मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश के विकास में सहभागी उद्यमियों का किया सम्मान

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के विकास में सहभागी उद्यमियों का मंच पर सम्मान किया। उन्होंने भारत इनोवेट्स में हिस्सा लेने वाले उद्यमियों को सम्मानित किया। उन्होंने स्टार्टअप प्रोत्साहन, इन्क्यूबेटर्स प्रोत्साहन राशि के चेक का वितरण किया। साथ ही इन्क्यूबेटर मान्यता प्रमाण पत्र व यूपी स्टार्टअप फंड समर्थित स्टार्टअप्स का भी सम्मान किया। मुख्यमंत्री ने किया स्टार्टअप प्रोत्साहन राशि के चेक का वितरणमुख्यमंत्री ने मंच पर 5 स्टार्टअप को प्रोत्साहन राशि के चेक का वितरण किया। उन्होंने सिंह डायनमिक प्रा. लि. की अनुषी वर्मा, डिकोड सॉफ्टवेयर्स प्रा. लि. की रिया कुमारी वंशगोपाल, त्रिशूल स्पेस के दिव्यम, जीनोमिकी सॉल्यूशन प्रा. लि. की डॉ. दीक्षा भारती व पीएचएसआई टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च प्रा. लि. के तुषार राज को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने इन्क्यूबेटर्स प्रोत्साहन राशि के चेक का भी किया वितरणसीएम ने इन्क्यूबेटर्स प्रोत्साहन राशि के चेक का भी वितरण किया। इसके अंतर्गत उन्होंने नवयुग नवाचार फाउंडेशन, आईईटी लखनऊ के डॉ. पुष्कर व एनआईईटी के डॉ. संजय कुमार को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने दिया इन्क्यूबेटर मान्यता प्रमाण पत्रमुख्यमंत्री ने इन्क्यूबेटर मान्यता प्रमाण पत्र भी प्रदान किया। उन्होंने मंच पर वीबीएसपीयू इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन जौनपुर के राकेश सिंह/अविनाश, एमएसयू एकेडमिक फाउंडेशन सहारनपुर की डॉ. विमला वाई व अभिनव पुंडीर को सम्मानित किया। सीएम ने यूपी स्टार्टअप फंड (यूपीएसएफ) समर्थित स्टार्टअप्स का किया सम्मानसीएम ने यूपी स्टार्टअप फंड (यूपीएसएफ) समर्थित स्टार्टअप्स का भी सम्मान किया। मुख्यमंत्री ने मंच पर मैग्नम टेक्नोलॉजी के तरुण सेनानी, अल्फाड्रायड इंडिया के अक्षत राज व गौरव जोशी को सम्मानित किया। सीएम ने ब्रिस्क ओलिफ के सुनील प्रेमजी को लेटर ऑफ इंटेंट प्रदान किया। सीएम ने भारत इनोवेट्स में हिस्सा लेने वाले उद्यमियों को सम्मानित कियासीएम योगी ने मंच पर भारत इनोवेट्स में हिस्सा लेने वाले उद्यमियों को भी सम्मानित किया। उन्होंने अननंत सिस्टम्स, एंड्योर एयरसिस्टम्स, सूयो मैन्युफेक्चरिंग, राफे, वर्वेसमी मिक्स्ड सिग्नल के प्रतिनिधियों को भी मंच पर सम्मानित किया।

यूपी के स्टार्टअप्स को योगी सरकार का भरोसा, फाउंडर्स बोले- बढ़ेगा इनोवेशन का दायरा

ड्रोन से क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन तक, यूपी में नए आइडिया को मिल रहा सरकार का साथ चेक के साथ सीएम योगी का भरोसा, स्टार्टअप फाउंडर्स बोले – यूपी में बढ़ा है अवसर योगी सरकार की नीति से महिला फाउंडर्स को प्रोत्साहन, एडूबुक ने 50 प्रतिशत महिला स्टाफ को दिया मौका लखनऊ, 27 अगस्त। उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार के प्रयासों को उस समय और मजबूती मिली, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टार्टअप फाउंडर्स और उनकी टीमों से सीधे संवाद कर उन्हें सरकार के हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपये से अधिक और 9 इनक्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक सौंपे। कार्यक्रम में मौजूद कई स्टार्टअप प्रमुखों ने भी सरकार की नीतियों, सहयोग और प्रोत्साहन व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे यूपी के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए अहम कदम बताया। एडूबुक के सह-संस्थापक एवं सीईओ अपूर्व बजाज और सीओओ शिवानी मल्होत्रा ने आयोजन के दौरान योगी सरकार की स्टार्टअप नीति की सराहना की। उन्होंने बताया कि उनका स्टार्टअप साइबर सिक्योरिटी, ब्लॉकचेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स की शिक्षा देता है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में बच्चों की बायोडाटा तैयार कराकर देश-विदेश में जॉब मेलों के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। उनके पोर्टल के जरिए छात्रों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन भी तुरंत हो जाता है, जिसमें पहले आमतौर पर 20 दिन से अधिक समय लगता था। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए योगी सरकार की ओर से 4.50 लाख रुपये का अनुदान मिला है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स की सुविधा के लिए सरकार की ओर से शुरू किया गया ‘वन पोर्टल, वन विंडो’ अच्छा कदम है। इससे उत्तर प्रदेश में उनके जैसे स्टार्टअप्स के लिए काम करना और फंडिंग प्राप्त करना आसान होगा। उन्होंने बताया कि कंपनी में अब तक 80 लाख रुपये तक का निवेश किया जा चुका है। कंपनी में महिलाओं को 50 प्रतिशत रोजगारशिवानी मल्होत्रा ने कहा कि योगी सरकार ने महिला स्टार्टअप फाउंडर्स को भी प्रोत्साहित किया है। इसका सीधा असर प्रदेश में महिलाओं के रोजगार पर पड़ेगा। उनके लखनऊ स्थित कार्यालय में भी 50 प्रतिशत स्टाफ में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। पाइप लाइन से घर-घर तक पानी पहुंचाने का विजनवीडीटी पाइपलाइन के प्रबंध निदेशक भुवनेश शर्मा ने कहा कि उनकी कंपनी उत्तर प्रदेश में तेल, पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने का काम कर रही है। इसके लिए पाइपलाइन व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यूपी स्टार्टअप समिट में आकर वह काफी खुश हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनसे बातचीत की और प्रदेश के घर-घर तक पानी पहुंचाने को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उनकी टीम पाइपलाइन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर काम करेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री ने जमीन और फंड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। टीम के अब तक के कार्य के लिए उन्हें प्रशस्ति पत्र भी मिला। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू प्रदेश के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब प्रदेश तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। स्टार्टअप इकोसिस्टम का हो रहा विस्तारसीएम योगी ने सिंह डायनेमिक्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक डॉ. अनुशी वर्मा और डॉ. हिमांशु सिंह को स्टार्टअप प्रोत्साहन के तौर पर 4.50 लाख रुपये का चेक सौंपा। डॉ. हिमांशु सिंह ने कहा कि उनकी कंपनी सुरक्षा बलों के लिए छोटे हथियार बनाने का काम कर रही है। इस राशि से कारोबार को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार विकसित होगा और उनकी कंपनी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में योगदान दे सकेगी। यूपी में मिलेगा भरपूर सहयोगएंड्योरएयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ रामा कृष्णा ने बताया कि उनकी कंपनी सुरक्षा बलों के लिए ड्रोन बनाने का काम करती है। इनमें लॉजिस्टिक्स, सर्विलांस और अटैक ड्रोन शामिल हैं। उनकी कंपनी में करीब 150 लोग काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप्स को पहले से भी ज्यादा सहयोग मिलने वाला है। योगी सरकार की नई स्टार्टअप नीति काफी अच्छी है। इसमें जमीन, सुविधाएं, फंडिंग और पूंजी की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा गया है। योगी सरकार का विजन सराहनीयत्रिशूल पल्सेशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक दियांम को स्टार्टअप में प्रोटोटाइप विकास के लिए पांच लाख रुपये का प्रोत्साहन चेक मिला। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन पर काम कर रही है। साथ ही, उनके उत्पाद एक विदेशी कंपनी को भी सप्लाई किए जा रहे हैं। प्रोटोटाइप तैयार करने में योगी सरकार से मिली ग्रांट काफी उपयोगी साबित हुई है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार का विजन और उसके लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। योगी सरकार में पूरा हो रहा सपनाजेनोमिक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड की सह-संस्थापक डॉ. दीक्षा भारतीया को मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप प्रोत्साहन के रूप में 4.50 लाख रुपये का चेक सौंपा। उन्होंने बताया कि वह नवजात शिशुओं में होने वाली दुर्लभ बीमारियों पर काम कर रही हैं। भारत में करोड़ों बच्चे ऐसी बीमारियों से प्रभावित हैं। उनका स्टार्टअप नए इनोवेशन के जरिए जन्म के समय बच्चों की हेल्थ स्क्रीनिंग कर रहा है, जिससे बीमारियों की समय रहते पहचान की जा सके। उन्होंने बताया कि प्रदेश की कई लैब और अस्पतालों को अपने साथ जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अपने उत्पाद के लिए पेटेंट भी फाइल किया गया है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने इस सपने को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता के साथ अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई हैं। इसका परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में नवाचार और स्टार्टअप्स की संख्या लगातार बढ़ रही है।

नेपाल की आपदा में फंसे यूपी के नागरिकों को निकालने के लिए योगी सरकार ने संभाला मोर्चा

सीएम योगी की सक्रियता से राहत-बचाव का कार्य तेजी पर, नेपाल पहुंची एसडीआरएफ, पीएसी मुख्यमंत्री की निगरानी में राहत-बचाव का व्यापक इंतजाम, परिजनों के लिए 1070 हेल्पलाइन 4 रबर बोट के साथ नेपाल भेजी जा रही एल्युमिनियम बोट लखनऊ, 27 अगस्त। नेपाल में बाढ़ व प्राकृतिक आपदा के बीच उत्तर प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है। नेपाल में फंसे यूपी के नागरिकों को सुरक्षित निकालने और उन्हें तत्काल राहत पहुंचाने के लिए सरकार ने संसाधनों के साथ राहत-बचाव टीमों को सक्रिय किया है। राहत आयुक्त कार्यालय के कंट्रोल रूम से नेपाल सीमावर्ती जिलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री की निगरानी में राहत-बचाव का व्यापक इंतजाम योगी सरकार ने नेपाल में राहत-बचाव अभियान के लिए एसडीआरएफ की एक प्लाटून भेजी है। इसमें 32 जवान शामिल हैं। इसके अलावा पीएसी की 26वीं बटालियन के 22 जवानों को भी नेपाल भेजा गया है। सरकार ने जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त बल और संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी की है, जिससे प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में किसी तरह की कमी न रहे। 4 रबर बोट के साथ एल्युमिनियम बोट भी भेजी जा रही सीएम योगी के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान को प्रभावी बनाने के लिए मौके पर चार रबर बोट मौजूद हैं। अतिरिक्त एसडीआरएफ प्लाटून के साथ एल्युमिनियम बोट भी नेपाल भेजी जा रही है। सिंधुरिया क्षेत्र में राहत-बचाव अभियान की तैयारियां की जा रही हैं। सरकार का पूरा फोकस फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित निकालने और जरूरतमंदों तक तत्काल सहायता पहुंचाने पर है। नेपाल की बाढ़ और वहां की स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। नेपाल में फंसे यूपी के नागरिकों के परिजन किसी भी सूचना या सहायता के लिए 1070 पर संपर्क कर सकते हैं।

रियल ने ‘रियल ग्रीटिंग्स’ के साथ इस रक्षाबंधन भाई-बहन के खूबसूरत रिश्ते का जश्न मनाया

दिल को छू लेने वाली डिजिटल फिल्म में दिखाया गया भाई-बहन के रिश्ते का प्यार, नोक-झोंक और अटूट साथ नई दिल्ली। इस रक्षाबंधन, डाबर इंडिया लिमिटेड के भारत के अग्रणी पैकेज्ड फ्रूट जूस एवं बेवरेज ब्रांड रियल ने अपने नवीनतम अभियान ‘रियल ग्रीटिंग्स’ के माध्यम से भाई-बहनों के उस खूबसूरत और अक्सर शब्दों में न व्यक्त हो पाने वाले रिश्ते का जश्न मनाया है। इस अभियान के केंद्र में एक भावनात्मक डिजिटल फिल्म है, जो एक भाई और बहन के रिश्ते को उन छोटे-छोटे पलों के माध्यम से जीवंत करती है जो उनके बंधन को वास्तव में खास बनाते हैं। रोजमर्रा की नोक-झोंक, शरारतों और हंसी-मजाक से लेकर चिंता, स्नेह और हर परिस्थिति में साथ निभाने तक, यह फिल्म दिखाती है कि भाई-बहन भले ही अपने प्यार को हमेशा शब्दों में व्यक्त न करें, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। यह फिल्म भाई-बहन के रिश्ते को बेहद सहज और वास्तविक तरीके से प्रस्तुत करती है, जहां तकरार और शरारतों के साथ-साथ अपनापन और साथ भी होता है। यह याद दिलाती है कि हर छोटी-मोटी लड़ाई, हर मजाक और हर छोटे से भाव के पीछे गहरा प्यार और मजबूत रिश्ता छिपा होता है। अभियान के बारे में बात करते हुए, डाबर इंडिया लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट मार्केटिंग, श्री मयंक कुमार ने कहा, “रक्षाबंधन उस रिश्ते का उत्सव है, जो अनगिनत छोटे-छोटे पलों से बना होता है। इसमें नोक-झोंक है, लड़ाई है, हंसी है और सबसे बढ़कर हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ है। ‘रियल ग्रीटिंग्स’ के माध्यम से हम ऐसे रिश्ते का जश्न मनाना चाहते थे, जिसे केवल शब्दों से नहीं, बल्कि एक नजर, एक मुस्कान, एक इशारे और उस प्यार से महसूस किया जाता है जो बिना कहे सब कुछ समझ लेता है। यह अभियान इस बात को दर्शाता है कि भाई-बहन हमेशा अपने मन की बात नहीं कहते, लेकिन उनके कर्म ही उनकी भावनाओं को व्यक्त कर देते हैं।” ‘रियल ग्रीटिंग्स’ के माध्यम से रियल उपभोक्ताओं को पारंपरिक राखी बांधने की रस्म से आगे बढ़कर अपने भाई-बहनों के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए प्रेरित कर रहा है। यह पहल लोगों को उन भावनाओं को सार्थक शुभकामनाओं और संदेशों के रूप में साझा करने का अवसर प्रदान करती है, जो अक्सर अनकही रह जाती हैं, जिससे यह अवसर और भी व्यक्तिगत तथा यादगार बन जाता है। डाबर इंडिया लिमिटेड में जी.एम. मार्केटिंग, फूड्स एंड बेवरेजेज, सुश्री मोनिशा प्रशर ने कहा, “भाई-बहन का रिश्ता उन छोटे-छोटे पलों से बनता है जो जीवनभर याद रहते हैं। एक-दूसरे की टांग खींचने से लेकर चुपचाप एक-दूसरे का ख्याल रखने तक, यही पल इस रिश्ते को खास बनाते हैं। ‘रियल ग्रीटिंग्स’ इन्हीं सच्ची भावनाओं और प्यार के खूबसूरत अभिव्यक्तियों का उत्सव है। इस अभियान के माध्यम से हम लोगों को अपने भाई-बहनों की अहमियत समझने, उनकी सराहना करने और उन भावनाओं को शब्द देने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं जो अक्सर अनकही रह जाती हैं।” यह अभियान फिल्म विभिन्न पीढ़ियों के दर्शकों से जुड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसमें ऐसे दृश्य और परिस्थितियां दिखाई गई हैं जो लगभग हर भाई-बहन के लिए परिचित और जुड़ाव महसूस कराने वाली हैं। फिल्म इस सार्वभौमिक सत्य को उजागर करती है कि भाई-बहन भले ही अपने स्नेह को खुलकर व्यक्त न करें, लेकिन वे हमेशा एक-दूसरे के सबसे भरोसेमंद साथी और मजबूत सहारा बने रहते हैं। ‘रियल ग्रीटिंग्स’ अभियान फिल्म को डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से प्रसारित किया जा रहा है। इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाई-बहनों के लिए संदेश, यादें और प्यार से भरे खास पल साझा करने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।

पीएनजी ज्वेलर्स की ओर से हर महिला के लिए कंटेम्प्ररी डिज़ाइन के साथ वार्षिक मंगलसूत्र महोत्सव का आयोजन

परंपरागत सोने के मंगलसूत्रों से लेकर आधुनिक डायमंड डिज़ाइनों तक, यह वार्षिक महोत्सव परंपरा और सुंदरता का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है गुरुग्राम: भारत में विवाह के सबसे पवित्र प्रतीकों में से एक माने जाने वाले मंगलसूत्र के महत्व का उत्सव मनाते हुए पीएनजी ज्वेलर्स ने अपने बहुप्रतीक्षित मंगलसूत्र महोत्सव की घोषणा की है। यह महोत्सव 13 अगस्त से 13 सितंबर 2026 तक भारत भर में स्थित सभी पीएनजी ज्वेलर्स शोरूम में आयोजित किया जाएगा। इस वार्षिक महोत्सव में अब तक का सबसे विस्तृत मंगलसूत्र कलेक्शन प्रस्तुत किया जाएगा। यह कलेक्शन आधुनिक भारतीय महिलाओं की बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसमें पारंपरिक ज्वेलरी के सांस्कृतिक महत्व को भी बरकरार रखा गया है। पिछले कुछ वर्षों से मंगलसूत्र महोत्सव पीएनजी ज्वेलर्स के प्रमुख वार्षिक आयोजनों में से एक बन चुका है। इस महोत्सव में ग्राहकों के लिए पारंपरिक, आधुनिक और लाइटवेट मंगलसूत्रों की विस्तृत श्रृंखला पेश की जाती है। ये मंगलसूत्र त्योहारों के साथ-साथ रोजमर्रा के उपयोग के लिए भी उपयुक्त हैं। इस वर्ष का कलेक्शन ग्राहकों की बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसमें आकर्षक सोने के मंगलसूत्र, सॉलिटेयर-इंस्पायर्ड डायमंड स्टाइल्स, मिनिमलिस्ट डेली-वियर डिज़ाइन और परंपरा के साथ व्यक्तिगत पसंद को दर्शाने वाली ज्वेलरी शामिल है। सभी आयु वर्ग की विवाहित महिलाओं की पसंद-नापसंद को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इस महोत्सव में पति और परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है, जो श्रावण के शुभ अवसर पर कोई खास उपहार देना चाहते हैं। उत्कृष्ट कारीगरी से समझौता किए बिना किफायती दाम पर ज्वेलरी उपलब्ध कराने वाला यह महोत्सव ग्राहकों को उनके स्टाइल, पर्सनैलिटी और बजट के हिसाब से कई तरह के डिज़ाइन चुनने का अवसर देता है। इस महोत्सव के तहत ग्राहकों को मंगलसूत्र के आभूषणों पर मेकिंग चार्ज केवल 7.99 प्रतिशत से मिल रहा है। यह विशेष ऑफर 13 सितंबर 2026 तक सीमित है। प्रेम और प्रतिबद्धता के शाश्वत प्रतीक माने जाने वाले मंगलसूत्र में निवेश करने का यह एक उत्कृष्ट अवसर है। इस अवसर पर पीएनजी ज्वेलर्स के अध्यक्ष और व्यवस्थापकीय संचालक डॉ. सौरभ गाडगीळ ने कहा, “मंगलसूत्र हमेशा से भावनात्मक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन आज की महिलाएं इसे पहनने और अपनी शैली में अपनाने का नया दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रही हैं। पीएनजी ज्वेलर्स में हमारी कोशिश रही है कि हम इसके सांस्कृतिक महत्व को बनाए रखें और साथ ही ऐसे डिज़ाइन पेश करें, जो आज की जीवनशैली के लिए अनुकूल हों। ‘मंगलसूत्र महोत्सव’ के जरिए हम देश के सबसे बड़े कलेक्शन में से एक पेश कर रहे हैं, जिससे प्रत्येक महिला को ऐसा डिज़ाइन मिल सके, जो उनकी पर्सनैलिटी को दर्शाता हो। चाहे वह परंपरा से जुड़ी हो या आधुनिक सुंदरता से प्रेरित हो, यह वार्षिक महोत्सव हमारी सांस्कृतिक विरासत और आत्म-अभिव्यक्ति के इन दोनों पहलुओं का उत्सव है।” लगभग दो शतकों के विश्वास और उत्कृष्ट कारीगरी की विरासत के साथ पीएनजी ज्वेलर्स ज्वेलरी की विविध श्रेणियों में निरंतर प्रयोग कर रहा है। मंगलसूत्र महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से ब्रांड अपने बढ़ते रिटेल नेटवर्क के जरिए उत्कृष्ट डिज़ाइन, अतुलनीय विविधता और ग्राहकों को सार्थक मूल्य प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त बना रहा है।

पीएनजी ज्वेलर्स ने गुरुग्राम में नए स्टोअर के साथ एनसीआर में किया प्रवेश

गुरुग्राम। पीएनजी ज्वेलर्स ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को मजबूत करते हुए हरियाणा के गुरुग्राम स्थित आर2, ग्राउंड फ्लोर, एम3एम रूट 65, सेक्टर-65 में एक नया कंपनी स्वामित्व और कंपनी संचालित स्टोर शुरू किया। 3,500 सक्वेअर फुट में विस्तारित यह नया शोरूम ग्राहकों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया है और प्रमुख बाजारों में ब्रांड के लगातार रिटेल विस्तार का हिस्सा है। स्टोअर के उद्घाटन अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह के हाथों और पीएनजी ज्वेलर्स के अध्यक्ष और व्यवस्थापकीय संचालक डॉ. सौरभ गाडगील, कर्मचारियों और शुभचिंतकों की उपस्थिति में किया। नया शोरूम ग्राहकों के लिए सोने, हीरे और चांदी के ज्वेलरी की पीएनजी ज्वेलर्स की श्रृंखला उपलब्ध है। यहां ब्रांड के सभी कलेक्शन और श्रेणियों को एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। यह स्टोअर गुरुग्राम के ग्राहकों की विविध ज्वेलरी संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर डिझाईन किया गया है,जिसमें रोज की ज्वेलरी,त्योहारों की खरीदारी,शादीयों उपहार और जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों के लिए ज्वेलरी शामिल हैं। स्टोअर के उद्घाटन पर चित्रांगदा सिंह ने कहा पीएनजी ज्वेलर्स अपने साथ विश्वास,उत्कृष्ट कारीगरी और ग्राहकों की पसंद की समझ पर आधारित समृद्ध विरासत लेकर आया है। ब्रांड के इस नए बाजार में प्रवेश के साथ यहां के ग्राहकों को इसकी सोच-समझकर तैयार की गई ज्वेलरी और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता के माध्यम से इस विरासत को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का अवसर मिलेगा मैं इस परिसर में पीएनजी ज्वेलर्स का स्वागत करते हुए नए सफर के लिए पूरी टीम को शुभकामनाएं देती हूं। पीएनजी ज्वेलर्स के अध्यक्ष और व्यवस्थापकीय संचालक डॉ. सौरभ गाडगील ने कहा गुरुग्राम यह हमारे राष्ट्रीय विस्तार के सफर में एक महत्वपूर्ण बाजारपेठ है और सेक्टर 65 में नए स्टोअर की शुरुआत इस परिसर से ग्राहकों की बढ़ती मांग के प्रति हमारा प्रतिसाद है, सोने, हीरे और चांदी की ज्वेलरी की व्यापक श्रृंखला के साथ यह स्टोअर हमें ग्राहकों के और करीब पहुंचकर उनकी सेवा करने का अवसर देगा, साथ ही पीएनजी ज्वेलर्स से जुड़े विश्वास, उत्कृष्ट कारीगरी और अनुभव को भी कायम रखेगा। हम स्थानीय समुदाय का हिस्सा बनने और गुरुग्राम के समझदार ग्राहकों की पसंद के अनुरूप तैयार किए गए पीएनजी ज्वेलर्स के विशिष्ट डिजाइनों के माध्यम से उनके साथ दीर्घकालिक दृढ़ रिश्ता बनाने के लिए उत्साहित हैं। गुरुग्राम में यह नया स्टोअर पीएनजी ज्वेलर्स के रिटेल नेटवर्क को और मजबूत करता है। ब्रांड लगातार ऐसे बाजारों में विस्तार कर रहा है जहां ब्रांड के उत्पादों और सेवाओं की मांग बढ़ रही है। कंपनी-स्वामित्व और कंपनी-संचालित मॉडल के माध्यम से पीएनजी ज्वेलर्स अपने उत्पादों की विविधता ग्राहक अनुभव और सेवा मानकों में एकरूपता बनाए रखने के साथ स्थानीय ग्राहकों के साथ अधिक मजबूत संबंध स्थापित करने में मदद कर सकता है।

भगवान शिव चरण गुप्ता जैसी औलाद किसी को ना दे, वीडियो कॉल पर बाप की जलती चिता देख बोली कितना टाइम लगेगा

सोनीपत (हरियाणा)। हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम से सामने आई एक घटना ने बदलते पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक संवेदनाओं पर नई बहस छेड़ दी है। मुंबई के पूर्व व्यापारी 74 वर्षीय शिवचरण गुप्ता का निधन होने के बाद उनकी तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकीं। बताया गया कि दूरी और अन्य व्यावसायिक व पारिवारिक कारणों के चलते उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से अपने पिता के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया देखी। जानकारी के अनुसार, बेटियों ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए एक सामाजिक संस्था से संपर्क किया और इस कार्य हेतु ₹5,100 ऑनलाइन भेजे। अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया वीडियो कॉल पर दिखाई गई। इस दौरान एक बेटी द्वारा चिता के पूरी तरह जलने में लगने वाले समय के बारे में पूछे जाने की भी चर्चा है। वृद्धाश्रम के संचालक ने इस घटना को बेहद भावुक और चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह बदलते सामाजिक और पारिवारिक संबंधों का एक संवेदनशील उदाहरण है। वहीं, सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने इसे पारिवारिक मूल्यों में आई दूरी का प्रतीक बताया, जबकि कुछ लोगों ने आधुनिक जीवन, लंबी दूरी और अन्य व्यावहारिक परिस्थितियों को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना। बताया गया कि शिवचरण गुप्ता की अंतिम इच्छा के अनुरूप उनकी आंखें दान कर दी गईं, जिससे मृत्यु के बाद भी उन्होंने किसी और के जीवन में रोशनी पहुंचाने का संदेश दिया। यह घटना न केवल पारिवारिक जिम्मेदारियों, बल्कि आधुनिक जीवनशैली और बदलते सामाजिक रिश्तों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

स्थायी समिति अध्यक्ष पद के लिए सत्या शर्मा ने भरा नामांकन, पार्टी नेतृत्व का जताया आभार

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार , माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और माननीय भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में दिल्ली सरकार के सहयोग से एमसीडी को बनाएंगे और मजबूत : सत्या शर्मा दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करतीं भाजपा की वरिष्ठ पार्षद सत्या शर्मा। नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्थायी समिति के अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की वरिष्ठ पार्षद सत्या शर्मा ने नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उन्होंने दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन, भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा तथा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार के सहयोग से एमसीडी को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जनहितकारी बनाया जाएगा। नामांकन के बाद मीडिया से बातचीत में सत्या शर्मा ने कहा कि पार्टी ने उन पर जो विश्वास जताया है, वह उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य वर्ष 2022 के एमसीडी चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा जनता से किए गए वादों को पूरा करना होगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने सत्ता संभालने के लगभग एक वर्ष के भीतर अपने चुनावी घोषणापत्र के कई वादे पूरे किए हैं और कई ऐसे कार्य भी किए हैं, जिनका उल्लेख घोषणापत्र में नहीं था। उन्होंने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में स्थायी समिति की अध्यक्ष के रूप में प्रस्तुत बजट में की गई घोषणाओं को धरातल पर उतारना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। साथ ही सफाई व्यवस्था, कूड़ा प्रबंधन, पार्कों के रखरखाव, सड़कों और अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार पर विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भलस्वा, ओखला और गाज़ीपुर के कूड़े के पहाड़ों को समाप्त करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। सत्या शर्मा ने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच बेहतर समन्वय का लाभ राजधानी के नागरिकों को मिल रहा है और विकास कार्यों को नई गति मिली है। एमसीडी की स्थायी समिति में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है। समिति के कुल 18 सदस्यों में भाजपा के 12 सदस्य हैं, जबकि अन्य दलों के छह सदस्य हैं। ऐसे में स्थायी समिति के अध्यक्ष पद पर सत्या शर्मा का चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।

व्यंग्य: आस्था, बाबा संस्कृति और अंधभक्ति पर तीखा कटाक्ष

समाज में स्वयंभू चमत्कारी बाबाओं और अंधभक्ति की बढ़ती प्रवृत्ति पर एक व्यंग्यात्मक लेख इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। लेख में काल्पनिक संवाद के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार कुछ लोग आध्यात्मिकता को सेवा का नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा, प्रभाव और आर्थिक लाभ का माध्यम बना देते हैं। व्यंग्य में एक कथित गुरु अपने शिष्य से कहता है कि आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर या राजनेता बनने से बेहतर है कि वह “बाबा” बन जाए, क्योंकि बड़े-बड़े अधिकारी, नेता और उद्योगपति भी बाबाओं के दरबार में आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। आगे तंज कसते हुए कहा गया है कि इस “पेशे” में न किसी निवेश की आवश्यकता होती है और न ही उत्पादन या कर की चिंता। केवल श्रद्धालुओं की आस्था ही सबसे बड़ी पूंजी बन जाती है। लेख में यह भी व्यंग्य किया गया है कि आत्मा, परमात्मा, स्वर्ग, नरक, पाप-पुण्य, धर्म और राष्ट्र जैसे विषयों पर पूरे आत्मविश्वास से बोलने वाला व्यक्ति आसानी से “ज्ञानी” कहलाने लगता है। कठिन प्रश्नों के उत्तर में “यह सब ईश्वर की इच्छा है” जैसे वाक्यों का सहारा लेने की प्रवृत्ति पर भी कटाक्ष किया गया है। व्यंग्य का निष्कर्ष यह है कि जब समाज में तर्क, वैज्ञानिक सोच और प्रश्न पूछने की संस्कृति कमजोर पड़ती है, तब अंधश्रद्धा और चमत्कारों का कारोबार फलने-फूलने लगता है। लेखक संकेत देता है कि पढ़ा-लिखा और विवेकशील व्यक्ति किसी भी दावे पर प्रश्न करेगा, जबकि अंधभक्ति प्रश्नों की बजाय केवल विश्वास पर आधारित होती है। यह रचना किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त अंधभक्ति, चमत्कारवाद और बिना तर्क के विश्वास करने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य के रूप में देखी जानी चाहिए।

मुफ्ती मोहम्मद सईद के गृहमंत्री बनने और कश्मीरी पंडितों के पलायन पर एक विशेष रिपोर्ट

नई दिल्ली/श्रीनगर। कश्मीर में कश्मीरी पंडितों का पलायन भारतीय इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक माना जाता है। समय-समय पर यह दावा किया जाता है कि देश में Mufti Mohammad Sayeed के केंद्रीय गृहमंत्री बनने के बाद कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। हालांकि इतिहासकारों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इस विषय को व्यापक राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा परिस्थितियों के संदर्भ में समझना आवश्यक है। दिसंबर 1989 में केंद्र में बनी सरकार में मुफ्ती मोहम्मद सईद को भारत का गृहमंत्री बनाया गया था। वे इस पद पर पहुंचने वाले पहले कश्मीरी नेता थे। उसी समय जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और उग्रवाद तेजी से बढ़ रहा था। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां बढ़ने लगी थीं और घाटी में सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ रही थी। इसी दौरान तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी Rubaiya Sayeed का आतंकवादियों द्वारा अपहरण कर लिया गया। उनकी रिहाई के बदले सरकार ने कुछ आतंकवादियों को छोड़ा। इस घटना को कई विश्लेषक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के मनोबल को बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं में गिनते हैं। 1990 की शुरुआत में कश्मीर घाटी में आतंकवादी संगठनों द्वारा कई हत्याएं, धमकियां और डर का माहौल पैदा किया गया। अनेक कश्मीरी पंडित परिवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें निशाना बनाया गया और अपनी सुरक्षा के लिए घाटी छोड़नी पड़ी। उस समय राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर हो गई थी। केंद्र सरकार ने बाद में Jagmohan को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त किया। विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीरी पंडितों का पलायन किसी एक व्यक्ति या एक निर्णय का परिणाम नहीं था, बल्कि आतंकवाद, राजनीतिक अस्थिरता, प्रशासनिक विफलताओं और सुरक्षा चुनौतियों के संयुक्त प्रभाव का नतीजा था। इस विषय पर आज भी राजनीतिक दलों और इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मत मौजूद हैं। कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की त्रासदी आज भी राष्ट्रीय विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हजारों परिवार दशकों तक अपने घरों से दूर रहने को मजबूर रहे। उनके पुनर्वास, न्याय और सुरक्षित वापसी को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। कश्मीर की यह घटना भारत के इतिहास में एक ऐसे अध्याय के रूप में दर्ज है, जिसकी पीड़ा आज भी अनेक परिवार महसूस करते हैं।