रियल ने ‘रियल ग्रीटिंग्स’ के साथ इस रक्षाबंधन भाई-बहन के खूबसूरत रिश्ते का जश्न मनाया
दिल को छू लेने वाली डिजिटल फिल्म में दिखाया गया भाई-बहन के रिश्ते का प्यार, नोक-झोंक और अटूट साथ नई दिल्ली। इस रक्षाबंधन, डाबर इंडिया लिमिटेड के भारत के अग्रणी पैकेज्ड फ्रूट जूस एवं बेवरेज ब्रांड रियल ने अपने नवीनतम अभियान ‘रियल ग्रीटिंग्स’ के माध्यम से भाई-बहनों के उस खूबसूरत और अक्सर शब्दों में न व्यक्त हो पाने वाले रिश्ते का जश्न मनाया है। इस अभियान के केंद्र में एक भावनात्मक डिजिटल फिल्म है, जो एक भाई और बहन के रिश्ते को उन छोटे-छोटे पलों के माध्यम से जीवंत करती है जो उनके बंधन को वास्तव में खास बनाते हैं। रोजमर्रा की नोक-झोंक, शरारतों और हंसी-मजाक से लेकर चिंता, स्नेह और हर परिस्थिति में साथ निभाने तक, यह फिल्म दिखाती है कि भाई-बहन भले ही अपने प्यार को हमेशा शब्दों में व्यक्त न करें, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। यह फिल्म भाई-बहन के रिश्ते को बेहद सहज और वास्तविक तरीके से प्रस्तुत करती है, जहां तकरार और शरारतों के साथ-साथ अपनापन और साथ भी होता है। यह याद दिलाती है कि हर छोटी-मोटी लड़ाई, हर मजाक और हर छोटे से भाव के पीछे गहरा प्यार और मजबूत रिश्ता छिपा होता है। अभियान के बारे में बात करते हुए, डाबर इंडिया लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट मार्केटिंग, श्री मयंक कुमार ने कहा, “रक्षाबंधन उस रिश्ते का उत्सव है, जो अनगिनत छोटे-छोटे पलों से बना होता है। इसमें नोक-झोंक है, लड़ाई है, हंसी है और सबसे बढ़कर हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ है। ‘रियल ग्रीटिंग्स’ के माध्यम से हम ऐसे रिश्ते का जश्न मनाना चाहते थे, जिसे केवल शब्दों से नहीं, बल्कि एक नजर, एक मुस्कान, एक इशारे और उस प्यार से महसूस किया जाता है जो बिना कहे सब कुछ समझ लेता है। यह अभियान इस बात को दर्शाता है कि भाई-बहन हमेशा अपने मन की बात नहीं कहते, लेकिन उनके कर्म ही उनकी भावनाओं को व्यक्त कर देते हैं।” ‘रियल ग्रीटिंग्स’ के माध्यम से रियल उपभोक्ताओं को पारंपरिक राखी बांधने की रस्म से आगे बढ़कर अपने भाई-बहनों के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए प्रेरित कर रहा है। यह पहल लोगों को उन भावनाओं को सार्थक शुभकामनाओं और संदेशों के रूप में साझा करने का अवसर प्रदान करती है, जो अक्सर अनकही रह जाती हैं, जिससे यह अवसर और भी व्यक्तिगत तथा यादगार बन जाता है। डाबर इंडिया लिमिटेड में जी.एम. मार्केटिंग, फूड्स एंड बेवरेजेज, सुश्री मोनिशा प्रशर ने कहा, “भाई-बहन का रिश्ता उन छोटे-छोटे पलों से बनता है जो जीवनभर याद रहते हैं। एक-दूसरे की टांग खींचने से लेकर चुपचाप एक-दूसरे का ख्याल रखने तक, यही पल इस रिश्ते को खास बनाते हैं। ‘रियल ग्रीटिंग्स’ इन्हीं सच्ची भावनाओं और प्यार के खूबसूरत अभिव्यक्तियों का उत्सव है। इस अभियान के माध्यम से हम लोगों को अपने भाई-बहनों की अहमियत समझने, उनकी सराहना करने और उन भावनाओं को शब्द देने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं जो अक्सर अनकही रह जाती हैं।” यह अभियान फिल्म विभिन्न पीढ़ियों के दर्शकों से जुड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसमें ऐसे दृश्य और परिस्थितियां दिखाई गई हैं जो लगभग हर भाई-बहन के लिए परिचित और जुड़ाव महसूस कराने वाली हैं। फिल्म इस सार्वभौमिक सत्य को उजागर करती है कि भाई-बहन भले ही अपने स्नेह को खुलकर व्यक्त न करें, लेकिन वे हमेशा एक-दूसरे के सबसे भरोसेमंद साथी और मजबूत सहारा बने रहते हैं। ‘रियल ग्रीटिंग्स’ अभियान फिल्म को डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से प्रसारित किया जा रहा है। इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाई-बहनों के लिए संदेश, यादें और प्यार से भरे खास पल साझा करने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।
पीएनजी ज्वेलर्स की ओर से हर महिला के लिए कंटेम्प्ररी डिज़ाइन के साथ वार्षिक मंगलसूत्र महोत्सव का आयोजन
परंपरागत सोने के मंगलसूत्रों से लेकर आधुनिक डायमंड डिज़ाइनों तक, यह वार्षिक महोत्सव परंपरा और सुंदरता का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है गुरुग्राम: भारत में विवाह के सबसे पवित्र प्रतीकों में से एक माने जाने वाले मंगलसूत्र के महत्व का उत्सव मनाते हुए पीएनजी ज्वेलर्स ने अपने बहुप्रतीक्षित मंगलसूत्र महोत्सव की घोषणा की है। यह महोत्सव 13 अगस्त से 13 सितंबर 2026 तक भारत भर में स्थित सभी पीएनजी ज्वेलर्स शोरूम में आयोजित किया जाएगा। इस वार्षिक महोत्सव में अब तक का सबसे विस्तृत मंगलसूत्र कलेक्शन प्रस्तुत किया जाएगा। यह कलेक्शन आधुनिक भारतीय महिलाओं की बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसमें पारंपरिक ज्वेलरी के सांस्कृतिक महत्व को भी बरकरार रखा गया है। पिछले कुछ वर्षों से मंगलसूत्र महोत्सव पीएनजी ज्वेलर्स के प्रमुख वार्षिक आयोजनों में से एक बन चुका है। इस महोत्सव में ग्राहकों के लिए पारंपरिक, आधुनिक और लाइटवेट मंगलसूत्रों की विस्तृत श्रृंखला पेश की जाती है। ये मंगलसूत्र त्योहारों के साथ-साथ रोजमर्रा के उपयोग के लिए भी उपयुक्त हैं। इस वर्ष का कलेक्शन ग्राहकों की बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसमें आकर्षक सोने के मंगलसूत्र, सॉलिटेयर-इंस्पायर्ड डायमंड स्टाइल्स, मिनिमलिस्ट डेली-वियर डिज़ाइन और परंपरा के साथ व्यक्तिगत पसंद को दर्शाने वाली ज्वेलरी शामिल है। सभी आयु वर्ग की विवाहित महिलाओं की पसंद-नापसंद को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इस महोत्सव में पति और परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है, जो श्रावण के शुभ अवसर पर कोई खास उपहार देना चाहते हैं। उत्कृष्ट कारीगरी से समझौता किए बिना किफायती दाम पर ज्वेलरी उपलब्ध कराने वाला यह महोत्सव ग्राहकों को उनके स्टाइल, पर्सनैलिटी और बजट के हिसाब से कई तरह के डिज़ाइन चुनने का अवसर देता है। इस महोत्सव के तहत ग्राहकों को मंगलसूत्र के आभूषणों पर मेकिंग चार्ज केवल 7.99 प्रतिशत से मिल रहा है। यह विशेष ऑफर 13 सितंबर 2026 तक सीमित है। प्रेम और प्रतिबद्धता के शाश्वत प्रतीक माने जाने वाले मंगलसूत्र में निवेश करने का यह एक उत्कृष्ट अवसर है। इस अवसर पर पीएनजी ज्वेलर्स के अध्यक्ष और व्यवस्थापकीय संचालक डॉ. सौरभ गाडगीळ ने कहा, “मंगलसूत्र हमेशा से भावनात्मक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन आज की महिलाएं इसे पहनने और अपनी शैली में अपनाने का नया दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रही हैं। पीएनजी ज्वेलर्स में हमारी कोशिश रही है कि हम इसके सांस्कृतिक महत्व को बनाए रखें और साथ ही ऐसे डिज़ाइन पेश करें, जो आज की जीवनशैली के लिए अनुकूल हों। ‘मंगलसूत्र महोत्सव’ के जरिए हम देश के सबसे बड़े कलेक्शन में से एक पेश कर रहे हैं, जिससे प्रत्येक महिला को ऐसा डिज़ाइन मिल सके, जो उनकी पर्सनैलिटी को दर्शाता हो। चाहे वह परंपरा से जुड़ी हो या आधुनिक सुंदरता से प्रेरित हो, यह वार्षिक महोत्सव हमारी सांस्कृतिक विरासत और आत्म-अभिव्यक्ति के इन दोनों पहलुओं का उत्सव है।” लगभग दो शतकों के विश्वास और उत्कृष्ट कारीगरी की विरासत के साथ पीएनजी ज्वेलर्स ज्वेलरी की विविध श्रेणियों में निरंतर प्रयोग कर रहा है। मंगलसूत्र महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से ब्रांड अपने बढ़ते रिटेल नेटवर्क के जरिए उत्कृष्ट डिज़ाइन, अतुलनीय विविधता और ग्राहकों को सार्थक मूल्य प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त बना रहा है।
पीएनजी ज्वेलर्स ने गुरुग्राम में नए स्टोअर के साथ एनसीआर में किया प्रवेश
गुरुग्राम। पीएनजी ज्वेलर्स ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को मजबूत करते हुए हरियाणा के गुरुग्राम स्थित आर2, ग्राउंड फ्लोर, एम3एम रूट 65, सेक्टर-65 में एक नया कंपनी स्वामित्व और कंपनी संचालित स्टोर शुरू किया। 3,500 सक्वेअर फुट में विस्तारित यह नया शोरूम ग्राहकों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया है और प्रमुख बाजारों में ब्रांड के लगातार रिटेल विस्तार का हिस्सा है। स्टोअर के उद्घाटन अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह के हाथों और पीएनजी ज्वेलर्स के अध्यक्ष और व्यवस्थापकीय संचालक डॉ. सौरभ गाडगील, कर्मचारियों और शुभचिंतकों की उपस्थिति में किया। नया शोरूम ग्राहकों के लिए सोने, हीरे और चांदी के ज्वेलरी की पीएनजी ज्वेलर्स की श्रृंखला उपलब्ध है। यहां ब्रांड के सभी कलेक्शन और श्रेणियों को एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। यह स्टोअर गुरुग्राम के ग्राहकों की विविध ज्वेलरी संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर डिझाईन किया गया है,जिसमें रोज की ज्वेलरी,त्योहारों की खरीदारी,शादीयों उपहार और जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों के लिए ज्वेलरी शामिल हैं। स्टोअर के उद्घाटन पर चित्रांगदा सिंह ने कहा पीएनजी ज्वेलर्स अपने साथ विश्वास,उत्कृष्ट कारीगरी और ग्राहकों की पसंद की समझ पर आधारित समृद्ध विरासत लेकर आया है। ब्रांड के इस नए बाजार में प्रवेश के साथ यहां के ग्राहकों को इसकी सोच-समझकर तैयार की गई ज्वेलरी और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता के माध्यम से इस विरासत को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का अवसर मिलेगा मैं इस परिसर में पीएनजी ज्वेलर्स का स्वागत करते हुए नए सफर के लिए पूरी टीम को शुभकामनाएं देती हूं। पीएनजी ज्वेलर्स के अध्यक्ष और व्यवस्थापकीय संचालक डॉ. सौरभ गाडगील ने कहा गुरुग्राम यह हमारे राष्ट्रीय विस्तार के सफर में एक महत्वपूर्ण बाजारपेठ है और सेक्टर 65 में नए स्टोअर की शुरुआत इस परिसर से ग्राहकों की बढ़ती मांग के प्रति हमारा प्रतिसाद है, सोने, हीरे और चांदी की ज्वेलरी की व्यापक श्रृंखला के साथ यह स्टोअर हमें ग्राहकों के और करीब पहुंचकर उनकी सेवा करने का अवसर देगा, साथ ही पीएनजी ज्वेलर्स से जुड़े विश्वास, उत्कृष्ट कारीगरी और अनुभव को भी कायम रखेगा। हम स्थानीय समुदाय का हिस्सा बनने और गुरुग्राम के समझदार ग्राहकों की पसंद के अनुरूप तैयार किए गए पीएनजी ज्वेलर्स के विशिष्ट डिजाइनों के माध्यम से उनके साथ दीर्घकालिक दृढ़ रिश्ता बनाने के लिए उत्साहित हैं। गुरुग्राम में यह नया स्टोअर पीएनजी ज्वेलर्स के रिटेल नेटवर्क को और मजबूत करता है। ब्रांड लगातार ऐसे बाजारों में विस्तार कर रहा है जहां ब्रांड के उत्पादों और सेवाओं की मांग बढ़ रही है। कंपनी-स्वामित्व और कंपनी-संचालित मॉडल के माध्यम से पीएनजी ज्वेलर्स अपने उत्पादों की विविधता ग्राहक अनुभव और सेवा मानकों में एकरूपता बनाए रखने के साथ स्थानीय ग्राहकों के साथ अधिक मजबूत संबंध स्थापित करने में मदद कर सकता है।
भगवान शिव चरण गुप्ता जैसी औलाद किसी को ना दे, वीडियो कॉल पर बाप की जलती चिता देख बोली कितना टाइम लगेगा
सोनीपत (हरियाणा)। हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम से सामने आई एक घटना ने बदलते पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक संवेदनाओं पर नई बहस छेड़ दी है। मुंबई के पूर्व व्यापारी 74 वर्षीय शिवचरण गुप्ता का निधन होने के बाद उनकी तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकीं। बताया गया कि दूरी और अन्य व्यावसायिक व पारिवारिक कारणों के चलते उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से अपने पिता के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया देखी। जानकारी के अनुसार, बेटियों ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए एक सामाजिक संस्था से संपर्क किया और इस कार्य हेतु ₹5,100 ऑनलाइन भेजे। अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया वीडियो कॉल पर दिखाई गई। इस दौरान एक बेटी द्वारा चिता के पूरी तरह जलने में लगने वाले समय के बारे में पूछे जाने की भी चर्चा है। वृद्धाश्रम के संचालक ने इस घटना को बेहद भावुक और चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह बदलते सामाजिक और पारिवारिक संबंधों का एक संवेदनशील उदाहरण है। वहीं, सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने इसे पारिवारिक मूल्यों में आई दूरी का प्रतीक बताया, जबकि कुछ लोगों ने आधुनिक जीवन, लंबी दूरी और अन्य व्यावहारिक परिस्थितियों को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना। बताया गया कि शिवचरण गुप्ता की अंतिम इच्छा के अनुरूप उनकी आंखें दान कर दी गईं, जिससे मृत्यु के बाद भी उन्होंने किसी और के जीवन में रोशनी पहुंचाने का संदेश दिया। यह घटना न केवल पारिवारिक जिम्मेदारियों, बल्कि आधुनिक जीवनशैली और बदलते सामाजिक रिश्तों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
स्थायी समिति अध्यक्ष पद के लिए सत्या शर्मा ने भरा नामांकन, पार्टी नेतृत्व का जताया आभार
माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार , माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और माननीय भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में दिल्ली सरकार के सहयोग से एमसीडी को बनाएंगे और मजबूत : सत्या शर्मा दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करतीं भाजपा की वरिष्ठ पार्षद सत्या शर्मा। नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्थायी समिति के अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की वरिष्ठ पार्षद सत्या शर्मा ने नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उन्होंने दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन, भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा तथा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार के सहयोग से एमसीडी को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जनहितकारी बनाया जाएगा। नामांकन के बाद मीडिया से बातचीत में सत्या शर्मा ने कहा कि पार्टी ने उन पर जो विश्वास जताया है, वह उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य वर्ष 2022 के एमसीडी चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा जनता से किए गए वादों को पूरा करना होगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने सत्ता संभालने के लगभग एक वर्ष के भीतर अपने चुनावी घोषणापत्र के कई वादे पूरे किए हैं और कई ऐसे कार्य भी किए हैं, जिनका उल्लेख घोषणापत्र में नहीं था। उन्होंने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में स्थायी समिति की अध्यक्ष के रूप में प्रस्तुत बजट में की गई घोषणाओं को धरातल पर उतारना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। साथ ही सफाई व्यवस्था, कूड़ा प्रबंधन, पार्कों के रखरखाव, सड़कों और अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार पर विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भलस्वा, ओखला और गाज़ीपुर के कूड़े के पहाड़ों को समाप्त करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। सत्या शर्मा ने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच बेहतर समन्वय का लाभ राजधानी के नागरिकों को मिल रहा है और विकास कार्यों को नई गति मिली है। एमसीडी की स्थायी समिति में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है। समिति के कुल 18 सदस्यों में भाजपा के 12 सदस्य हैं, जबकि अन्य दलों के छह सदस्य हैं। ऐसे में स्थायी समिति के अध्यक्ष पद पर सत्या शर्मा का चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
व्यंग्य: आस्था, बाबा संस्कृति और अंधभक्ति पर तीखा कटाक्ष
समाज में स्वयंभू चमत्कारी बाबाओं और अंधभक्ति की बढ़ती प्रवृत्ति पर एक व्यंग्यात्मक लेख इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। लेख में काल्पनिक संवाद के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार कुछ लोग आध्यात्मिकता को सेवा का नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा, प्रभाव और आर्थिक लाभ का माध्यम बना देते हैं। व्यंग्य में एक कथित गुरु अपने शिष्य से कहता है कि आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर या राजनेता बनने से बेहतर है कि वह “बाबा” बन जाए, क्योंकि बड़े-बड़े अधिकारी, नेता और उद्योगपति भी बाबाओं के दरबार में आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। आगे तंज कसते हुए कहा गया है कि इस “पेशे” में न किसी निवेश की आवश्यकता होती है और न ही उत्पादन या कर की चिंता। केवल श्रद्धालुओं की आस्था ही सबसे बड़ी पूंजी बन जाती है। लेख में यह भी व्यंग्य किया गया है कि आत्मा, परमात्मा, स्वर्ग, नरक, पाप-पुण्य, धर्म और राष्ट्र जैसे विषयों पर पूरे आत्मविश्वास से बोलने वाला व्यक्ति आसानी से “ज्ञानी” कहलाने लगता है। कठिन प्रश्नों के उत्तर में “यह सब ईश्वर की इच्छा है” जैसे वाक्यों का सहारा लेने की प्रवृत्ति पर भी कटाक्ष किया गया है। व्यंग्य का निष्कर्ष यह है कि जब समाज में तर्क, वैज्ञानिक सोच और प्रश्न पूछने की संस्कृति कमजोर पड़ती है, तब अंधश्रद्धा और चमत्कारों का कारोबार फलने-फूलने लगता है। लेखक संकेत देता है कि पढ़ा-लिखा और विवेकशील व्यक्ति किसी भी दावे पर प्रश्न करेगा, जबकि अंधभक्ति प्रश्नों की बजाय केवल विश्वास पर आधारित होती है। यह रचना किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त अंधभक्ति, चमत्कारवाद और बिना तर्क के विश्वास करने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य के रूप में देखी जानी चाहिए।
मुफ्ती मोहम्मद सईद के गृहमंत्री बनने और कश्मीरी पंडितों के पलायन पर एक विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली/श्रीनगर। कश्मीर में कश्मीरी पंडितों का पलायन भारतीय इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक माना जाता है। समय-समय पर यह दावा किया जाता है कि देश में Mufti Mohammad Sayeed के केंद्रीय गृहमंत्री बनने के बाद कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। हालांकि इतिहासकारों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इस विषय को व्यापक राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा परिस्थितियों के संदर्भ में समझना आवश्यक है। दिसंबर 1989 में केंद्र में बनी सरकार में मुफ्ती मोहम्मद सईद को भारत का गृहमंत्री बनाया गया था। वे इस पद पर पहुंचने वाले पहले कश्मीरी नेता थे। उसी समय जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और उग्रवाद तेजी से बढ़ रहा था। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां बढ़ने लगी थीं और घाटी में सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ रही थी। इसी दौरान तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी Rubaiya Sayeed का आतंकवादियों द्वारा अपहरण कर लिया गया। उनकी रिहाई के बदले सरकार ने कुछ आतंकवादियों को छोड़ा। इस घटना को कई विश्लेषक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के मनोबल को बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं में गिनते हैं। 1990 की शुरुआत में कश्मीर घाटी में आतंकवादी संगठनों द्वारा कई हत्याएं, धमकियां और डर का माहौल पैदा किया गया। अनेक कश्मीरी पंडित परिवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें निशाना बनाया गया और अपनी सुरक्षा के लिए घाटी छोड़नी पड़ी। उस समय राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर हो गई थी। केंद्र सरकार ने बाद में Jagmohan को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त किया। विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीरी पंडितों का पलायन किसी एक व्यक्ति या एक निर्णय का परिणाम नहीं था, बल्कि आतंकवाद, राजनीतिक अस्थिरता, प्रशासनिक विफलताओं और सुरक्षा चुनौतियों के संयुक्त प्रभाव का नतीजा था। इस विषय पर आज भी राजनीतिक दलों और इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मत मौजूद हैं। कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की त्रासदी आज भी राष्ट्रीय विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हजारों परिवार दशकों तक अपने घरों से दूर रहने को मजबूर रहे। उनके पुनर्वास, न्याय और सुरक्षित वापसी को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। कश्मीर की यह घटना भारत के इतिहास में एक ऐसे अध्याय के रूप में दर्ज है, जिसकी पीड़ा आज भी अनेक परिवार महसूस करते हैं।
भारत-अमेरिका कृषि सहयोग को नई दिशा देने हेतु इफको अध्यक्ष दिलीप संघाणी के नेतृत्व में महत्वपूर्ण संवाद
–वॉशिंगटन डी.सी. में आयोजित भारत-अमेरिका कृषि सहयोग बैठक के दौरान इफको अध्यक्ष दिलीप संघाणी के नेतृत्व में PHDCCI प्रतिनिधिमंडल एवं USIBC के प्रतिनिधि। नई दिल्ली। वॉशिंगटन डी.सी. स्थितयू.एस.-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) द्वारा इफको के अध्यक्ष श्री दिलीप संघाणी के नेतृत्व में आए पीएचडीसीसीआई प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी किया जाना इस बैठक के महत्व और प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। बैठक के उपरांत यूएसआईबीसी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर इस संवाद को भारत-अमेरिका कृषि सहयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। यूएसआईबीसी ने अपने संदेश में उल्लेख किया कि श्री दिलीप संघाणी के नेतृत्व में हुए विचार-विमर्श ने कृषि क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को नई ऊर्जा प्रदान करने, साझा चुनौतियों के समाधान तलाशने तथा उभरते अवसरों पर सार्थक चर्चा का मार्ग प्रशस्त किया। परिषद ने विशेष रूप से नवाचार-आधारित कृषि नीतियों, टिकाऊ कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा तथा किसानों की समृद्धि के लिए दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया। यह उल्लेखनीय है कि अमेरिका के प्रतिष्ठित उद्योग एवं व्यापार संगठन यूएसआईबीसी द्वारा इस बैठक को सार्वजनिक रूप से प्रमुखता देना भारतीय सहकारिता आंदोलन की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता, इफको की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा तथा श्री दिलीप संघाणी के नेतृत्व में भारतीय किसानों के हितों को वैश्विक मंचों पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए जाने का प्रमाण है। बैठक के दौरान कृषि उत्पादकता बढ़ाने, उन्नत कृषि तकनीकों के उपयोग, भूमि स्वास्थ्य सुधार, किसानों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने, नवाचार-आधारित कृषि समाधान विकसित करने तथा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों देशों के कृषि विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा तथा किसानों के लिए दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करेगा। श्री दिलीप संघाणी के नेतृत्व में आयोजित यह संवाद भारत-अमेरिका कृषि साझेदारी को नई दिशा देने, सहकारिता आधारित कृषि विकास को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने तथा किसानों की आय, उत्पादकता और कृषि सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
IRES 2026 के दूसरे दिन उमड़ा छात्रों और अभिभावकों का उत्साह, रूसी विश्वविद्यालयों ने पेश किए वैश्विक शिक्षा के अवसर
नई दिल्ली, भारत : द्वितीय इंडो-रशियन एजुकेशन समिट 2026 (IRES 2026) के दूसरे दिन छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अकादमिक काउंसलर्स की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। समिट के दौरान प्रतिभागियों को प्रमुख रूसी विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के अवसरों से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान किया गया।रूस एजुकेशन द्वारा Rossotrudnichestvo, भारत में रूसी संघ के दूतावास तथा रूसी हाउस, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस समिट के दूसरे दिन का मुख्य उद्देश्य छात्रों को रूसी विश्वविद्यालयों, अकादमिक विशेषज्ञों और शिक्षा जगत के नेताओं से जोड़ना था।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “रूसी विश्वविद्यालय प्रदर्शनी” रही, जिसमें 100 से अधिक विश्वविद्यालयों और 200 से अधिक विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस प्रदर्शनी ने छात्रों और अभिभावकों को विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों से सीधे संवाद करने तथा शैक्षणिक पाठ्यक्रमों, प्रवेश प्रक्रिया, छात्रवृत्ति, आवास सुविधाओं, वीज़ा सहायता, छात्र जीवन और भविष्य के करियर अवसरों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने का मंच प्रदान किया।प्रदर्शनी में मेडिसिन, डेंटिस्ट्री, इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, एविएशन, सूचना प्रौद्योगिकी, मैनेजमेंट, कृषि, वेटरिनरी साइंसेज, बायोटेक्नोलॉजी, ह्यूमैनिटीज, इंटरनेशनल रिलेशंस और रूसी भाषा अध्ययन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को प्रदर्शित किया गया।पूरे दिन के दौरान 1,500 से अधिक छात्रों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों और शिक्षा विशेषज्ञों के साथ व्यक्तिगत काउंसलिंग सत्रों और इंटरैक्टिव चर्चाओं में भाग लिया। इन चर्चाओं के माध्यम से छात्रों को विभिन्न विश्वविद्यालयों की तुलना करने, पात्रता मानदंड समझने, छात्रवृत्ति के अवसरों की जानकारी प्राप्त करने और अपने शैक्षणिक भविष्य के लिए व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने रूस में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाया।अभिभावकों ने भी विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों से सक्रिय रूप से संवाद कर छात्र सहायता सेवाओं, कैंपस सुविधाओं, आवास व्यवस्था, सुरक्षा उपायों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए उपलब्ध करियर अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की। समिट के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रमुख रूसी विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रियाएँ प्रारंभ एवं पूर्ण कीं, जिससे यह कार्यक्रम शैक्षणिक निर्णय और भविष्य के अवसरों के लिए अत्यंत उपयोगी मंच साबित हुआ।छात्र सहभागिता के अलावा, समिट ने भारतीय और रूसी शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने हेतु संस्थागत चर्चाओं और अकादमिक संवाद को भी बढ़ावा दिया। प्रतिनिधियों ने अकादमिक एक्सचेंज, रिसर्च सहयोग, छात्र गतिशीलता और भविष्य की शैक्षणिक साझेदारियों पर विचार-विमर्श किया।समिट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए रूस एजुकेशन के टेक्निकल एडवाइज़र एयर मार्शल (डॉ.) पवन कपूर (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारत और रूस के बीच 70 वर्षों से अधिक समय से विश्वासपूर्ण साझेदारी रही है, जो रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर आधारित है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक सहयोग छात्रों के लिए सार्थक अवसर उत्पन्न कर रहा है और यह द्विपक्षीय संबंधों के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है।भारत में Rossotrudnichestvo के प्रतिनिधि कार्यालय की प्रमुख डॉ. एलेना रेमिज़ोवा ने समिट में भाग लेने वाले भारतीय और रूसी विश्वविद्यालयों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भारत और रूस के बीच मजबूत सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस भारतीय छात्रों के लिए विविध शैक्षणिक और शोध अवसर उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि IRES जैसी पहलें शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ छात्रों के विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय करियर के नए मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। मारी स्टेट यूनिवर्सिटी के रेक्टर प्रो. मिखाइल एन. श्वेत्सोव ने कहा कि रूसी विश्वविद्यालय भारतीय छात्रों का स्वागत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक अवसंरचना, शोध अवसरों और सहयोगपूर्ण शिक्षण वातावरण के माध्यम से लगातार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंडो-रशियन एजुकेशन समिट जैसी पहलें छात्रों को विश्वविद्यालयों से सीधे जोड़ती हैं और उन्हें अपने शैक्षणिक भविष्य के संबंध में सूचित निर्णय लेने में सहायता करती हैं।समिट के दूसरे दिन ने छात्र-विश्वविद्यालय संवाद के महत्व को पुनः स्थापित किया और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के अवसरों की बढ़ती मांग को उजागर किया। छात्रों, अभिभावकों, विश्वविद्यालयों और शिक्षा विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर IRES 2026 ने शैक्षणिक खोज, सूचित निर्णय और सार्थक अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए एक सशक्त वातावरण तैयार किया।रूस एजुकेशन भारत की विश्वसनीय शिक्षा परामर्श संस्थाओं में से एक है, जिसके पास रूसी संघ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक छात्रों का मार्गदर्शन करने का 33 वर्षों से अधिक का अनुभव है। विश्वविद्यालय साझेदारियों, प्रवेश मार्गदर्शन, छात्र सहायता सेवाओं और विभिन्न अकादमिक पहलों के माध्यम से रूस एजुकेशन गुणवत्तापूर्ण अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देने और भारत-रूस शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
अवधूत परम्परा : सेवा, करुणा और मानव गरिमा का जीवंत संदेश
नई दिल्ली: भारतीय सनातन परम्परा में “अवधूत” धारा आध्यात्मिक साधना, करुणा और निःस्वार्थ सेवा का अद्वितीय संगम मानी जाती है। यह परम्परा केवल व्यक्तिगत मोक्ष या साधना तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज के उपेक्षित, पीड़ित और वंचित वर्गों को सम्मानपूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए समर्पित रही है। अवधूत परम्परा का उद्भव भगवान दत्तात्रेय की अद्वैत चेतना से माना जाता है, जिसे आगे बाबा कीनाराम ने अघोर दर्शन के माध्यम से सामाजिक चेतना से जोड़ा। बाद में अवधूत भगवान राम ने इसे व्यापक मानव सेवा आन्दोलन का स्वरूप प्रदान किया। आज यह परम्परा उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कुष्ठ सेवा, आदिवासी उत्थान और मानव गरिमा की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। “अवधूत” का अर्थ है ऐसा साधक जिसने मोह, भय, घृणा, लोभ और सामाजिक भेदभाव का त्याग कर दिया हो। इस परम्परा का मूल संदेश है — “मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है।” अवधूत साधक सम्पूर्ण सृष्टि को एक परिवार मानता है और हर प्राणी में परमात्मा का स्वरूप देखता है। इस परम्परा के दार्शनिक आधार में भगवान दत्तात्रेय का विशेष स्थान है, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का संयुक्त स्वरूप माना जाता है। उन्होंने यह शिक्षा दी कि वास्तविक ज्ञान केवल ग्रंथों से नहीं, बल्कि जीवन, प्रकृति और अनुभवों से प्राप्त होता है। 20वीं शताब्दी में अवधूत भगवान राम ने इस परम्परा को नई दिशा देते हुए आध्यात्मिकता को प्रत्यक्ष मानव सेवा से जोड़ा। उन्होंने विशेष रूप से कुष्ठ रोगियों, आदिवासियों, दलितों और समाज से बहिष्कृत वर्गों के बीच कार्य किया। उस समय कुष्ठ रोगियों को सामाजिक बहिष्कार और अपमान का सामना करना पड़ता था, लेकिन अवधूत भगवान राम ने उन्हें अपनाकर मानवता और करुणा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। वाराणसी स्थित “अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम” इस सेवा भावना का विश्वस्तरीय उदाहरण है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज जानकारी के अनुसार, आश्रम ने 99,045 पूर्ण कुष्ठ रोगियों तथा 1,47,503 आंशिक कुष्ठ रोगियों का उपचार कर मानव सेवा का ऐतिहासिक कार्य किया है। आश्रम की विशेषता केवल चिकित्सा सेवा तक सीमित नहीं रही, बल्कि रोगियों को सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता से जोड़ने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भोजन, वस्त्र, आश्रय और उपचार के साथ सामुदायिक जीवन, श्रम, प्रार्थना और ध्यान के माध्यम से रोगियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया। अवधूत परम्परा की सेवा गतिविधियाँ वाराणसी तक सीमित नहीं हैं। बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर, निःशुल्क दवा वितरण, शिक्षा, छात्रावास और संस्कार केन्द्रों के माध्यम से हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया गया है। आज जब समाज भौतिक प्रगति के बावजूद संवेदनहीनता, अकेलेपन और विभाजन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब अवधूत परम्परा का संदेश अत्यंत प्रासंगिक हो उठता है। यह परम्परा हमें याद दिलाती है कि वास्तविक आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि पीड़ित मानवता के जीवन में सम्मान, आशा और आत्मविश्वास जगाने में निहित है। भगवान दत्तात्रेय से बाबा कीनाराम, अवधूत भगवान राम और परमपूज्य श्री प्रियदर्शी राम तक प्रवाहित यह करुणामयी धारा भारतीय संस्कृति की जीवंत आत्मा है, जो आज भी समाज को मानव सेवा और करुणा का मार्ग दिखा रही है।