सीएम ने किया पं. दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार वितरण समारोह में प्रतिभागसीएम ने किया 63 मेधावी छात्र-छात्राओं तथा उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले छह विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित कुलदीप कुमार देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज शासकीय आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित पं. दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार वितरण समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद की वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं में शीर्ष 10 स्थान प्राप्त करने वाले 63 मेधावी छात्र-छात्राओं तथा उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले छह विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया। समारोह में हाईस्कूल के 38 और इंटरमीडिएट के 25 मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। इसके साथ ही हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट स्तर पर उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले तीन-तीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को प्रशस्ति पत्र एवं मुख्यमंत्री ट्रॉफी से सम्मानित किया गया।मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित मेधावी छात्र-छात्राओं एवं प्रधानाचार्यों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। इसमें शिक्षकों और अभिभावकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में प्रदेश का हाईस्कूल परीक्षाफल 92.10 प्रतिशत तथा इंटरमीडिएट का परीक्षाफल 85.11 प्रतिशत रहा, जो सराहनीय उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के विद्यार्थी भविष्य में भी अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बल पर राज्य एवं देश का नाम रोशन करेंगे। मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय का स्मरण करते हुए कहा कि वे एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता होने के साथ ही महान विचारक, शिक्षाविद् और समाजसेवी थे। उनका मानना था कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसमें राष्ट्रप्रेम, नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और व्यावहारिक ज्ञान का भी समावेश होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उत्तराखण्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार शिक्षा में नवाचार, डिजिटल लर्निंग और भारतीय जीवन मूल्यों को बढ़ावा देने के साथ ही विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा नंदा गौरा योजना के अंतर्गत 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाली पात्र छात्राओं को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम एवं सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित किए गए हैं तथा सरकारी विद्यालयों में NCERT की पुस्तकों को अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही विद्यालयों की प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान और नई तकनीकों की समझ विकसित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के माध्यम से अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अपनी प्रतिभा को निखारने के समान अवसर प्राप्त हों।उन्होंने उत्तराखण्ड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। इस संकल्प को साकार करने में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के मेधावी विद्यार्थी अपने ज्ञान, कौशल और परिश्रम के बल पर सफलता के नए आयाम स्थापित करेंगे तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक श्रीमती सविता कपूर, सचिव शिक्षा सुश्री ज्योति यादव, अपर सचिव शिक्षा श्रीमती नमामि बंसल एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
भारतीय तटरक्षक बल का ऐतिहासिक पर्वतारोहण, 7,045 मीटर ऊंचे माउंट मुकुट ईस्ट पर फहराया उत्तराखंड का विशाल ध्वज
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में अभियान दल का किया फ्लैग-इन, 2027 के एवरेस्ट अभियान के लिए बढ़ाया उत्साह देहरादून। भारतीय तटरक्षक बल और हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट (एचएमआई), दार्जिलिंग के संयुक्त पर्वतारोहण अभियान दल ने 7,045 मीटर ऊंचे माउंट मुकुट ईस्ट का सफल आरोहण कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह भारतीय तटरक्षक बल के इतिहास में 7,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली किसी पर्वत चोटी पर पहला सफल आरोहण है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में अभियान दल का फ्लैग-इन कर सभी सदस्यों को बधाई दी। एचएमआई के प्राचार्य कर्नल रजनीश जोशी के नेतृत्व में संपन्न इस अभियान को उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 गौरवशाली वर्षों को समर्पित किया गया। अभियान दल ने माउंट मुकुट ईस्ट के शिखर पर 2,500 वर्ग फुट का विशाल उत्तराखंड ध्वज फहराकर प्रदेश का मान बढ़ाया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हिमालय की दुर्गम परिस्थितियों में इस तरह की सफलता पर्वतारोहियों के अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और टीम भावना का परिचायक है। यह उपलब्धि भारतीय तटरक्षक बल के साथ-साथ पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान साहस, शौर्य और समृद्ध पर्वतारोहण परंपरा से जुड़ी रही है। राज्य के रजत जयंती वर्ष को समर्पित इस अभियान की सफलता प्रदेश की गौरवशाली यात्रा और हिमालय के साथ उसके गहरे जुड़ाव को प्रदर्शित करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उसके जवानों द्वारा हिमालय की ऊंचाइयों पर इस तरह की उपलब्धि हासिल करना उनके उत्कृष्ट प्रशिक्षण और साहसिक क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस अभियान से प्राप्त अनुभव वर्ष 2027 में प्रस्तावित माउंट एवरेस्ट अभियान की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एवरेस्ट अभियान की तैयारी का अहम पड़ाव एचएमआई, दार्जिलिंग के प्राचार्य एवं अभियान दल के नेतृत्वकर्ता कर्नल रजनीश जोशी ने बताया कि भारतीय तटरक्षक बल वर्ष 2027 में अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे करने जा रहा है। स्वर्ण जयंती के अवसर पर प्रस्तावित माउंट एवरेस्ट अभियान की तैयारियों के तहत माउंट मुकुट ईस्ट का आरोहण किया गया। पर्वतारोहियों के चयन और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट, दार्जिलिंग को सौंपी गई है। इस अवसर पर भारतीय तटरक्षक बल के अपर महानिदेशक आनंद प्रकाश बडोला, उप महानिरीक्षक हिमांशु नौटियाल, उप महानिरीक्षक डी.एस. चौहान, कमांडेंट अमित उनियाल, कमांडेंट विश्वजीत सिंह, एचएमआई के पासांग तेनजिंग शेरपा सहित अभियान दल के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कैप्शन: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में माउंट मुकुट ईस्ट का सफल आरोहण करने वाले भारतीय तटरक्षक बल एवं एचएमआई के संयुक्त पर्वतारोहण अभियान दल का फ्लैग-इन कर सम्मानित किया।
‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के तहत कांग्रेस का सर्वोच्च न्यायालय कूच, उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में सैकड़ों नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने किया प्रतिभाग
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे एवं गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन। लोकतंत्र एवं संविधान की रक्षा के लिए कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगाः-गणेश गोदियाल, कुलदीप कुमार देहरादून /नई दिल्ली: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर देशभर में चलाये जा रहे ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे एवं गिरफ्तारी की मांग को लेकर आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी के आह्वान पर नई दिल्ली में आयोजित सर्वोच्च न्यायालय मार्च में उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल के नेतृत्व में प्रदेश के सैकड़ों वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं, विधायकों, पूर्व विधायकों, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल के नेतृत्व में उत्तराखण्ड से पहुंचे कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने नई दिल्ली के बाराखंबा रोड से सर्वोच्च न्यायालय की ओर कूच करते हुए निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में जोरदार नारेबाजी की तथा देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, संविधान एवं नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव प्रणाली सुनिश्चित किये जाने की मांग उठाई। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का वोट सबसे बड़ी ताकत है और इस ताकत को कमजोर करने का किसी भी संस्था अथवा सरकार को कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। निर्वाचन आयोग जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर देश की जनता के मन में पैदा हो रहे संदेह लोकतंत्र के भविष्य के लिए अत्यन्त चिन्ताजनक हैं। श्री गणेश गोदियाल ने कहा कि देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन कांग्रेस पार्टी द्वारा मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं, मतदाताओं के नाम काटे जाने तथा चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर उठाये जा रहे गम्भीर सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए तथा कांग्रेस पार्टी उनके तत्काल इस्तीफे एवं कथित अनियमितताओं में आपराधिक संलिप्तता की जांच कर कानूनी कार्रवाई एवं गिरफ्तारी की मांग करती है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान मताधिकार प्रदान करता है, लेकिन यदि मतदाता सूची की शुचिता और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर ही प्रश्नचिह्न लगने लगें तो लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को अपने राजनीतिक हितों के अनुरूप संचालित करने का प्रयास कर रही है, जिसका कांग्रेस पार्टी प्रत्येक स्तर पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती रहेगी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी लगातार देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, संविधान एवं आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में चलाया जा रहा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान केवल कांग्रेस पार्टी का राजनीतिक आन्दोलन नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता की रक्षा का अभियान है। चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष श्री प्रीतम सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड में भी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा लगातार गम्भीर सवाल उठाये गये हैं। अनेक स्थानों पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाये जाने के प्रयासों तथा मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं के सम्बन्ध में निर्वाचन अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गये, लेकिन इन शिकायतों पर प्रभावी एवं पारदर्शी कार्रवाई नहीं होने से निर्वाचन प्रक्रिया के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर देश के नागरिकों के मताधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि जिस देश में वोट सुरक्षित नहीं होगा, उस देश में लोकतंत्र भी सुरक्षित नहीं रह सकता। इसलिए कांग्रेस का यह संघर्ष किसी व्यक्ति अथवा पद के विरुद्ध मात्र नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को बचाने के लिए है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र जनता की आवाज दबाने से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से मजबूत होता है। कांग्रेस पार्टी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक अपना संघर्ष जारी रखेगी। चुनाव प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष डॉ0 हरक सिंह रावत ने कहा कि देश की जनता अब अपने मताधिकार एवं लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुकी है। यदि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई और विपक्ष द्वारा उठाये जा रहे गम्भीर सवालों का संतोषजनक समाधान नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी अपने आन्दोलन को और अधिक व्यापक रूप देगी। कूच में उत्तराखण्ड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष श्री प्रीतम सिंह, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सहप्रभारी श्री सुरेन्द्र शर्मा एवं श्री मनोज यादव, चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, पश्चिम बंगाल प्रभारी श्री प्रकाश जोशी, उपनेता प्रतिपक्ष श्री भुवन कापड़ी, पूर्व सांसद श्री प्रदीप टम्टा, विधायक श्री विक्रम सिंह नेगी, श्री लखपत बुटोला एवं श्री फुरकान अहमद, पूर्व विधायक श्री ललित फर्स्वाण, प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष श्रीमती गोदावरी थापली, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री संजय पालीवाल, श्री सी.पी. सिंह, श्री जयेन्द्र रमोला, श्रीमती अरुणा कुमार, श्री हिमांशु गाबा, श्री राकेश राणा, श्री सोमेन्द्र बोरा एवं श्री प्रशांत खंडूरी आर्येन्द्र शर्मा, संजय सैनी, संजय जैन, तेलूराम प्रधान, प्रदीप थपलियाल, राजवीर चौहान, मोहित शर्मा, सूरत सिंह नेगी, विपुल जैन, विनीत भट्ट, दिनेश कौशल, दिनेश चौहान, महेश जोशी, रामयश सिंह, दिनेश कौशलसहित उत्तराखण्ड के सैकड़ों कांग्रेस नेताओं, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया। कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’, ‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’, ‘संविधान का सम्मान करो’, ‘मताधिकार की रक्षा करो’ तथा ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त इस्तीफा दो’ जैसे नारे लगाते हुए निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता एवं चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित किये जाने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल ने स्पष्ट किया कि जब तक देश के प्रत्येक पात्र नागरिक का मताधिकार सुरक्षित नहीं होता तथा निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान नहीं
11 हजार कन्याओं के पूजन का संकल्प
राकेश कुमार देहरादून। महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल के नेतृत्व में कैंट विधानसभा के अंतर्गत बल्लूपुर मंदिर एवं वार्ड 41 इंदिरापुरम में दुर्गा मंदिर सीमा द्वार शिव शक्ति मंदिर में शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल जी के नेतृत्व में नौ दिवसीय कन्या पूजन प्रारंभ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन के अंतर्गत नौ दिनों में कुल 11,000 कन्याओं का पूजन करने का संकल्प लिया गया है। कार्यक्रम के तहत प्रत्येक दिन 1,100 से अधिक कन्याओं का पूजन कर मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जा रही है। इस आयोजन का उद्देश्य सनातन संस्कृति, नारी शक्ति के सम्मान तथा धार्मिक परंपराओं के प्रति जनजागरण का संदेश देना है।महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल ने बताया कि पहला नवरात्रा मां शैलपुत्री की आराधना के साथ शुभारंभ किया गया। मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा -अर्चना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर 1,100 कन्याओं का पूजन कर उन्हें देवी स्वरूप मानते हुए तिलक लगाया गया तथा पुष्प, चुनरी, प्रसाद एवं भोजन अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल ने कहा कि मां शैलपुत्री शक्ति, धैर्य, दृढ़ संकल्प और आस्था की प्रतीक हैं। नवरात्र का प्रथम दिन हमें जीवन में सकारात्मकता, साहस और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कन्या पूजन हमारी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है, जो समाज को बेटियों के प्रति सम्मान, स्नेह और समानता का भाव रखने का संदेश देता है।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। बेटियों का सम्मान, उनकी सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तीकरण प्रत्येक व्यक्ति एवं परिवार की जिम्मेदारी है।मां ब्रह्मचारिणी की पूजा -अर्चना एवं कन्या पूजननवरात्र के द्वितीय दिवस पर मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के साथ 1,100 कन्याओं का पूजन किया गया। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग, संयम, साधना और दृढ़ इच्छाशक्ति की प्रतीक हैं। उनके स्वरूप से हमें अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने तथा कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।इस अवसर पर आयोजन में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से समाज एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल जी ने कहा कि नवरात्र केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक दायित्वों को समझने का अवसर भी है। कन्या पूजन के माध्यम से हम यह संकल्प लेते हैं कि समाज में प्रत्येक बेटी को सम्मान, सुरक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों। इस अवसर पर कैंट की विधायक श्रीमती सविता कपूर ने भी कन्याओं का विधिवत पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष सुमित पांडे आशीष शर्मा महिला मोर्चा अध्यक्ष सुमन सिंह पार्षद शेखर नौटियाल सहित सैकड़ो मां स्वरूप कन्या उपस्थिति रही।
एसआईआर के विरोध में देहरादून में नागरिक मार्च, प्रदर्शनकारी हिरासत में
मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बहाली और 2026 की एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने की मांग देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और प्री-एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में सोमवार को विभिन्न सामाजिक, महिला, छात्र और जन संगठनों ने नागरिक मार्च निकाला। उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच के नेतृत्व में निकला मार्च गांधी पार्क से शुरू होकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ा। सचिवालय के निकट पुलिस ने मार्च रोक दिया। आयोजकों के अनुसार, इस दौरान धक्का-मुक्की हुई और आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया गया। इसके कारण वे ज्ञापन नहीं सौंप सके। मार्च में सीटू, एसएफआई, किसान सभा, नौजवान सभा, जनवादी महिला संगठन, इप्टा सहित कई संगठनों तथा सीपीएम, सीपीआई, आप और यूकेडी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हिरासत में लिए गए प्रमुख लोगों में कमला पंत, निर्मला बिष्ट और डॉ. रवि चोपड़ा शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि प्री-एसआईआर और एसआईआर के दौरान उत्तराखंड में लगभग 17.05 लाख नाम हटाए गए, जबकि करीब 4.01 लाख नाम जोड़े गए। उन्होंने नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। उचित जांच और निर्धारित प्रक्रिया के बिना किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। संगठनों ने वर्ष 2026 की एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने, हटाए गए नामों की बहाली, स्वतंत्र ऑडिट, बूथ स्तर पर शिकायत निवारण शिविर और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण की मांग की। उन्होंने कहा कि मताधिकार की रक्षा के लिए निर्वाचन प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए।
कुछ लोग केवल उपचार नहीं करते, बल्कि जीवन भी लौटा देते हैं: राजेश पंत
देहरादून : विश्व प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात की पवित्र यात्रा केवल पहाड़ों की कठिन पगडंडियों पर चलने वाली एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह हिमालय की आस्था, संस्कृति, लोकविश्वास और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी उत्तराखंड की महान सांस्कृतिक परंपरा है। इसी पावन यात्रा में शामिल होने का सौभाग्य मुझे भी मिला। लेकिन चमोली की दुर्गम पहाड़ियों में अचानक मेरी तबीयत इतनी गंभीर रूप से बिगड़ गई कि एक क्षण को जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी बेहद छोटी दिखाई देने लगी।उस कठिन समय में चमोली के अनजान लोगों ने जिस आत्मीयता और अपनत्व के साथ मेरी सहायता की, उसे शब्दों में व्यक्त करना मेरे लिए संभव नहीं है। जिनसे मेरा कोई परिचय नहीं था, वे मेरे अपने बनकर खड़े हो गए। किसी ने संभाला, किसी ने रास्ता दिखाया, किसी ने अस्पताल पहुँचाने की चिंता की और किसी ने मेरे परिजनों को सूचना देने में सहयोग किया। गढ़वाल की यही तो पहचान है—भोलेपन में बसी मनुष्यता और अतिथि को अपना मान लेने वाली मेहमाननवाजी।यदि उन लोगों ने समय पर मेरी सुध न ली होती और मुझे शीघ्र चिकित्सा सहायता न मिली होती, तो शायद आज मैं यह शब्द लिखने के लिए जीवित न होता।मुझे तत्काल हिमालयन अस्पताल, जौलीग्रांट, देहरादून पहुँचाया गया। अस्पताल के चिकित्सकों और पूरे चिकित्सा दल ने जिस तत्परता, संवेदनशीलता और कुशलता के साथ मेरा उपचार किया, वह मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। मुझे उचित और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिला और वह भी अत्यंत वाजिब खर्च में।मैं अस्पताल के चिकित्सकों एवं समस्त चिकित्सा-कर्मियों के प्रति हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त करता हूँ।विशेष रूप से अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी श्री सत्यपाल जी का मैं आत्मीय धन्यवाद करता हूँ। बीमारी और असहायता के उस समय में उन्होंने जिस संवेदनशीलता और मानवीयता का परिचय दिया, वह मेरे लिए सदैव स्मरणीय रहेगी। अस्पताल में केवल दवाइयां और चिकित्सा ही नहीं मिलीं, बल्कि यह विश्वास भी मिला कि अभी जीवन बाकी है।आज जब मैं पीछे मुड़कर उस घटना को देखता हूँ तो लगता है कि नंदा देवी की राजजात ने मुझे केवल हिमालय के दर्शन ही नहीं कराए, बल्कि हिमालय के भीतर बसे मनुष्य के हृदय के भी दर्शन करा दिए।नंदा देवी को विदा करने और उनके मायके से ससुराल की ओर प्रस्थान की इस महान लोकयात्रा में मैं स्वयं भी जीवन की एक कठिन यात्रा से होकर लौटा हूँ। वहां के लोगों ने जिस तरह मुझे संभाला, वह मेरे लिए मां नंदा की कृपा से कम नहीं था।मेरे लिए वे सभी अनजान लोग अब अनजान नहीं रहे।वे मेरे जीवन के वे रक्षक हैं, जिनका ऋण मैं शायद जीवन भर नहीं चुका पाऊंगा।गढ़वाल की धरती को मेरा नमन।उसकी सरल, भोली और अतिथि-सत्कार करने वाली जनता को मेरा प्रणाम।नंदा देवी की उस पावन परंपरा को मेरा नमन, जिसने मुझे हिमालय की संस्कृति के साथ-साथ हिमालय की मानवता से भी परिचित कराया।और उन सभी चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों तथा विशेष रूप से डाक्टर अनुराग रावत और जनसंपर्क अधिकारी श्री सत्यपाल जी को हृदय से धन्यवाद, जिन्होंने कठिन समय में मेरा हाथ थामा और मुझे फिर जीवन की ओर लौटाया। कभी-कभी जीवन हमें दूसरी बार मिलता है।ऐसे जीवन के हर श्वास में उन हाथों की स्मृति रहती है,जिन्होंने मृत्यु के अंधेरे से निकालकर हमें फिर उजाले में ला खड़ा किया।मैं उन सभी के प्रति नतमस्तक हूँ।
क्या है स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho? जिसे रेलमंत्री भी कर चुके हैं इस्तेमाल — माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को टक्कर देने वाला भारतीय टेक दिग्गजक्या है स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho? जिसे रेलमंत्री भी रहे इस्तेमाल, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को देगा टक्कर

स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho: भारतीय टेक्नोलॉजी की दुनिया में क्रांति भारत ने पिछले कुछ वर्षों में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। इन्हीं में से एक चमकता हुआ नाम है Zoho Corporation, जो पूरी तरह से भारतीय स्वदेशी सॉफ्टवेयर कंपनी है। यह प्लेटफॉर्म न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों को चुनौती दे रहा है। रेलमंत्री समेत कई सरकारी अधिकारी हैं इसके यूज़र Zoho की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत के रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की पुष्टि की थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि वे Zoho का प्रयोग करते हैं क्योंकि यह “पूरी तरह भारतीय और सुरक्षित” है।यह बयान आने के बाद Zoho का नाम देशभर में ट्रेंड करने लगा और लोगों ने इस प्लेटफॉर्म को विदेशी विकल्पों के मुकाबले अपनाने की दिशा में रुचि दिखानी शुरू की। क्या है Zoho? Zoho Corporation एक भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी है जिसकी स्थापना 1996 में श्रीधर वेम्बू (Sridhar Vembu) ने की थी। इसका मुख्यालय चेन्नई और अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित है।Zoho कई तरह के क्लाउड-आधारित बिज़नेस टूल्स और एप्लिकेशन प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं: इन सेवाओं के ज़रिए कंपनियां अपने पूरे बिज़नेस सिस्टम को डिजिटल रूप से चला सकती हैं — बिना माइक्रोसॉफ्ट 365 या गूगल वर्कस्पेस पर निर्भर हुए। Zoho क्यों है खास? दुनिया में बढ़ता प्रभाव Zoho के आज 100 मिलियन (10 करोड़) से ज़्यादा यूज़र हैं। यह 180 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है।भारत के अलावा अमेरिका, जापान, सिंगापुर और यूरोप में भी Zoho का बड़ा ग्राहक आधार है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब Zoho के टूल्स को अपने सिस्टम में इंटीग्रेट कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को दे रहा है टक्कर Zoho का पूरा ईकोसिस्टम (ईमेल, डॉक्यूमेंट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, अकाउंटिंग, CRM आदि) इसे सीधे तौर पर Microsoft 365 और Google Workspace के बराबर खड़ा करता है।जहां विदेशी प्लेटफॉर्म्स के लिए भारत को केवल एक “मार्केट” के रूप में देखा जाता है, वहीं Zoho ने भारत को “इनोवेशन सेंटर” बना दिया है। संस्थापक का विज़न Zoho के सीईओ श्रीधर वेम्बू का कहना है — “हमारा लक्ष्य सिर्फ सॉफ्टवेयर बेचना नहीं, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।” वेम्बू ने ग्रामीण क्षेत्रों में Zoho के R&D सेंटर खोलकर यह साबित किया है कि भारत के छोटे कस्बों से भी विश्वस्तरीय तकनीक विकसित की जा सकती है। निष्कर्ष Zoho आज भारत की उस नई टेक पहचान का प्रतीक बन चुका है जो “Made in India, Built for the World” की भावना को साकार करता है।रेलमंत्री से लेकर छोटे स्टार्टअप तक, हर कोई इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म की ओर रुख कर रहा है। आने वाले समय में Zoho, भारत की डिजिटल स्वतंत्रता की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।