देव में 90 फीट के रावण का होगा पुतला दहन
सुरक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार अंचलाधिकारी एवं नगर पंचायत के पदाधिकारी ने किया स्थल का निरिक्षण औरंगाबाद : सूर्य नगरी देव के काली स्थान शिवालय समिति के तत्वावधान में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समिति के लोग दिन रात रावण का पुतला बनाने में लगे हुए है।इस बार लगभग 60 फ़ीट का ऊंचा रावण बनाया जा रहा है l इसके लिए देव के अंचलाधिकारी दीपक कुमार एवं नगर अध्यक्ष पिंटू साहिल सहित अन्य पदाधिकारीगण स्थल का निरिक्षण किये lकाली स्थान शिवालय समिति के अध्यक्ष दीपक धनराज,सचिव राहुल सिंह,संरक्षक गोरख साव,बिट्टू सिंह,दीपक गुप्ता,उमेश प्रजापत,रवि पेंटर,गुड्डू सिंह,राकेश राही,सोनू कुमार, राजू कुमार,अमरनाथ कुमार,मनीष कुमार,उपेंद्र यादव एवं अशोक यादव नें मजिस्ट्रेट को बताया कि विगत वर्ष के आयोजनों की समीक्षा करने के बाद इस वर्ष सुरक्षा काफी कडी होगी। देव थाना से लेकर थाना मोड़ तक पूरे मार्ग में आकर्षक और सुचारू लाइटिंग की मुकम्मल व्यवस्था की जाएगी।भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्यकर्ताओं को फोटोयुक्त पहचान पत्र दिए जाएंगे जिससे सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रहे।रावण दहन स्थल पर दर्शकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मजबूत कंडी से डबल बैरिकेडिंग की जाएगी।किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से निपटने के लिए कार्यक्रम स्थल पर अग्निशामन गाड़ी की तैनाती की जाएगी।चिकित्सकीय सहायता के लिए देव अस्पताल के चिकित्सा कर्मी जीवन रक्षक दवाइयों के साथ कार्यक्रम स्थल पर मुस्तैद रहेंगे।स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा जारी सभी नियमों और कानूनों का पूरी तरह से पालन करते हुए कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और सफल बनाया जाएगा।समिति ने बताया कि 20 अक्टूबर को दोपहर से ही विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसके माध्यम से समाज को यह संदेश दिया जाएगा कि जब-जब पृथ्वी पर पाप बढ़ता है, तब-तब बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए भगवान श्रीराम स्वयं अवतार लेते हैं। रावण वध प्रसंग के दौरान भगवान श्रीराम की सेना यानी ‘बानर सेना’ के योगदान को विशेष झांकी के रूप में शामिल किया जाएगा। प्रभु श्रीराम,लक्ष्मण,सीता और हनुमान का किरदार निभाने वाले कलाकार सबसे पहले देव स्थित ऐतिहासिक भगवान सूर्य मंदिर जाएंगे। वहाँ अपने कुलदेवता भगवान भास्कर का आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद वे रामलीला मैदान पहुंचेंगे और रावण वध की लीला संपन्न करेंगे।इस सनातनी कार्यक्रम में सहयोग करने वाले दानदाताओं एवं कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने के लिए एक विशेष सम्मान समारोह का भी आयोजन किया जाएगा जिससे सनातन संस्कृति से जुड़े ऐसे आयोजनों में समाज का सहयोग लगातार करते रहें।
पट खुलते ही मां दुर्गा के दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भक्तिमय हुआ दाउदनगर
दाउदनगर (औरंगाबाद)। शारदीय नवरात्र को लेकर दाउदनगर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक भक्तिमय माहौल बना हुआ है। सप्तमी तिथि को मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बीच मां दुर्गा का पट खुलते ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मां के दर्शन के लिए पूजा पंडालों में भक्तों का तांता लगा रहा।विभिन्न पूजा समितियों की ओर से आकर्षक पंडालों का निर्माण कराया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी और भव्य सजावट से पूजा स्थल जगमगा रहे हैं। वहीं, भक्ति गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना कर रहे हैं।शहर में डेढ़ दर्जन से अधिक स्थानों पर पूजा-अर्चनादाउदनगर शहर में डेढ़ दर्जन से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा और मां काली की पूजा-अर्चना की जा रही है। पुराना शहर संघत, श्रीराम मंदिर, हनुमान मंदिर, बाजार समिति के पास स्थित दुर्गा मंदिर तथा महिला कॉलेज के समीप काली मंदिर सहित विभिन्न पूजा स्थलों पर श्रद्धालु पहुंचकर मां के दर्शन कर रहे हैं। वहीं, पूरे प्रखंड में कुल 46 स्थानों पर पूजा का आयोजन किया जा रहा है।नवरात्र में मां के विभिन्न स्वरूपों की आराधना का विशेष महत्वज्योतिषाचार्य तारिणी कुमार इंद्र गुरु ने बताया कि नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। सप्तमी तिथि को मां कालरात्रि और अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु मां की आराधना कर जीवन के कष्टों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और मंगलमय भविष्य की कामना करते हैं।नवरात्र को लेकर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है। पूजा पंडालों की आकर्षक सजावट और श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़ से पूरा दाउदनगर मां दुर्गा की भक्ति में सराबोर नजर आ रहा है।
जिलाधिकारी ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल अस्पताल का किया निरीक्षण
औरंगाबाद: गुरुवार को जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने सदर अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल अस्पताल भवन का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी ने निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया तथा संबंधित विभागीय पदाधिकारियों,बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड(बी.एम.सी.एल.) के अभियंताओं एवं संवेदक के प्रतिनिधि को आवश्यक निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि निर्माणाधीन एम.सी.एच.अस्पताल का कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करते हुए दिसंबर 2026 तक इसे हैंडओवर करना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी को आपसी समन्वय स्थापित कर शेष कार्यों को तेजी से पूरा करने तथा गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया।जिलाधिकारी द्वारा सदर अस्पताल परिसर में सात निश्चय योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन जीएनएम एवं पैरामेडिकल संस्थान का भी निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की तथा संबंधित पदाधिकारियों एवं कार्यकारी एजेंसी को शेष कार्यों को यथाशीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया,साथ ही, कार्य में आ रही बाधाओं के निराकरण के लिए संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण एवं चिकित्सा शिक्षा से संबंधित आधारभूत संरचनाओं का समयबद्ध निर्माण जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप पूर्ण हों,जिससे बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ चिकित्सा एवं पैरामेडिकल प्रशिक्षण की व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा सके।निरीक्षण के क्रम में सिविल सर्जन,औरंगाबाद डॉ कृष्ण कुमार एवं डीपीएम स्वास्थ्य उपस्थित थे।
सीता स्वयंवर के मंचन में उमड़ी भीड़
हसपुरा: हसपुरा बाजार के मां दुर्गा मंदिर परिसर में चल रहे दस दिवसीय रामलीला को लेकर प्रतिदिन रामलीला देखने आने वाले हजारों की तादाद में श्री राम भक्तों का हुजूम प्रति दिन पांडाल में उमड़ रहा है।रामलीला के तीसरे दिन मंगलवार की रात भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।इसका शुभारंभ रामलीला के मुख्य संरक्षक डॉ.संजय प्रसाद के नेतृत्व में राम दरबार की आरती के साथ हुआ।मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) के कलाकारों ने श्रीराम द्वारा धनुष तोड़ने व सीता के स्वयंवर का मंचन किया गया। राम-सीता के प्रथम परिचय से लेकर धनुष भंग व वरमाला तक के प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर दिया।धार्मिक प्रसंगों की भावपूर्ण प्रस्तुति देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।श्रीराम द्वारा धनुष उठाते ही वह टूट गया।धनुष टूटते ही पूरे पांडाल में जयश्री राम के गगनभेदी नारे लगने लगते हैं। तभी भरी सभा वहां क्रोधित परशुराम पहुंच जाते हैं और धनुष के टूटने पर क्रोधित हो उठते हैं। इसके बाद लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखा संवाद होता है। इसके पश्चात धूमधाम से भगवान श्रीराम व सीता जी का विवाह संपन्न होता है।कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष अनिल आर्य,सचिव राजू भारती, केदार प्रसाद,बैजू कुमार, सुरेश आर्य ने अतिथियों को सम्मानित किया।पूर्व जिप सदस्य रामाश्रय सिंह,पूर्व मुखिया विजय अकेला,शालिग्राम मिश्रा ने कि हसपुरा में रामलीला की शुरुआत एक अच्छी पहल है।इससे श्री के आदर्शों पर चलने के लिए समाज को प्रेरणा मिलेगी।उपमुखिया विकास गुप्ता,शिक्षक रामजीत प्रसाद,गया प्रसाद सहित कई सदस्य उपस्थित थे।
आज होगा बिहार झारखंड का सबसे बड़ा डांडिया नाइट्स
डांडिया नाइट्स की हो गई सारी तैयारी,स्टेज सज धज कर तैयार डांडिया नाइट्स के वर्कशॉप में झूम उठे शहर के लोग,मचाया धमाल औरंगाबाद: आज 14 अक्टूबर दिन बुधवार को स्थानीय सीतयोग विश्वविद्यालय के खेल मैदान में आयोजित होनेवाले बिहार-झारखंड के सबसे बड़े डांडिया नाइट्स के लिए स्टेज सजधज कर तैयार है,आयोजक तैयार हैं और इधर प्रतिभागियों का डांडिया एवं गरबा डान्स करने के लिए जिया बेक़रार है।डांडिया नाइट्स की सफलता के लिए कोलकात्ता से डीजे पीयूष एवं गया जी से कोरियोग्राफर अमित कुमार एवं उनकी टीम का आगमन हो चुका है।ज्ञात हो कि बिहार एवं झारखंड के सबसे बड़े डांडिया नाइट्स की तैयारी के पिछले महीने से ही जोर शोर से चल रही है।इस डांडिया नाइट्स की सफलता के लिए एवं इसकी भव्यता के लिए सीतयोग खबर एवं औरंगाबाद चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ने अपनी पुरी ताकत झोंक दी है।इस आयोजन की सफलता के लिए बिहार एवं झारखण्ड के सबसे नामी कोरियोग्राफर अमित कुमार एवं उनकी टीम ने गया जी से आकर 7,8,9 एवं 10 अक्टूबर को चार दिवसीय वर्कशॉप आयोजित कर सैकड़ों प्रतिभागियों को निःशुल्क डांडिया एवं गरबा का प्रशिक्षण देकर उन्हें प्रशिक्षित किया, इतना ही नहीं उन्हें कल मंगलवार को भी एक दिवसीय प्रशिक्षण देकर उन्हें डांडिया एवं गरबा के तैयार किया।इस प्रकार कोरियोग्राफर अमित कुमार एवं उनके टीम मेंबर विवेक कुमार एवं श्याम कुमार द्वारा डांडिया नाइट्स के लिए कुल पाँच दिन निशुल्क निशुल्क प्रशिक्षण दिया गया।आज के वर्कशॉप में सोनी कुमारी,काजल कुमारी,स्वीटी कुमारी,लक्ष्मी कुमारी,सोनम कुमारी,श्यामा कुमारी,सिम्पी कुमारी,वैष्णवी कुमारी,सत्यम कुमार, आयुष कुमार,रविन्द्र कुमार एवं अंकित पाल सहित एक सौ से ज्यादा प्रशिक्षणार्थियों में भाग लेकर धमाल मचा दिया।डांडिया नाइट्स की सफलता के लिए सीतयोग यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डॉ.राजेश कुमार सिंह, सीतयोग खबर की ओर से कार्यक्रम के कंवेनर बिशाल सिंह चौहान फैकल्टी मेंबर वैभव कुमार,उप कंवेनर चितरंजन कुमार एवं चंदन कुमार जबकि औरंगाबाद चैम्बर ऑफ कॉमर्स की ओर से चैंबर्स के जिलाध्यक्ष एवं कार्यक्रम के कंवेनर मुकेश कुमार गुप्ता एवं जितेन्द्र कुमार गुप्ता सहित पुरी टीम लगी हुई है।
20 दिसंबर को नवी मुंबई में होगा जीकेसी का विराट कायस्थ महासम्मेलन
कायस्थ समाज की एकजुटता,सम्मान और सशक्तिकरण पर रहेगा जोर: रागिनी रंजन पटना : विश्व स्तरीय कायस्थ संगठन ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) की ओर से आगामी 20 दिसंबर 2026, रविवार को नवी मुंबई के खारघर स्थित सचिन तेंदुलकर स्पोर्ट्स ग्राउंड में विराट कायस्थ महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन का उद्देश्य कायस्थ समाज को एकजुट करना,सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देना तथा समाज की एकता, संगठन,सम्मान और सशक्तिकरण के संकल्प को मजबूत करना है। महासम्मेलन अपराह्न चार बजे से होगा।जीकेसी के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद और प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन के नेतृत्व में आयोजित महासम्मेलन में देश-विदेश से कायस्थ समाज के प्रतिनिधियों,सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजन को लेकर महाराष्ट्र प्रदेश के पदाधिकारी तैयारियों में जुटे हैं।जीकेसी की प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन ने कहा कि जीकेसी कायस्थ समाज को एक साझा मंच पर लाने तथा उसकी प्रतिभा,सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक योगदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विराट कायस्थ महासम्मेलन समाज के लोगों को आपस में जोड़ने,विचारों के आदान-प्रदान और सामूहिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर बनेगा। उन्होंने कायस्थ समाज के सभी बंधुओं एवं भगिनियों से महासम्मेलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकजुटता, संगठनात्मक क्षमता और आपसी सहयोग में निहित होती है। जीकेसी का प्रयास है कि समाज के लोगों को एक ऐसा मंच मिले,जहां वे अपनी प्रतिभा और क्षमताओं का उपयोग सामाजिक विकास के लिए कर सकें। महासम्मेलन के माध्यम से सामाजिक एकता को मजबूत करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा।जीकेसी के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद के नेतृत्व में आयोजित इस महासम्मेलन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आयोजन में ग्लोबल उपाध्यक्ष सह महाराष्ट्र प्रदेश संरक्षक कुमार शिशिर सिन्हा,ग्लोबल सीएफओ निश्का रंजन,कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के ग्लोबल अध्यक्ष अंजन श्रीवास्तव तथा कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के ग्लोबल महासचिव पवन सक्सेना सहित संगठन के विभिन्न पदाधिकारी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।महाराष्ट्र प्रदेश के संयोजक अनिल कुमार चंचल,प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष संजय कामता प्रसाद,प्रदेश महासचिव सुनील कुमार,आईटी सेल महाराष्ट्र के अध्यक्ष प्रभाकर मनीष, प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार श्रीवास्तव एवं नवीश कुमार श्रीवास्तव तथा कला-संस्कृति प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शालिनी बैरागी भी आयोजन की तैयारियों से जुड़े हैं।जीकेसी के राष्ट्रीय महासचिव एवं ग्लोबल अध्यक्ष-सीपीसीआई नवीन कुमार ने भी कायस्थ समाज के लोगों से महासम्मेलन में भाग लेकर इसे सफल बनाने की अपील की है।
देश की अर्थव्यवस्था की ताकत और समृद्धि का आधार है ‘अन्नदाता’: सीएम योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 के पश्चात कृषि क्षेत्र में आए अभूतपूर्व परिवर्तन से प्रदेशवासियों को कराया अवगत 80 लाख से अधिक किसानों से खरीदा गया 519 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान, ₹1,03,833 करोड़ से अधिक भुगतान: मुख्यमंत्री लखनऊ।* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 के बाद कृषि क्षेत्र में आए अभूतपूर्व परिवर्तन से प्रदेशवासियों को अवगत कराया। उन्होंने अन्नदाता किसान को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की ताकत और समृद्धि का आधार भी बताया। किसान को बीज से लेकर बाजार तक की सुविधामुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यशस्वी मार्गदर्शन में प्रदेश की डबल इंजन सरकार आज अन्नदाता किसान को बीज से लेकर बाजार तक की सुविधा उपलब्ध करा रही है। वर्ष 2017 से पहले जो अन्नदाता किसान कर्ज, बदहाली व लाचारी में डूबा रहता था और बिचौलियों के चक्कर लगाने को मजबूर था, आज वही अन्नदाता किसान कर्ज से मुक्त होकर उन्नत बीज, सिंचाई, और डीबीटी के माध्यम से एमएसपी एवं पीएम सम्मान निधि का लाभ ले रहा है। 8 से बढ़कर 18 प्रतिशत हुई कृषि विकास दरमुख्यमंत्री ने बताया कि दशकों से लटकी सिंचाई परियोजनाएं पूर्ण हुई हैं। प्रदेश, देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 प्रतिशत का योगदान कर रहा है। कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हुई है। दुग्ध, गन्ना, गेहूं आदि के उत्पादन में यूपी देश में प्रथम स्थान पर है। धान किसानों को किया गया ₹1,03,833 करोड़ से अधिक का भुगतानमुख्यमंत्री ने बताया कि अन्नदाता किसान की मेहनत का सम्मान एवं उसकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करते हुए वर्ष 2017 से मार्च 2026 के बीच प्रदेश में 80 लाख से अधिक किसानों से 519 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद की गई और ₹1,03,833 करोड़ से अधिक का सीधा भुगतान किया गया। उसी प्रतिबद्धता के साथ इस बार भी धान के समर्थन मूल्य में 71 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। किसान की खुशहाली सरकार की प्राथमिकतामुख्यमंत्री ने डबल इंजन सरकार के लिए अन्नदाता किसान को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की ताकत और समृद्धि का आधार बताया। उन्होंने कहा कि इसीलिए अन्नदाता किसान के अधिकार की रक्षा और उसकी खुशहाली हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
IRES 2026 के दूसरे दिन उमड़ा छात्रों और अभिभावकों का उत्साह, रूसी विश्वविद्यालयों ने पेश किए वैश्विक शिक्षा के अवसर
नई दिल्ली, भारत : द्वितीय इंडो-रशियन एजुकेशन समिट 2026 (IRES 2026) के दूसरे दिन छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अकादमिक काउंसलर्स की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। समिट के दौरान प्रतिभागियों को प्रमुख रूसी विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के अवसरों से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान किया गया।रूस एजुकेशन द्वारा Rossotrudnichestvo, भारत में रूसी संघ के दूतावास तथा रूसी हाउस, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस समिट के दूसरे दिन का मुख्य उद्देश्य छात्रों को रूसी विश्वविद्यालयों, अकादमिक विशेषज्ञों और शिक्षा जगत के नेताओं से जोड़ना था।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “रूसी विश्वविद्यालय प्रदर्शनी” रही, जिसमें 100 से अधिक विश्वविद्यालयों और 200 से अधिक विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस प्रदर्शनी ने छात्रों और अभिभावकों को विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों से सीधे संवाद करने तथा शैक्षणिक पाठ्यक्रमों, प्रवेश प्रक्रिया, छात्रवृत्ति, आवास सुविधाओं, वीज़ा सहायता, छात्र जीवन और भविष्य के करियर अवसरों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने का मंच प्रदान किया।प्रदर्शनी में मेडिसिन, डेंटिस्ट्री, इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, एविएशन, सूचना प्रौद्योगिकी, मैनेजमेंट, कृषि, वेटरिनरी साइंसेज, बायोटेक्नोलॉजी, ह्यूमैनिटीज, इंटरनेशनल रिलेशंस और रूसी भाषा अध्ययन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को प्रदर्शित किया गया।पूरे दिन के दौरान 1,500 से अधिक छात्रों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों और शिक्षा विशेषज्ञों के साथ व्यक्तिगत काउंसलिंग सत्रों और इंटरैक्टिव चर्चाओं में भाग लिया। इन चर्चाओं के माध्यम से छात्रों को विभिन्न विश्वविद्यालयों की तुलना करने, पात्रता मानदंड समझने, छात्रवृत्ति के अवसरों की जानकारी प्राप्त करने और अपने शैक्षणिक भविष्य के लिए व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने रूस में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाया।अभिभावकों ने भी विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों से सक्रिय रूप से संवाद कर छात्र सहायता सेवाओं, कैंपस सुविधाओं, आवास व्यवस्था, सुरक्षा उपायों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए उपलब्ध करियर अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की। समिट के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रमुख रूसी विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रियाएँ प्रारंभ एवं पूर्ण कीं, जिससे यह कार्यक्रम शैक्षणिक निर्णय और भविष्य के अवसरों के लिए अत्यंत उपयोगी मंच साबित हुआ।छात्र सहभागिता के अलावा, समिट ने भारतीय और रूसी शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने हेतु संस्थागत चर्चाओं और अकादमिक संवाद को भी बढ़ावा दिया। प्रतिनिधियों ने अकादमिक एक्सचेंज, रिसर्च सहयोग, छात्र गतिशीलता और भविष्य की शैक्षणिक साझेदारियों पर विचार-विमर्श किया।समिट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए रूस एजुकेशन के टेक्निकल एडवाइज़र एयर मार्शल (डॉ.) पवन कपूर (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारत और रूस के बीच 70 वर्षों से अधिक समय से विश्वासपूर्ण साझेदारी रही है, जो रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर आधारित है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक सहयोग छात्रों के लिए सार्थक अवसर उत्पन्न कर रहा है और यह द्विपक्षीय संबंधों के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है।भारत में Rossotrudnichestvo के प्रतिनिधि कार्यालय की प्रमुख डॉ. एलेना रेमिज़ोवा ने समिट में भाग लेने वाले भारतीय और रूसी विश्वविद्यालयों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भारत और रूस के बीच मजबूत सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस भारतीय छात्रों के लिए विविध शैक्षणिक और शोध अवसर उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि IRES जैसी पहलें शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ छात्रों के विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय करियर के नए मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। मारी स्टेट यूनिवर्सिटी के रेक्टर प्रो. मिखाइल एन. श्वेत्सोव ने कहा कि रूसी विश्वविद्यालय भारतीय छात्रों का स्वागत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक अवसंरचना, शोध अवसरों और सहयोगपूर्ण शिक्षण वातावरण के माध्यम से लगातार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंडो-रशियन एजुकेशन समिट जैसी पहलें छात्रों को विश्वविद्यालयों से सीधे जोड़ती हैं और उन्हें अपने शैक्षणिक भविष्य के संबंध में सूचित निर्णय लेने में सहायता करती हैं।समिट के दूसरे दिन ने छात्र-विश्वविद्यालय संवाद के महत्व को पुनः स्थापित किया और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के अवसरों की बढ़ती मांग को उजागर किया। छात्रों, अभिभावकों, विश्वविद्यालयों और शिक्षा विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर IRES 2026 ने शैक्षणिक खोज, सूचित निर्णय और सार्थक अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए एक सशक्त वातावरण तैयार किया।रूस एजुकेशन भारत की विश्वसनीय शिक्षा परामर्श संस्थाओं में से एक है, जिसके पास रूसी संघ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक छात्रों का मार्गदर्शन करने का 33 वर्षों से अधिक का अनुभव है। विश्वविद्यालय साझेदारियों, प्रवेश मार्गदर्शन, छात्र सहायता सेवाओं और विभिन्न अकादमिक पहलों के माध्यम से रूस एजुकेशन गुणवत्तापूर्ण अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देने और भारत-रूस शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
अवधूत परम्परा : सेवा, करुणा और मानव गरिमा का जीवंत संदेश
नई दिल्ली: भारतीय सनातन परम्परा में “अवधूत” धारा आध्यात्मिक साधना, करुणा और निःस्वार्थ सेवा का अद्वितीय संगम मानी जाती है। यह परम्परा केवल व्यक्तिगत मोक्ष या साधना तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज के उपेक्षित, पीड़ित और वंचित वर्गों को सम्मानपूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए समर्पित रही है। अवधूत परम्परा का उद्भव भगवान दत्तात्रेय की अद्वैत चेतना से माना जाता है, जिसे आगे बाबा कीनाराम ने अघोर दर्शन के माध्यम से सामाजिक चेतना से जोड़ा। बाद में अवधूत भगवान राम ने इसे व्यापक मानव सेवा आन्दोलन का स्वरूप प्रदान किया। आज यह परम्परा उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कुष्ठ सेवा, आदिवासी उत्थान और मानव गरिमा की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। “अवधूत” का अर्थ है ऐसा साधक जिसने मोह, भय, घृणा, लोभ और सामाजिक भेदभाव का त्याग कर दिया हो। इस परम्परा का मूल संदेश है — “मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है।” अवधूत साधक सम्पूर्ण सृष्टि को एक परिवार मानता है और हर प्राणी में परमात्मा का स्वरूप देखता है। इस परम्परा के दार्शनिक आधार में भगवान दत्तात्रेय का विशेष स्थान है, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का संयुक्त स्वरूप माना जाता है। उन्होंने यह शिक्षा दी कि वास्तविक ज्ञान केवल ग्रंथों से नहीं, बल्कि जीवन, प्रकृति और अनुभवों से प्राप्त होता है। 20वीं शताब्दी में अवधूत भगवान राम ने इस परम्परा को नई दिशा देते हुए आध्यात्मिकता को प्रत्यक्ष मानव सेवा से जोड़ा। उन्होंने विशेष रूप से कुष्ठ रोगियों, आदिवासियों, दलितों और समाज से बहिष्कृत वर्गों के बीच कार्य किया। उस समय कुष्ठ रोगियों को सामाजिक बहिष्कार और अपमान का सामना करना पड़ता था, लेकिन अवधूत भगवान राम ने उन्हें अपनाकर मानवता और करुणा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। वाराणसी स्थित “अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम” इस सेवा भावना का विश्वस्तरीय उदाहरण है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज जानकारी के अनुसार, आश्रम ने 99,045 पूर्ण कुष्ठ रोगियों तथा 1,47,503 आंशिक कुष्ठ रोगियों का उपचार कर मानव सेवा का ऐतिहासिक कार्य किया है। आश्रम की विशेषता केवल चिकित्सा सेवा तक सीमित नहीं रही, बल्कि रोगियों को सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता से जोड़ने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भोजन, वस्त्र, आश्रय और उपचार के साथ सामुदायिक जीवन, श्रम, प्रार्थना और ध्यान के माध्यम से रोगियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया। अवधूत परम्परा की सेवा गतिविधियाँ वाराणसी तक सीमित नहीं हैं। बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर, निःशुल्क दवा वितरण, शिक्षा, छात्रावास और संस्कार केन्द्रों के माध्यम से हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया गया है। आज जब समाज भौतिक प्रगति के बावजूद संवेदनहीनता, अकेलेपन और विभाजन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब अवधूत परम्परा का संदेश अत्यंत प्रासंगिक हो उठता है। यह परम्परा हमें याद दिलाती है कि वास्तविक आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि पीड़ित मानवता के जीवन में सम्मान, आशा और आत्मविश्वास जगाने में निहित है। भगवान दत्तात्रेय से बाबा कीनाराम, अवधूत भगवान राम और परमपूज्य श्री प्रियदर्शी राम तक प्रवाहित यह करुणामयी धारा भारतीय संस्कृति की जीवंत आत्मा है, जो आज भी समाज को मानव सेवा और करुणा का मार्ग दिखा रही है।
रणवीर सिंह को घंटा बैन कर पाएगी बॉलीवुडविवाद और बॉलीवुड बहिष्कार की बहस : क्या इंडस्ट्री में विचारधारा की जंग शुरू हो चुकी है?
बॉलीवुड में अभिनेता Ranveer Singh को लेकर उठे विवाद ने फिल्म इंडस्ट्री के अंदर चल रही कथित गुटबाजी, वैचारिक संघर्ष और “बॉलीवुड बहिष्कार” की बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। सोशल मीडिया पर यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर रणवीर सिंह के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है, जबकि इससे पहले कई बड़े सितारे शूटिंग के बीच फिल्में छोड़ चुके हैं और तब इंडस्ट्री ने उतनी कठोर प्रतिक्रिया नहीं दी थी। उदाहरण के तौर पर Aishwarya Rai Bachchan ने मधुर भंडारकर की फिल्म हीरोइन की शूटिंग बीच में छोड़ दी थी। उस समय खबरें आई थीं कि निर्देशक Madhur Bhandarkar मानसिक तनाव और डिप्रेशन तक में चले गए थे, क्योंकि फिल्म पर भारी निवेश हो चुका था। बाद में फिल्म में Kareena Kapoor Khan को लिया गया और प्रोजेक्ट पूरा हुआ। इसी तरह Abhishek Bachchan ने J. P. Dutta की फिल्म पलटन तब छोड़ी थी जब यूनिट लद्दाख पहुंच चुकी थी और शूटिंग शुरू होने वाली थी। इन दोनों मामलों में निर्माताओं को आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन किसी कलाकार के खिलाफ सार्वजनिक “बॉयकॉट” या इंडस्ट्री बैन जैसा माहौल नहीं बनाया गया। यहीं से रणवीर सिंह का मामला अलग दिखाई देता है। चर्चा यह है कि डॉन 3 को लेकर हुए विवाद के बाद निर्माता Farhan Akhtar और Ritesh Sidhwani की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट ने कड़ा रुख अपनाया। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी बैन की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे “सॉफ्ट बॉयकॉट” और “इंडस्ट्री दबाव” की तरह पेश किया जा रहा है। इस पूरे विवाद को केवल प्रोफेशनल मतभेद तक सीमित नहीं माना जा रहा। दरअसल हाल के महीनों में रणवीर सिंह की सार्वजनिक छवि में बड़ा बदलाव देखने को मिला। वे नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय पहुंचे, संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी और संघ प्रमुख Mohan Bhagwat से मुलाकात की। इसके अलावा वे मंदिरों में दर्शन करते, माथे पर त्रिपुंड लगाए और भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर उनके इस बदले हुए अंदाज को लेकर समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों का मानना है कि बॉलीवुड का एक वर्ग अब भी एक खास वैचारिक ढांचे में काम करता है और जो कलाकार उस ढांचे से अलग जाते दिखाई देते हैं, उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। लेखिका Shobhaa De सहित कई टिप्पणीकारों ने भी समय-समय पर बॉलीवुड में बदलते वैचारिक माहौल को लेकर चिंता जताई है। वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे केवल सोशल मीडिया की बनाई कहानी बताते हैं और कहते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री हमेशा से व्यावसायिक हितों के आधार पर फैसले लेती रही है। पिछले कुछ वर्षों में “बॉलीवुड बहिष्कार” अभियान ने इंडस्ट्री को आर्थिक और मानसिक दोनों स्तर पर प्रभावित किया है। कई फिल्मों को सोशल मीडिया ट्रेंड्स के कारण नुकसान झेलना पड़ा। उस समय बॉलीवुड से जुड़े कई कलाकारों ने कहा था कि संगठित बहिष्कार की राजनीति फिल्म उद्योग के लिए खतरनाक है। लेकिन अब रणवीर सिंह विवाद के बाद सोशल मीडिया पर उल्टा सवाल पूछा जा रहा है कि यदि दर्शकों का बहिष्कार गलत था, तो किसी कलाकार को इंडस्ट्री के भीतर अलग-थलग करना कैसे सही माना जा सकता है? असल में यह विवाद केवल एक अभिनेता या एक फिल्म तक सीमित नहीं रह गया है। यह उस बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है, जहां बॉलीवुड अब केवल मनोरंजन उद्योग नहीं बल्कि विचारधारा, छवि निर्माण और सार्वजनिक राजनीति का अखाड़ा बन चुका है। दर्शक भी अब फिल्मों को केवल कहानी और अभिनय के आधार पर नहीं देखते, बल्कि कलाकारों की व्यक्तिगत विचारधारा, सामाजिक छवि और राजनीतिक झुकाव पर भी प्रतिक्रिया देते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बॉलीवुड बदलते सामाजिक और राजनीतिक माहौल के साथ खुद को किस तरह ढालता है। क्योंकि अब दर्शक भी पहले जैसे नहीं रहे और सितारों की चमक पर सवाल पूछने लगे हैं।