IRES 2026 के दूसरे दिन उमड़ा छात्रों और अभिभावकों का उत्साह, रूसी विश्वविद्यालयों ने पेश किए वैश्विक शिक्षा के अवसर
नई दिल्ली, भारत : द्वितीय इंडो-रशियन एजुकेशन समिट 2026 (IRES 2026) के दूसरे दिन छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अकादमिक काउंसलर्स की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। समिट के दौरान प्रतिभागियों को प्रमुख रूसी विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के अवसरों से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान किया गया।रूस एजुकेशन द्वारा Rossotrudnichestvo, भारत में रूसी संघ के दूतावास तथा रूसी हाउस, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस समिट के दूसरे दिन का मुख्य उद्देश्य छात्रों को रूसी विश्वविद्यालयों, अकादमिक विशेषज्ञों और शिक्षा जगत के नेताओं से जोड़ना था।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “रूसी विश्वविद्यालय प्रदर्शनी” रही, जिसमें 100 से अधिक विश्वविद्यालयों और 200 से अधिक विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस प्रदर्शनी ने छात्रों और अभिभावकों को विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों से सीधे संवाद करने तथा शैक्षणिक पाठ्यक्रमों, प्रवेश प्रक्रिया, छात्रवृत्ति, आवास सुविधाओं, वीज़ा सहायता, छात्र जीवन और भविष्य के करियर अवसरों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने का मंच प्रदान किया।प्रदर्शनी में मेडिसिन, डेंटिस्ट्री, इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, एविएशन, सूचना प्रौद्योगिकी, मैनेजमेंट, कृषि, वेटरिनरी साइंसेज, बायोटेक्नोलॉजी, ह्यूमैनिटीज, इंटरनेशनल रिलेशंस और रूसी भाषा अध्ययन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को प्रदर्शित किया गया।पूरे दिन के दौरान 1,500 से अधिक छात्रों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों और शिक्षा विशेषज्ञों के साथ व्यक्तिगत काउंसलिंग सत्रों और इंटरैक्टिव चर्चाओं में भाग लिया। इन चर्चाओं के माध्यम से छात्रों को विभिन्न विश्वविद्यालयों की तुलना करने, पात्रता मानदंड समझने, छात्रवृत्ति के अवसरों की जानकारी प्राप्त करने और अपने शैक्षणिक भविष्य के लिए व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने रूस में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाया।अभिभावकों ने भी विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों से सक्रिय रूप से संवाद कर छात्र सहायता सेवाओं, कैंपस सुविधाओं, आवास व्यवस्था, सुरक्षा उपायों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए उपलब्ध करियर अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की। समिट के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रमुख रूसी विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रियाएँ प्रारंभ एवं पूर्ण कीं, जिससे यह कार्यक्रम शैक्षणिक निर्णय और भविष्य के अवसरों के लिए अत्यंत उपयोगी मंच साबित हुआ।छात्र सहभागिता के अलावा, समिट ने भारतीय और रूसी शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने हेतु संस्थागत चर्चाओं और अकादमिक संवाद को भी बढ़ावा दिया। प्रतिनिधियों ने अकादमिक एक्सचेंज, रिसर्च सहयोग, छात्र गतिशीलता और भविष्य की शैक्षणिक साझेदारियों पर विचार-विमर्श किया।समिट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए रूस एजुकेशन के टेक्निकल एडवाइज़र एयर मार्शल (डॉ.) पवन कपूर (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारत और रूस के बीच 70 वर्षों से अधिक समय से विश्वासपूर्ण साझेदारी रही है, जो रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर आधारित है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक सहयोग छात्रों के लिए सार्थक अवसर उत्पन्न कर रहा है और यह द्विपक्षीय संबंधों के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है।भारत में Rossotrudnichestvo के प्रतिनिधि कार्यालय की प्रमुख डॉ. एलेना रेमिज़ोवा ने समिट में भाग लेने वाले भारतीय और रूसी विश्वविद्यालयों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भारत और रूस के बीच मजबूत सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस भारतीय छात्रों के लिए विविध शैक्षणिक और शोध अवसर उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि IRES जैसी पहलें शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ छात्रों के विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय करियर के नए मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। मारी स्टेट यूनिवर्सिटी के रेक्टर प्रो. मिखाइल एन. श्वेत्सोव ने कहा कि रूसी विश्वविद्यालय भारतीय छात्रों का स्वागत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक अवसंरचना, शोध अवसरों और सहयोगपूर्ण शिक्षण वातावरण के माध्यम से लगातार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंडो-रशियन एजुकेशन समिट जैसी पहलें छात्रों को विश्वविद्यालयों से सीधे जोड़ती हैं और उन्हें अपने शैक्षणिक भविष्य के संबंध में सूचित निर्णय लेने में सहायता करती हैं।समिट के दूसरे दिन ने छात्र-विश्वविद्यालय संवाद के महत्व को पुनः स्थापित किया और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के अवसरों की बढ़ती मांग को उजागर किया। छात्रों, अभिभावकों, विश्वविद्यालयों और शिक्षा विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर IRES 2026 ने शैक्षणिक खोज, सूचित निर्णय और सार्थक अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए एक सशक्त वातावरण तैयार किया।रूस एजुकेशन भारत की विश्वसनीय शिक्षा परामर्श संस्थाओं में से एक है, जिसके पास रूसी संघ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक छात्रों का मार्गदर्शन करने का 33 वर्षों से अधिक का अनुभव है। विश्वविद्यालय साझेदारियों, प्रवेश मार्गदर्शन, छात्र सहायता सेवाओं और विभिन्न अकादमिक पहलों के माध्यम से रूस एजुकेशन गुणवत्तापूर्ण अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देने और भारत-रूस शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
अवधूत परम्परा : सेवा, करुणा और मानव गरिमा का जीवंत संदेश
नई दिल्ली: भारतीय सनातन परम्परा में “अवधूत” धारा आध्यात्मिक साधना, करुणा और निःस्वार्थ सेवा का अद्वितीय संगम मानी जाती है। यह परम्परा केवल व्यक्तिगत मोक्ष या साधना तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज के उपेक्षित, पीड़ित और वंचित वर्गों को सम्मानपूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए समर्पित रही है। अवधूत परम्परा का उद्भव भगवान दत्तात्रेय की अद्वैत चेतना से माना जाता है, जिसे आगे बाबा कीनाराम ने अघोर दर्शन के माध्यम से सामाजिक चेतना से जोड़ा। बाद में अवधूत भगवान राम ने इसे व्यापक मानव सेवा आन्दोलन का स्वरूप प्रदान किया। आज यह परम्परा उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कुष्ठ सेवा, आदिवासी उत्थान और मानव गरिमा की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। “अवधूत” का अर्थ है ऐसा साधक जिसने मोह, भय, घृणा, लोभ और सामाजिक भेदभाव का त्याग कर दिया हो। इस परम्परा का मूल संदेश है — “मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है।” अवधूत साधक सम्पूर्ण सृष्टि को एक परिवार मानता है और हर प्राणी में परमात्मा का स्वरूप देखता है। इस परम्परा के दार्शनिक आधार में भगवान दत्तात्रेय का विशेष स्थान है, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का संयुक्त स्वरूप माना जाता है। उन्होंने यह शिक्षा दी कि वास्तविक ज्ञान केवल ग्रंथों से नहीं, बल्कि जीवन, प्रकृति और अनुभवों से प्राप्त होता है। 20वीं शताब्दी में अवधूत भगवान राम ने इस परम्परा को नई दिशा देते हुए आध्यात्मिकता को प्रत्यक्ष मानव सेवा से जोड़ा। उन्होंने विशेष रूप से कुष्ठ रोगियों, आदिवासियों, दलितों और समाज से बहिष्कृत वर्गों के बीच कार्य किया। उस समय कुष्ठ रोगियों को सामाजिक बहिष्कार और अपमान का सामना करना पड़ता था, लेकिन अवधूत भगवान राम ने उन्हें अपनाकर मानवता और करुणा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। वाराणसी स्थित “अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम” इस सेवा भावना का विश्वस्तरीय उदाहरण है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज जानकारी के अनुसार, आश्रम ने 99,045 पूर्ण कुष्ठ रोगियों तथा 1,47,503 आंशिक कुष्ठ रोगियों का उपचार कर मानव सेवा का ऐतिहासिक कार्य किया है। आश्रम की विशेषता केवल चिकित्सा सेवा तक सीमित नहीं रही, बल्कि रोगियों को सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता से जोड़ने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भोजन, वस्त्र, आश्रय और उपचार के साथ सामुदायिक जीवन, श्रम, प्रार्थना और ध्यान के माध्यम से रोगियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया। अवधूत परम्परा की सेवा गतिविधियाँ वाराणसी तक सीमित नहीं हैं। बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर, निःशुल्क दवा वितरण, शिक्षा, छात्रावास और संस्कार केन्द्रों के माध्यम से हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया गया है। आज जब समाज भौतिक प्रगति के बावजूद संवेदनहीनता, अकेलेपन और विभाजन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब अवधूत परम्परा का संदेश अत्यंत प्रासंगिक हो उठता है। यह परम्परा हमें याद दिलाती है कि वास्तविक आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि पीड़ित मानवता के जीवन में सम्मान, आशा और आत्मविश्वास जगाने में निहित है। भगवान दत्तात्रेय से बाबा कीनाराम, अवधूत भगवान राम और परमपूज्य श्री प्रियदर्शी राम तक प्रवाहित यह करुणामयी धारा भारतीय संस्कृति की जीवंत आत्मा है, जो आज भी समाज को मानव सेवा और करुणा का मार्ग दिखा रही है।
रणवीर सिंह को घंटा बैन कर पाएगी बॉलीवुडविवाद और बॉलीवुड बहिष्कार की बहस : क्या इंडस्ट्री में विचारधारा की जंग शुरू हो चुकी है?
बॉलीवुड में अभिनेता Ranveer Singh को लेकर उठे विवाद ने फिल्म इंडस्ट्री के अंदर चल रही कथित गुटबाजी, वैचारिक संघर्ष और “बॉलीवुड बहिष्कार” की बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। सोशल मीडिया पर यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर रणवीर सिंह के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है, जबकि इससे पहले कई बड़े सितारे शूटिंग के बीच फिल्में छोड़ चुके हैं और तब इंडस्ट्री ने उतनी कठोर प्रतिक्रिया नहीं दी थी। उदाहरण के तौर पर Aishwarya Rai Bachchan ने मधुर भंडारकर की फिल्म हीरोइन की शूटिंग बीच में छोड़ दी थी। उस समय खबरें आई थीं कि निर्देशक Madhur Bhandarkar मानसिक तनाव और डिप्रेशन तक में चले गए थे, क्योंकि फिल्म पर भारी निवेश हो चुका था। बाद में फिल्म में Kareena Kapoor Khan को लिया गया और प्रोजेक्ट पूरा हुआ। इसी तरह Abhishek Bachchan ने J. P. Dutta की फिल्म पलटन तब छोड़ी थी जब यूनिट लद्दाख पहुंच चुकी थी और शूटिंग शुरू होने वाली थी। इन दोनों मामलों में निर्माताओं को आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन किसी कलाकार के खिलाफ सार्वजनिक “बॉयकॉट” या इंडस्ट्री बैन जैसा माहौल नहीं बनाया गया। यहीं से रणवीर सिंह का मामला अलग दिखाई देता है। चर्चा यह है कि डॉन 3 को लेकर हुए विवाद के बाद निर्माता Farhan Akhtar और Ritesh Sidhwani की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट ने कड़ा रुख अपनाया। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी बैन की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे “सॉफ्ट बॉयकॉट” और “इंडस्ट्री दबाव” की तरह पेश किया जा रहा है। इस पूरे विवाद को केवल प्रोफेशनल मतभेद तक सीमित नहीं माना जा रहा। दरअसल हाल के महीनों में रणवीर सिंह की सार्वजनिक छवि में बड़ा बदलाव देखने को मिला। वे नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय पहुंचे, संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी और संघ प्रमुख Mohan Bhagwat से मुलाकात की। इसके अलावा वे मंदिरों में दर्शन करते, माथे पर त्रिपुंड लगाए और भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर उनके इस बदले हुए अंदाज को लेकर समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों का मानना है कि बॉलीवुड का एक वर्ग अब भी एक खास वैचारिक ढांचे में काम करता है और जो कलाकार उस ढांचे से अलग जाते दिखाई देते हैं, उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। लेखिका Shobhaa De सहित कई टिप्पणीकारों ने भी समय-समय पर बॉलीवुड में बदलते वैचारिक माहौल को लेकर चिंता जताई है। वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे केवल सोशल मीडिया की बनाई कहानी बताते हैं और कहते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री हमेशा से व्यावसायिक हितों के आधार पर फैसले लेती रही है। पिछले कुछ वर्षों में “बॉलीवुड बहिष्कार” अभियान ने इंडस्ट्री को आर्थिक और मानसिक दोनों स्तर पर प्रभावित किया है। कई फिल्मों को सोशल मीडिया ट्रेंड्स के कारण नुकसान झेलना पड़ा। उस समय बॉलीवुड से जुड़े कई कलाकारों ने कहा था कि संगठित बहिष्कार की राजनीति फिल्म उद्योग के लिए खतरनाक है। लेकिन अब रणवीर सिंह विवाद के बाद सोशल मीडिया पर उल्टा सवाल पूछा जा रहा है कि यदि दर्शकों का बहिष्कार गलत था, तो किसी कलाकार को इंडस्ट्री के भीतर अलग-थलग करना कैसे सही माना जा सकता है? असल में यह विवाद केवल एक अभिनेता या एक फिल्म तक सीमित नहीं रह गया है। यह उस बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है, जहां बॉलीवुड अब केवल मनोरंजन उद्योग नहीं बल्कि विचारधारा, छवि निर्माण और सार्वजनिक राजनीति का अखाड़ा बन चुका है। दर्शक भी अब फिल्मों को केवल कहानी और अभिनय के आधार पर नहीं देखते, बल्कि कलाकारों की व्यक्तिगत विचारधारा, सामाजिक छवि और राजनीतिक झुकाव पर भी प्रतिक्रिया देते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बॉलीवुड बदलते सामाजिक और राजनीतिक माहौल के साथ खुद को किस तरह ढालता है। क्योंकि अब दर्शक भी पहले जैसे नहीं रहे और सितारों की चमक पर सवाल पूछने लगे हैं।
भारत में महिला-नेतृत्व विकास- सशक्तिकरण से नेतृत्व तक
सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही नई दिल्ली। भारत में महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र, शिक्षित और समान अधिकार संपन्न बनाना है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुद्रा योजना और महिला आरक्षण जैसे प्रयासों से निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ी है। हालांकि, पितृसत्तात्मक सोच और सुरक्षा चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, लेकिन शिक्षा व कानूनी सुधारों से बदलाव आ रहा है।भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की सोच अब एक व्यापक और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण में विकसित हो चुकी है, जहाँ जन्म से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और नेतृत्व तक महिलाओं की आवश्यकताओं को समग्र रूप से संबोधित किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएँ अब केवल कल्याण तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही हैं। यह बदलाव “वेलफेयर” से “एम्पावरमेंट” और अब “वूमेन-लेड डेवलपमेंट” की ओर भारत की विकास यात्रा को दर्शाता है।स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में मिशन पोषण 2.0, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी पहलों ने महत्वपूर्ण सुधार सुनिश्चित किए हैं। वर्ष 2017 से फरवरी 2026 तक प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत लगभग 4.27 करोड़ महिलाओं को 20,101 करोड़ रूपये की सशर्त सहायता प्रदान की गई है। वहीं, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 7.26 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की गई है। देशभर में 14.03 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 8.97 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पोषण सेवाएँ पहुँच रही हैं, जबकि मिशन इंद्रधनुष के प्रभाव से बाल मृत्यु दर 48 से घटकर 28 और नवजात मृत्यु दर 28 से घटकर 17 हो गई है।“पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम के तहत 8.55 लाख कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है तथा सक्षम आंगनवाड़ी योजना के माध्यम से 1.03 लाख केंद्रों को उन्नत किया जा चुका है। वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है।प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत 57.93 करोड़ खातों में से 32.29 करोड़ खाते महिलाओं के नाम हैं, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वितरित कुल ऋणों में लगभग 68 प्रतिशत महिलाओं को दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि 14.72 लाख करोड़ रूपये से अधिक है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत स्वीकृत ऋणों में 83 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं, जिनकी राशि 47,704 करोड़ रूपये से अधिक है।दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 10.05 करोड़ महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं, जबकि “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से 3.07 करोड़ महिलाएँ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हुई हैं। “नमो ड्रोन दीदी योजना” के तहत 1,094 ड्रोन वितरित कर महिलाओं को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है।दैनिक जीवन में गरिमा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने व्यापक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 2.90 करोड़ से अधिक घर महिलाओं के नाम आवंटित किए गए हैं, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है। उज्ज्वला योजना के तहत 10.5 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे महिलाओं को धुएँ से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ मिला है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12.11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है, जिससे महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। जल जीवन मिशन के माध्यम से 15.83 करोड़ से अधिक घरों तक नल जल की सुविधा पहुँचाई गई है, जिससे महिलाओं के दैनिक श्रम में उल्लेखनीय कमी आई है।शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय जैसी पहलों ने सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित किया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के परिणामस्वरूप जन्म के समय लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हो गया है। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं, जिनमें 3.40 लाख करोड़ रूपये से अधिक की राशि जमा है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के 5,316 स्कूलों में 7.58 लाख से अधिक छात्राएँ अध्ययनरत हैं। उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 30.2 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जबकि पीएचडी में महिलाओं के नामांकन में 135.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। । AICTE प्रगति योजना के तहत 35,998 छात्राएँ लाभान्वित हुई हैं तथा विज्ञान ज्योति योजना से 80,000 से अधिक छात्राओं को प्रोत्साहन मिला है।महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा के लिए मिशन शक्ति के अंतर्गत “सम्बल” और “समर्थ्य” दो स्तंभों पर कार्य किया जा रहा है। वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 926 तक पहुँच चुकी है, जहाँ 13.90 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। महिला हेल्पलाइन (181 और 112) के माध्यम से 99.09 लाख महिलाओं को सहयोग मिला है। SHe-Box पोर्टल से 1.63 लाख कार्यस्थल जुड़े हैं, जिससे कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। वहीं “समर्थ्य” घटक के अंतर्गत 416 शक्ति सदन और 531 सखी निवास संचालित किए जा रहे हैं, जो महिलाओं को सुरक्षित आश्रय और पुनर्वास प्रदान कर रहे हैं।अंततः भारत में महिला सशक्तिकरण अब केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का आधार बन चुका है।
OK मॉडल स्कूल, उत्तम नगर में शनाया शर्मा और अजय हुड्डा को ‘सेलिब्रिटी गेस्ट’ के रूप में सम्मान
यह सम्मान समाज में उनके उल्लेखनीय योगदान और प्रेरणादायक कार्यों के लिए प्रदान किया गया। नई दिल्ली। OK मॉडल स्कूल में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान अभिनेत्री, मॉडल एवं सामाजिक कार्यकर्ता शनाया शर्मा तथा हरियाणवी गायक अजय हुड्डा को ‘सेलिब्रिटी गेस्ट’ के रूप में सम्मानित किया गया। यह सम्मान समाज में उनके उल्लेखनीय योगदान और प्रेरणादायक कार्यों के लिए प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान शनाया शर्मा ने अपने संबोधन में स्कूल प्रबंधन का आभार जताते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि OK मॉडल स्कूल जैसी संस्थाएं शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी मजबूत करने का कार्य कर रही हैं, जो सराहनीय है। उन्होंने स्कूल द्वारा सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे मंच युवाओं को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, उन्होंने अपने परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों के समर्थन को अपनी सफलता का आधार बताया। इस अवसर पर अजय हुड्डा की उपस्थिति ने भी कार्यक्रम में उत्साह का संचार किया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सहयोग, शिक्षा के महत्व और युवा पीढ़ी को प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया गया। स्कूल प्रशासन ने बताया कि इस तरह के आयोजन छात्रों को प्रेरित करने और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों को समझाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
दिल्ली बजट से एमसीडी को बड़ी राहत: ₹11,266 करोड़ फंड से विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार: सत्या शर्मा
स्थायी समिति अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा ने मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता का किया का किया आभार व्यक्त नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को ₹11,266 करोड़ से अधिक का फंड देने के फैसले का स्थायी समिति अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने इस बजट को जनहित और विकास पर केंद्रित बताते हुए कहा कि यह राजधानी के समग्र विकास को नई दिशा देगा। सत्या शर्मा ने कहा कि निगम को मिला यह वित्तीय सहयोग उसकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा और लंबे समय से लंबित देनदारियों को कम करने में मददगार साबित होगा। इससे एमसीडी अपने दायित्वों का निर्वहन अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेगा और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने बताया कि इस फंड से स्वच्छता, सड़कों के रखरखाव, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार आएगा। साथ ही, विभिन्न क्षेत्रों में चल रही विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और नई योजनाओं को लागू करने में भी गति मिलेगी। सत्या शर्मा ने बजट में सड़कों के निर्माण के लिए किए गए ₹1000 करोड़ के प्रावधान को भी सराहनीय बताया। उनके अनुसार, इससे सड़क व्यवस्था बेहतर होगी, यातायात सुगम बनेगा और धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि एमसीडी के सहयोग से 5 नई आधुनिक पार्किंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे शहर में पार्किंग की समस्या को कम किया जा सकेगा और यातायात व्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने बजट में 1000 स्मार्ट टॉयलेट बनाने की घोषणा को भी अहम कदम बताया। उनके अनुसार, इससे स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी, नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और खुले में शौच जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। अंत में सत्या शर्मा ने कहा कि यह बजट दिल्ली के बुनियादी ढांचे, स्वच्छता और विकास को मजबूत करने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से राजधानी को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और आधुनिक शहर बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
जनहित के मुद्दों पर अनावश्यक राजनीति कर रही है आप: सत्या शर्मा
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने आम आदमी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह जनहित से जुड़े अहम मुद्दों पर भी अनावश्यक राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज इस मामले को बेवजह राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। सत्या शर्मा ने स्पष्ट किया कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने स्थित पार्किंग क्षेत्र में संदिग्ध और अवैध गतिविधियों का खुलासा पूरी तरह जनता की सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा मामला है, न कि राजनीति का। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए यह मुद्दा उठाया, लेकिन आम आदमी पार्टी इसे भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे यह साफ होता है कि आम आदमी पार्टी हर गंभीर विषय को भी राजनीतिक नजरिए से देखने की आदी हो चुकी है। सत्या शर्मा ने सौरभ भारद्वाज को सलाह दी कि वे बयानबाजी के बजाय दिल्ली की जनता के हित में सकारात्मक कार्यों पर ध्यान दें। उन्होंने दावा किया कि भाजपा हमेशा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देती रही है और अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाना उसका दायित्व है। चांदनी चौक क्षेत्र में किए गए निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताओं और संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा हुआ है, जो प्रशासनिक सख्ती की आवश्यकता को दर्शाता है। सत्या शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी को इन कार्रवाइयों से असहजता हो रही है, जिससे यह सवाल उठता है कि कहीं इन गतिविधियों से उसके कुछ नेताओं के संबंध तो नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए भी आम आदमी पार्टी ने जनता के हितों की अनदेखी की और अब विपक्ष में आने के बाद भी उसका रवैया नहीं बदला है। उनके अनुसार, पार्टी के शासनकाल में दिल्ली में भ्रष्टाचार चरम पर था, जिससे आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। आगे उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बेबुनियाद आरोप लगाते हैं। यदि पार्टी इसी तरह केवल राजनीतिक बयानबाजी में उलझी रही, तो आगामी चुनावों में उसका जनाधार और कमजोर होगा। सत्या शर्मा ने दावा किया कि दिल्ली की जनता पहले ही आम आदमी पार्टी की कार्यशैली से निराश होकर उसे सत्ता से बाहर कर चुकी है और एमसीडी में भी उसके कई पार्षद पार्टी छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की निष्क्रियता और कमजोर कार्यप्रणाली के कारण उसका जनाधार लगातार घट रहा है। पंजाब, गोवा और गुजरात जैसे राज्यों में भी पार्टी की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। अंत में सत्या शर्मा ने कहा कि भाजपा दिल्ली के समग्र विकास, पारदर्शी प्रशासन और जनकल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि आम आदमी पार्टी आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में उलझी हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में दिल्ली की जनता भाजपा के विकास कार्यों पर फिर से भरोसा जताएगी।
चांदनी चौक में स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा का औचक निरीक्षण, अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
निरीक्षण के दौरान अध्यक्ष ने दंगल मैदान पार्किंग और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने स्थित क्लब पार्किंग का जायजा लिया। नई दिल्ली। सत्या शर्मा ने सदर पहाड़गंज जोन के चांदनी चौक क्षेत्र में औचक निरीक्षण कर अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इस दौरान उनके साथ स्थानीय पार्षद सुमन कुमार गुप्ता, क्षेत्रीय उपायुक्त कनिका और निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान अध्यक्ष ने दंगल मैदान पार्किंग और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने स्थित क्लब पार्किंग का जायजा लिया। जांच में पाया गया कि पार्किंग स्थलों का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के विपरीत ट्रांसपोर्टरों द्वारा अवैध रूप से सामान की लोडिंग-अनलोडिंग के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा क्लब पार्किंग क्षेत्र में अवैध झुग्गियों का निर्माण और सड़क किनारे अतिक्रमण कर अवैध शराब बिक्री भी सामने आई। इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए सत्या शर्मा ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। अध्यक्ष ने क्षेत्रीय उपायुक्त को निर्देश दिया कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास के सभी अतिक्रमण तुरंत हटाए जाएं। साथ ही, लाहौरी गेट थाना प्रभारी को मौके पर बुलाकर अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। निरीक्षण के दौरान सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति का भी जायजा लिया गया। संबंधित अधिकारियों को नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अतिरिक्त उपायुक्त (आर.पी. सेल) को निर्देश दिया गया कि क्लब पार्किंग और दंगल मैदान पार्किंग के टेंडर तत्काल निरस्त किए जाएं और संबंधित एजेंसियों पर भारी जुर्माना लगाया जाए। निरीक्षण में यह भी पाया गया कि एमसीडी के कुछ पुराने भवन जर्जर अवस्था में हैं और मानव उपयोग के लिए असुरक्षित हो चुके हैं। इस पर अध्यक्ष ने ऐसे भवनों का विस्तृत निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए। इस मौके पर सत्या शर्मा ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण और अवैध गतिविधियां किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने बताया कि वह लगातार विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं, ताकि जमीनी स्तर पर समस्याओं की पहचान कर उनका त्वरित समाधान किया जा सके। वहीं, पार्षद सुमन कुमार गुप्ता ने कहा कि चांदनी चौक क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों से स्थानीय लोगों और व्यापारियों को काफी परेशानी हो रही थी। निगम की इस कार्रवाई से व्यवस्था में सुधार होगा और आम जनता को राहत मिलेगी।
नरेला जोन के दौरे पर स्थायी समिति की अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा, स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश
नई दिल्ली। स्थायी समिति की अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा ने नरेला जोन के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण कर क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और अन्य नागरिक सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान जोन वार्ड समिति की अध्यक्ष बबीता डबास, क्षेत्रीय उपायुक्त राघवेंद्र मीणा तथा संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। निरीक्षण का उद्देश्य विकास कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश देना था। दौरे के दौरान सफाई व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। अध्यक्ष ने अधिकारियों द्वारा किए जा रहे स्वच्छता कार्यों की सराहना करते हुए निर्देश दिया कि नियमित कूड़ा उठान, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई को इसी प्रकार जारी रखा जाए, ताकि क्षेत्र में स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बना रहे। निरीक्षण की शुरुआत कुतबगढ़ स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर से हुई। यहां ओपीडी में डॉक्टरों की उपस्थिति और दवाइयों की उपलब्धता संतोषजनक पाई गई, लेकिन वाशरूम की खराब स्थिति पर उन्होंने संबंधित स्वच्छता अधिकारी को फटकार लगाते हुए तुरंत सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बड़े परिसर में स्थित इस केंद्र को भविष्य में अस्पताल, मैटरनिटी होम या मातृ-शिशु केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। इसके बाद मंगेशपुर स्थित निगम स्टोर का निरीक्षण किया गया, जो जर्जर अवस्था में पाया गया। अध्यक्ष ने इसे किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। वहीं स्टोर के पीछे स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को होने वाली परेशानी पर भी चर्चा हुई। इस पर क्षेत्रीय उपायुक्त ने बताया कि ग्रामीणों से अनुमति मिलने के बाद भूमि उपयोग परिवर्तन और हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। दौरे के क्रम में औचंदी स्थित निगम प्राथमिक विद्यालय भवन का निरीक्षण किया गया, जो परित्यक्त हालत में मिला। स्थानीय लोगों ने विद्यालय के पुनर्निर्माण की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। इस पर अध्यक्ष ने मरम्मत के बजाय नया विद्यालय भवन बनाने का निर्देश दिया और क्षेत्रीय शिक्षा निदेशक को एक सप्ताह के भीतर प्रस्ताव तैयार कर क्षेत्रीय उपायुक्त को भेजने को कहा। बाजितपुर डबास गांव में स्थित ढलावघर भी जर्जर अवस्था में पाया गया। इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि यहां कम्पैक्टर स्टेशन बनाकर जल्द ही इसे चालू कराया जाएगा। साथ ही क्षेत्र में चल रहे सड़क और नाली निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए। ग्रामीणों ने होशियार सिंह आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी में दवाइयों की कमी की शिकायत भी की, जिस पर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए। इसके बाद अध्यक्ष सलाहपुर माजरा स्थित जर्जर स्कूल भवन पहुंचीं। उन्होंने भवन को हटाकर वहां ओल्ड एज होम, लाइब्रेरी या अन्य सामुदायिक सुविधाएं विकसित करने के लिए योजना तैयार करने को कहा। साथ ही पूरे परिसर की सफाई कराने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रिया की जांच करने के निर्देश दिए। दौरे के अंतिम चरण में माजरा डबास स्थित मल्टीपरपज सोसायटी भवन का निरीक्षण किया गया, जो कई वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ा है। अध्यक्ष ने इसे हटाकर वहां आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी बनाने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने बताया कि भूमि रिकॉर्ड की जांच के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। इस अवसर पर सत्या शर्मा ने कहा कि क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करना निगम की प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों पर संबंधित विभागों को जल्द कार्रवाई करनी होगी, ताकि लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं मिल सकें। वहीं जोन चेयरमैन बबीता डबास ने कहा कि क्षेत्र में विकास कार्यों को तेज करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय समस्याओं के समाधान के साथ-साथ स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।
लिवप्योर ने नई दिल्ली में खोला एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट, स्मार्ट होम सॉल्यूशंस की पहुंच और मजबूत
नई दिल्ली। उपभोक्ताओं के बेहतर स्वास्थ्य और जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट होम सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने वाली कंपनी लिवप्योर ने राष्ट्रीय राजधानी में अपना नया एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट लॉन्च किया है। इस नए स्टोर के माध्यम से ग्राहकों को पानी, हवा और किचन से जुड़े वेलनेस-केंद्रित उत्पादों की पूरी रेंज तक सीधी पहुंच मिलेगी और उन्हें खरीदारी का बेहतर अनुभव प्राप्त होगा। कंपनी के अनुसार, यह नया एक्सपीरियंस आधारित ब्रांड आउटलेट ग्राहकों को उत्पादों को करीब से देखने, समझने और सही जानकारी के साथ खरीदारी का निर्णय लेने का अवसर प्रदान करेगा। इस पहल के जरिए लिवप्योर उन संभावनाशील बाजारों में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर रहा है, जहां अनुभव आधारित रिटेल और उपभोक्ताओं का भरोसा खरीदारी के फैसलों को प्रभावित कर रहा है। दिल्ली में खुले इस नए एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट से कंपनी की प्रमुख मेट्रो शहरों में विस्तार की रणनीति को भी मजबूती मिलेगी। राजधानी अब प्रीमियम होम अपग्रेड, तकनीक आधारित जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनती जा रही है। वर्ष 2026 में कई एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट्स की सफल शुरुआत के बाद यह स्टोर लिवप्योर की रिटेल ग्रोथ में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर लिवप्योर के प्रबंध निदेशक राकेश कौल ने कहा कि दिल्ली में एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट की शुरुआत भारत के तेजी से बढ़ते शहरी बाजारों में कंपनी की मौजूदगी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि राजधानी के उपभोक्ता तकनीक, स्वास्थ्य और सोच-समझकर किए गए निर्णयों को महत्व देते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आउटलेट को इस तरह तैयार किया गया है कि ग्राहक पूरे उत्पाद पोर्टफोलियो को समझ सकें और अपनी जरूरत के अनुसार सही विकल्प चुन सकें। नई दिल्ली के इस आउटलेट में लिवप्योर के कई आधुनिक और तकनीक आधारित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। यहां ग्राहक एआई और आईओटी आधारित समाधानों का अनुभव भी कर सकते हैं। इनमें कंपनी की ‘2X फिल्टर लाइफ’ वॉटर प्यूरीफायर रेंज, मेंटेनेंस-फ्री वॉटर प्यूरीफायर सीरीज़, वॉयस-इनेबल्ड किचन चिमनियां और ऊर्जा बचाने वाले स्मार्ट उपकरण शामिल हैं। आउटलेट में आने वाले ग्राहक उत्पादों का लाइव डेमो देख सकते हैं, उनके प्रदर्शन को समझ सकते हैं और प्रशिक्षित विशेषज्ञों से व्यक्तिगत सलाह भी ले सकते हैं। कंपनी का मानना है कि भारत जैसे विविध बाजारों में ग्राहकों का भरोसा जीतने में फिजिकल रिटेल की भूमिका आज भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए लिवप्योर देशभर में अपने रिटेल नेटवर्क का विस्तार करने की योजना बना रहा है। कंपनी का लक्ष्य अगले वित्त वर्ष के दौरान प्रमुख बाजारों में 100 एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट खोलने का है, ताकि अपने वेलनेस-केंद्रित उत्पादों को अधिक से अधिक भारतीय घरों तक पहुंचाया जा सके।