उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी में अंकित भंडारी प्रकरण और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाये जाने पर लेकर की पत्रकार वार्ता

देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड के आरोपी दुष्यन्त कुमार गौतम को सिक्किम प्रदेश का राज्यपाल बनाये जाने के विरोध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। पत्रकार वार्ता को प्रदेश कंाग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, प्रदेश चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डॉ0 हरक सिंह रावत, प्रदेश सहप्रभारी सुरेन्द्र शर्मा ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।
पत्रकारों को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सितम्बर 2022 में जनपद पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनन्तरा रिजॉर्ट में कार्यरत उत्तराखण्ड की बेटी अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या ने न केवल देवभूमि उत्तराखण्ड, बल्कि पूरे देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था। इस जघन्य हत्याकांड के बाद से ही प्रदेश की जनता, विशेषकर महिलाओं, युवाओं एवं सामाजिक संगठनों द्वारा इस प्रकरण में कथित वीवीआईपी की भूमिका उजागर करने तथा पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराये जाने की मांग लगातार उठाई जाती रही है।
कंग्रेस नेताओं ने कहा कि यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण एवं चिंताजनक है कि चार वर्ष से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बावजूद अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीवीआईपी की पहचान एवं उसकी भूमिका को लेकर जनता के मन में व्याप्त संदेह का संतोषजनक निराकरण नहीं हो पाया है। इस प्रकरण में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री दुष्यंत कुमार गौतम का नाम भी सार्वजनिक आरोपों एवं चर्चाओं में सामने आया है। ऐसे समय में जब अंकिता भंडारी के परिजन एवं उत्तराखण्ड की जनता कथित वीवीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच तथा सम्पूर्ण सत्य सामने लाये जाने की मांग कर रहे हैं, श्री दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम प्रदेश के महामहिम राज्यपाल जैसे अत्यन्त गरिमामय एवं संवैधानिक पद पर नियुक्त किये जाने के निर्णय से प्रदेश की जनता की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।
उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का स्पष्ट मानना है कि किसी भी व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नियुक्त किये जाने से पूर्व उससे जुड़े गंभीर सार्वजनिक आरोपों एवं विवादों का निष्पक्ष निराकरण होना चाहिए, ताकि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर किसी प्रकार का प्रश्नचिह्न न लगे। राज्यपाल का पद भारतीय संविधान के अन्तर्गत अत्यन्त सम्मानित एवं महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है। इस पद पर आसीन व्यक्ति से उच्चतम नैतिक मानदण्डों, निष्पक्षता एवं सार्वजनिक जीवन में निर्विवाद आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसी स्थिति में अंकिता भंडारी जैसे संवेदनशील हत्याकांड में कथित भूमिका को लेकर सार्वजनिक आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति की नियुक्ति से जनमानस में गलत संदेश जाने की आशंका है।
यह भी अत्यन्त पीड़ादायक है कि उत्तराखण्ड की एक बेटी को न्याय दिलाने के लिए उसके परिजनों एवं प्रदेश की जनता को वर्षों से संघर्ष करना पड़ रहा है तथा उनके माता पिता को उत्तराखंड एवं दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर प्रताडित किया जा रहा है। अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता तथा सत्ता के प्रभाव से मुक्त जांच सुनिश्चित करने की संवैधानिक जिम्मेदारी से जुड़ा अत्यन्त गंभीर विषय है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी का यह भी कहना है कि यदि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। कानून की दृष्टि में सभी नागरिक समान हैं तथा किसी भी व्यक्ति की राजनीतिक हैसियत अथवा संवैधानिक पद न्यायिक जांच में बाधा नहीं बनना चाहिए।

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