मुख्यमंत्री के विजन से उत्तर प्रदेश बना ‘डिजिटल डेस्टिनेशन’
आईटी, स्टार्टअप और डेटा सेंटर के क्षेत्र में ऐतिहासिक छलांग सीएम योगी आदित्यनाथ की नीति से यूपी बना स्टार्टअप और आईटी निवेशकों की पहली पसंद योगी सरकार की डिजिटल क्रांति से बदल रही यूपी की तस्वीर 14 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश, 60 हजार से अधिक रोजगार लखनऊ, 10 दिसम्बर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व और नीति-नियोजन का असर स्टार्टअप, आईटी और डेटा सेंटर के क्षेत्र में तेज गति से हो रहे विकास के तौर पर देखने को मिल रहा है। बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश ने डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की है, जिससे उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख डिजिटल डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। इंफोसिस, एडोब, आईबीएम, और टेली पर्फार्मेंस जैसी वैश्विक आईटी कंपनियों के निवेश से न केवल प्रदेश में आर्थिक प्रगति हो रही है, बल्कि लाखों की संख्या में रोजगारों का भी सृजन हो रहा है। स्टार्टअप प्रोत्साहन में यूपी ने तोड़ा रिकॉर्ड, 2,600 लाख तक पहुँची आर्थिक मददमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजन के मुताबिक उत्तर प्रदेश को स्टार्टअप, आईटी सेक्टर और डाटा प्रॉसेसिंग के हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस क्रम में स्टार्टअप के विकास के लिए प्रदेश सरकार की ओर से दिये जाने वाले वित्तीय प्रोत्साहन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल है। वर्ष 2021-22 में जहां स्टार्टअप प्रोत्साहन के लिए मात्र 274 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी, वहीं 2022-23 में यह बढ़कर 866 लाख रुपये और 2023-24 में 1,326 लाख रुपये तक पहुँच गई। जबकि वर्ष 2025 में स्टार्टअप प्रोत्साहन राशि के रूप में 2,600 लाख रुपये दिये जा चुके हैं। स्टार्टअप प्रोत्साहन में लगातार वृद्धि स्पष्ट करती है कि, सीएम योगी आदित्यनाथ का विजन प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को लगातार मजबूती देना है। इंफोसिस, एडोब, आईबीएम, और टेली पर्फार्मेंस ने यूपी में किया 868 करोड़ रुपये का निवेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आईटी और आईटीईएस नीति के तहत भी उत्तर प्रदेश ने निवेश और रोजगार के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। वर्ष 2025 की शुरुआत में ही 2 एलओसी से जरिये ₹28.34 करोड़ का निवेश और 1,600 नए रोजगार सृजित हुए जबकि सितंबर 2025 के बाद प्राप्त 3 बड़े प्रस्तावों के माध्यम से ₹868 करोड़ के निवेश और लगभग 7,800 रोजगार का सृजन हुआ है। इनमें इंफोसिस, एडोब, आईबीएम, और टेली पर्फार्मेंस जैसी वैश्विक आईटी कंपनियां निवेश कर,उत्तर प्रदेश को आईटी और टेक्नालॉजी निवेश के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं। डेटा सेंटर नीति- 2021 के तहत यूपी बना रहा देश का डिजिटल हबसीएम के विजन में बनी डेटा सेंटर नीति- 2021 के माध्यम से उत्तर प्रदेश ने डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस नीति का परिणाम है कि एनआईडीपी के 9,134 करोड़, एनटीटी ग्लोबल डाटा सेंटर के 1,687 करोड़, अडानी इंटरप्राइजेज़ के दो अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में 2,416 करोड़ और 2,713 करोड़ और एसटी टेली मीडिया ग्लोबल डेटा सेंटर के 2,130 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। जिनको तेजगति से क्रियान्वित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्टार्टअप प्रोत्साहन, आईटी विस्तार और डेटा सेंटर जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में भारी निवेश यह साबित करता है कि उत्तर प्रदेश अब ‘बीमारू राज्य’ की पुरानी छवि से बाहर निकलकर ‘ब्रांड यूपी’ के रूप में देश के अग्रणी औद्योगिक और डिजिटल राज्यों में शामिल हो चुका है।
घबराइए मत, हर समस्या का होगा प्रभावी समाधान : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
जनता दर्शन में सीएम योगी ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं अफसरों से बोले मुख्यमंत्री, हर पीड़ित की समस्या का हो समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण गंभीर बीमारियों में इलाज के लिए मिलेगी भरपूर आर्थिक मदद : मुख्यमंत्री गोरखपुर। मंगलवार को गोरखपुर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास करने के बाद बुधवार सुबह जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने समस्या लेकर आए लोगों से आत्मीयता से संवाद करते हुए कहा, ‘घबराइए मत, हर समस्या का प्रभावी समाधान कराया जाएगा।’ जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने पास में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और उसका समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण व पारदर्शी निराकरण कराएं। बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने के निर्देश दिए। जनता दर्शन में महिलाओं की संख्या अधिक रही। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे। आत्मीयता के पुट में ‘कहां से आए हैं, क्या बात है’, कहते हुए एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। भरोसा दिया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। किसी को भी परेशान होने या चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना पत्रों को उन्होंने अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए। कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर उन्होंने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। एक महिला ने मकान जला दिए जाने की शिकायत की तो मुख्यमंत्री ने जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी, सरकार भरपूर आर्थिक मदद देगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी। गुड़-रोटी खिलाकर सीएम ने की गोसेवा, मोर को भी दुलारागोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान बुधवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से गुड़-रोटी खिलाया। गोशाला में सीएम योगी के पहुंचने पर मोर भी उनके पास आ जाते हैं। मुख्यमंत्री ने मोर को भी दुलारा और अपने हाथों से रोटी खिलाया।
चुनावी उथल-पुथल से बिहार खिल उठा है
— डॉ. मयंक कुमार राय(असिस्टेंट प्रोफेसर,वाणिज्य संकाय गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, सासाराम ,बिहार) “जिंदाबाद-जिंदाबाद” की गूंज आज भी गांव की गलियों, चौक-चौराहों और दीवारों से टकराती है। गांव का बेटा, शहर का बेटा, आपका अपना हमदर्द — हर कोई चुनावी मैदान में उतर चुका है। बूढ़ी अम्मा घर के कोने वाली खिड़की से पल्लू दांतों में दबाकर देख रही हैं — “इस बार तो लग रहा है, विकास जरूर होगा।” उन आंखों में समय की झुर्रियां हैं, पर उम्मीद आज भी ताज़ा है। बिहार का चुनावी परिदृश्य हमेशा से रोचक और भावनाओं से भरा रहा है। यहां राजनीति सिर्फ विचारधारा की नहीं, बल्कि रिश्तों, भावनाओं और उम्मीदों की भी होती है। कार्यकर्ता अपनी निष्ठा, समय और जीवन तक को न्यौछावर कर देते हैं ताकि उनके ‘नेता जी’ सत्ता तक पहुंचें — परंतु पाँच वर्ष बाद वही विकास फिर गलियों और चौराहों में जवान होकर यह सवाल पूछता है कि “अबकी बार क्या हुआ विकास का?” सिर्फ बीस वर्ष पहले का बिहार याद कीजिए — जब सड़कों पर अंधेरा था, प्रशासन लाचार, और समाज जात-पात की दीवारों में बंटा हुआ था। हर चुनाव में विकास की नहीं, बल्कि जाति और बिरादरी की गिनती होती थी। किसी को यह गर्व था कि उसका नेता उसकी जात का है, चाहे वह जनता के लिए कुछ करे या न करे। परिवारवाद और जातिवाद ने बिहार की सामाजिक संरचना को तोड़कर रख दिया था। हर व्यक्ति अपने छोटे से घेरे में सिमट गया था — गांवों की चौपालों से लेकर शहरों के दफ्तरों तक, राजनीति “हम” और “वे” के बीच बंट चुकी थी। ऐसे दौर में एक नेतृत्व उभरा — जिसने बिहार की राजनीति को रार और तकरार की भाषा से निकालकर विकास और विश्वास की भाषा दी।मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बिहार को सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में नई पहचान दी। उन्होंने यह साबित किया कि अगर इच्छा शक्ति हो तो सबसे पिछड़ा राज्य भी प्रगति की मिसाल बन सकता है। आज बिहार के गांवों में सड़कों पर दूधिया बल्ब रोशनी लिए खिलखिलाता है, बच्चों के हाथों में किताबें अठखेलियां करती हैं, और युवाओं की आंखों में रोजगार के सपने विकसित बिहार को लेकर संकल्पित हैं। पहले जहां वोट जाति के नाम पर मांगे जाते थे, वहीं अब बहस “विकास” पर होती है। जनता अब पूछत बा — “सड़क बनी की नाहीं?”, “स्कूल खुली की नाहीं? कहो कुछ होइबो करि” मेरे अपने क्षेत्रीय भ्रमण के अनुभव बताते हैं कि अब बिहार की जनता नेताओं की आपसी तकरार से ऊब चुकी है। जनता अब ठोस परिणाम चाहती है — विकास, शिक्षा, रोजगार और सुशासन। अब लोग यह समझ चुके हैं कि “समाज का विकास ही व्यक्ति का विकास है।” बिहार की नई पीढ़ी जात-पात की संकीर्ण सोच से ऊपर उठ रही है। लोग अब परिवारवाद नहीं, बल्कि प्रदर्शनवाद देखना चाहते हैं — यानी कौन कितना काम करता है, कौन कितनी ईमानदारी से जनता के लिए खड़ा है। बदलते बिहार की यह कहानी केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि मानसिकता के परिवर्तन की भी कहानी है। राजनीतिक नारे अब भी गूंजते हैं, पर उनमें नई ऊर्जा है — विकास की ऊर्जा।हां, यह सही है कि अभी भी कुछ बोगियां विकास की पटरी से नीचे हैं, लेकिन दिशा सही है। अब वह समय दूर नहीं जब बिहार के हर वर्ग, हर समुदाय, हर गांव और हर व्यक्ति के जीवन में विकास की यह रेलगाड़ी धड़धड़ाती हुई पहुंचेगी। मैं, एक सामान्य नागरिक के रूप में, बिहार के इस नव-निर्माण के युग में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को समाज के प्रतिनिधि के रूप में हार्दिक धन्यवाद और आभार ज्ञापित करता हूं — क्योंकि उन्होंने यह विश्वास जगाया कि बिहार अब सिर्फ चुनावी रार और तकरार का नहीं, बल्कि विकास और सुधार का प्रतीक बन चुका है।
क्या है स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho? जिसे रेलमंत्री भी कर चुके हैं इस्तेमाल — माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को टक्कर देने वाला भारतीय टेक दिग्गजक्या है स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho? जिसे रेलमंत्री भी रहे इस्तेमाल, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को देगा टक्कर

स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho: भारतीय टेक्नोलॉजी की दुनिया में क्रांति भारत ने पिछले कुछ वर्षों में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। इन्हीं में से एक चमकता हुआ नाम है Zoho Corporation, जो पूरी तरह से भारतीय स्वदेशी सॉफ्टवेयर कंपनी है। यह प्लेटफॉर्म न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों को चुनौती दे रहा है। रेलमंत्री समेत कई सरकारी अधिकारी हैं इसके यूज़र Zoho की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत के रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की पुष्टि की थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि वे Zoho का प्रयोग करते हैं क्योंकि यह “पूरी तरह भारतीय और सुरक्षित” है।यह बयान आने के बाद Zoho का नाम देशभर में ट्रेंड करने लगा और लोगों ने इस प्लेटफॉर्म को विदेशी विकल्पों के मुकाबले अपनाने की दिशा में रुचि दिखानी शुरू की। क्या है Zoho? Zoho Corporation एक भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी है जिसकी स्थापना 1996 में श्रीधर वेम्बू (Sridhar Vembu) ने की थी। इसका मुख्यालय चेन्नई और अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित है।Zoho कई तरह के क्लाउड-आधारित बिज़नेस टूल्स और एप्लिकेशन प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं: इन सेवाओं के ज़रिए कंपनियां अपने पूरे बिज़नेस सिस्टम को डिजिटल रूप से चला सकती हैं — बिना माइक्रोसॉफ्ट 365 या गूगल वर्कस्पेस पर निर्भर हुए। Zoho क्यों है खास? दुनिया में बढ़ता प्रभाव Zoho के आज 100 मिलियन (10 करोड़) से ज़्यादा यूज़र हैं। यह 180 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है।भारत के अलावा अमेरिका, जापान, सिंगापुर और यूरोप में भी Zoho का बड़ा ग्राहक आधार है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब Zoho के टूल्स को अपने सिस्टम में इंटीग्रेट कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को दे रहा है टक्कर Zoho का पूरा ईकोसिस्टम (ईमेल, डॉक्यूमेंट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, अकाउंटिंग, CRM आदि) इसे सीधे तौर पर Microsoft 365 और Google Workspace के बराबर खड़ा करता है।जहां विदेशी प्लेटफॉर्म्स के लिए भारत को केवल एक “मार्केट” के रूप में देखा जाता है, वहीं Zoho ने भारत को “इनोवेशन सेंटर” बना दिया है। संस्थापक का विज़न Zoho के सीईओ श्रीधर वेम्बू का कहना है — “हमारा लक्ष्य सिर्फ सॉफ्टवेयर बेचना नहीं, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।” वेम्बू ने ग्रामीण क्षेत्रों में Zoho के R&D सेंटर खोलकर यह साबित किया है कि भारत के छोटे कस्बों से भी विश्वस्तरीय तकनीक विकसित की जा सकती है। निष्कर्ष Zoho आज भारत की उस नई टेक पहचान का प्रतीक बन चुका है जो “Made in India, Built for the World” की भावना को साकार करता है।रेलमंत्री से लेकर छोटे स्टार्टअप तक, हर कोई इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म की ओर रुख कर रहा है। आने वाले समय में Zoho, भारत की डिजिटल स्वतंत्रता की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।
Flipkart Big Billion Days: नहीं करना होगा इंतजार, iPhone 17 समेत प्रीमियम स्मार्टफोन्स की 10 मिनट में होगी डिलिवरी

Flipkart 10 Minutes Delivery: ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म Flipkart अगले हफ्ते से साल की सबसे बड़ी सेल Big Billion Days लेकर आ रहा है। इस बार ग्राहक सिर्फ भारी डिस्काउंट्स का ही मजा नहीं लेंगे, बल्कि फटाफट डिलिवरी का अनुभव भी कर पाएंगे। खास बात यह है कि अब आपको घंटों इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि Flipkart Minutes सेवा के तहत कुछ चुनिंदा प्रोडक्ट्स सिर्फ 10 मिनट में घर पर डिलीवर हो जाएंगे। फ्लिपकार्ट मिनट्स क्या है? Flipkart Minutes दरअसल ई-कॉमर्स कंपनी की क्विक डिलिवरी सेवा है। इसका मकसद ग्राहकों तक प्रोडक्ट्स को बेहद कम समय में पहुंचाना है। इस बार बिग बिलियन डेज सेल के दौरान इस सेवा का फायदा 19 शहरों और लगभग 3000 पिन कोड्स में दिया जाएगा। यानी बड़े शहरों के साथ-साथ अब टियर-2 शहरों जैसे अंबाला, गुवाहाटी, जयपुर, लखनऊ, कानपुर और पटना के लोगों को भी यह सुविधा मिलेगी। सिर्फ 10 मिनट में मिलेगा iPhone 17 अब तक लोग नए iPhone 17 को खरीदने के लिए ऐपल स्टोर्स के बाहर घंटों लाइन में खड़े नजर आ रहे थे। लेकिन अब यही फोन फ्लिपकार्ट से सिर्फ 10 मिनट में आपके घर तक पहुंच जाएगा। इसके साथ ही कई और प्रीमियम स्मार्टफोन्स को भी इसी क्विक डिलिवरी लिस्ट में शामिल किया गया है।
Army जवान को अपशब्द कहने वाली महिला से HDFC ने किया किनारा, माफी मांगने का वीडियो भी वायरल

रेपो रेट में बदलाव न होने से Home Loan पर कैसा असर? आज की बैठक में रेपो रेट की दरों को 5.50% ही रखा गया है. अंतिम कटौती जून में गी गई थी. RBI ने रेपो रेट में बदलाव नहीं किया है तो इससे होम लोन लेने वालों के लिए कोई राहत नहीं होगी. मौजूदा और नई लोन की ब्याज दरें स्थिर रहेंगी, जिससे EMI में कोई कमी नहीं आएगी. इसका मतलब है कि आपका मासिक कर्ज का बोझ वही रहेगा और त्योहारों या अन्य मौकों पर आर्थिक फायदा नहीं मिलेगा. Repo Rate में कटौती से क्या होता? रेपो रेट की दरों में कटौती होने से यह इस वर्ष की चौथी कटौती हो सकती थी. फिलहाल, रेपो रेट की दर 5.50% है जो उतनी ही बरकरार रखी गई है. आरबीआई चार एमसपीसी मीटिंग में से 3 में रेपो रेट की दरों को कम कर चुका है. इनमें फरवरी, अप्रैल और जून में हुई मीटिंग में यह फैसला लिया गया था. अगस्त की मीटिंग में भी कोई कटौती नहीं हुई थी. इस कड़ी में अक्टूबर भी शामिल हो गया है.
Jio Special Offer: अब Jio हुआ और भी सस्ता! 75 रुपये के रिचार्ज में मिलेगी अनलिमिटेड डेटा और कॉलिंग की सुविधा

RBI Monetary Policy 2025: भारतीय रिजर्व बैंक की MPC मीटिंग के नतीजे आ गए हैं. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट में किसी बदलाव को कोई ऐलान नहीं किया है. यह मीटिंग 29 सितंबर से शुरू हुई थी जिसकी पूरी जानकारी आज संजय मल्होत्रा ने जारी कर दी है. इससे साफ होता है कि आपके लोन की EMI पर कोई भी बदलाव नहीं हुआ है. अगस्त के बाद अक्टूबर की मीटिंग में भी रेपो रेट की दर 5.5% रही है. इससे पहले 3 बार रेपो दरों में कटौती की जा चुकी है. आज की बैठक अहम इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे. यह मीटिंग 29 सितंबर से शुरू हुई थी और 1 अक्टूबर यानी आज तक चलेगी. मीटिंग सुबह 10 बजे शुरू हुई थी. इस बैठक में कुल छह सदस्यों ने भाग लिया था. मीटिंग के परिणामों की घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए की गई . इसमें रेपो रेट और अन्य प्रमुख नीतिगत उपायों के बारे में बताया गया जिसमें रेपो रेट में अगस्त के बाद दूसरी बार किसी भी तरह कोई बदलाव नहीं हुए हैं.
RBI का आम लोगों को झटका, रेपो रेट में नहीं किया गया कोई बदलाव

RBI Monetary Policy 2025: भारतीय रिजर्व बैंक की MPC मीटिंग के नतीजे आ गए हैं. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट में किसी बदलाव को कोई ऐलान नहीं किया है. यह मीटिंग 29 सितंबर से शुरू हुई थी जिसकी पूरी जानकारी आज संजय मल्होत्रा ने जारी कर दी है. इससे साफ होता है कि आपके लोन की EMI पर कोई भी बदलाव नहीं हुआ है. अगस्त के बाद अक्टूबर की मीटिंग में भी रेपो रेट की दर 5.5% रही है. इससे पहले 3 बार रेपो दरों में कटौती की जा चुकी है. आज की बैठक अहम इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे. यह मीटिंग 29 सितंबर से शुरू हुई थी और 1 अक्टूबर यानी आज तक चलेगी. मीटिंग सुबह 10 बजे शुरू हुई थी. इस बैठक में कुल छह सदस्यों ने भाग लिया था. मीटिंग के परिणामों की घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए की गई . इसमें रेपो रेट और अन्य प्रमुख नीतिगत उपायों के बारे में बताया गया जिसमें रेपो रेट में अगस्त के बाद दूसरी बार किसी भी तरह कोई बदलाव नहीं हुए हैं.