भारतीय तटरक्षक बल का ऐतिहासिक पर्वतारोहण, 7,045 मीटर ऊंचे माउंट मुकुट ईस्ट पर फहराया उत्तराखंड का विशाल ध्वज
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में अभियान दल का किया फ्लैग-इन, 2027 के एवरेस्ट अभियान के लिए बढ़ाया उत्साह देहरादून। भारतीय तटरक्षक बल और हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट (एचएमआई), दार्जिलिंग के संयुक्त पर्वतारोहण अभियान दल ने 7,045 मीटर ऊंचे माउंट मुकुट ईस्ट का सफल आरोहण कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह भारतीय तटरक्षक बल के इतिहास में 7,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली किसी पर्वत चोटी पर पहला सफल आरोहण है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में अभियान दल का फ्लैग-इन कर सभी सदस्यों को बधाई दी। एचएमआई के प्राचार्य कर्नल रजनीश जोशी के नेतृत्व में संपन्न इस अभियान को उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 गौरवशाली वर्षों को समर्पित किया गया। अभियान दल ने माउंट मुकुट ईस्ट के शिखर पर 2,500 वर्ग फुट का विशाल उत्तराखंड ध्वज फहराकर प्रदेश का मान बढ़ाया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हिमालय की दुर्गम परिस्थितियों में इस तरह की सफलता पर्वतारोहियों के अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और टीम भावना का परिचायक है। यह उपलब्धि भारतीय तटरक्षक बल के साथ-साथ पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान साहस, शौर्य और समृद्ध पर्वतारोहण परंपरा से जुड़ी रही है। राज्य के रजत जयंती वर्ष को समर्पित इस अभियान की सफलता प्रदेश की गौरवशाली यात्रा और हिमालय के साथ उसके गहरे जुड़ाव को प्रदर्शित करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उसके जवानों द्वारा हिमालय की ऊंचाइयों पर इस तरह की उपलब्धि हासिल करना उनके उत्कृष्ट प्रशिक्षण और साहसिक क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस अभियान से प्राप्त अनुभव वर्ष 2027 में प्रस्तावित माउंट एवरेस्ट अभियान की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एवरेस्ट अभियान की तैयारी का अहम पड़ाव एचएमआई, दार्जिलिंग के प्राचार्य एवं अभियान दल के नेतृत्वकर्ता कर्नल रजनीश जोशी ने बताया कि भारतीय तटरक्षक बल वर्ष 2027 में अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे करने जा रहा है। स्वर्ण जयंती के अवसर पर प्रस्तावित माउंट एवरेस्ट अभियान की तैयारियों के तहत माउंट मुकुट ईस्ट का आरोहण किया गया। पर्वतारोहियों के चयन और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट, दार्जिलिंग को सौंपी गई है। इस अवसर पर भारतीय तटरक्षक बल के अपर महानिदेशक आनंद प्रकाश बडोला, उप महानिरीक्षक हिमांशु नौटियाल, उप महानिरीक्षक डी.एस. चौहान, कमांडेंट अमित उनियाल, कमांडेंट विश्वजीत सिंह, एचएमआई के पासांग तेनजिंग शेरपा सहित अभियान दल के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कैप्शन: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में माउंट मुकुट ईस्ट का सफल आरोहण करने वाले भारतीय तटरक्षक बल एवं एचएमआई के संयुक्त पर्वतारोहण अभियान दल का फ्लैग-इन कर सम्मानित किया।
किसानों का पैसा हजम कर गए सपाई, उसी का श्राप ले डूबा : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी ने गोरखपुर से 9,18,091 किसानों के खातों में भेजे 493 करोड़ रुपये, आपदा प्रभावितों को सौंपे सहायता राशि के चेक अतिवृष्टि, बाढ़ और चक्रवात से फसल क्षति पर महज 10 दिन में मुआवजा, इस वर्ष अब तक आपदा प्रभावितों को करीब एक हजार करोड़ की सहायता जाति के नाम पर समाज को बांटते रहे सपाई, किसानों के खून-पसीने की कमाई पर डालते थे डकैती : मुख्यमंत्री योगी हुदहुद चक्रवात में केंद्र ने भेजे 3200 करोड़, किसानों को सिर्फ 800 करोड़ बांट सकी थी सपा सरकार गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपदा राहत वितरण को लेकर पिछली सरकारों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि किसानों का पैसा हजम करने वाले सपाइयों को उन्हीं का श्राप ले डूबा। वर्ष 2014 में हुदहुद चक्रवात के दौरान केंद्र सरकार ने 3200 करोड़ रुपये भेजे थे, लेकिन तत्कालीन सपा सरकार किसानों को महज 800 करोड़ रुपये ही बांट सकी। शेष धनराशि किसानों तक नहीं पहुंची। वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद इसकी पड़ताल कराई और अलग से धनराशि की व्यवस्था कर किसानों को बकाया मुआवजा दिलाया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपाई जाति के नाम पर समाज को बांटते रहे, लेकिन किसानों के खून-पसीने की कमाई पर डकैती डालने से भी नहीं चूके। किसानों का पैसा हजम करने वालों को उन्हीं का श्राप ले डूबा। सोमवार को योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह एवं सांस्कृतिक केंद्र में मुख्यमंत्री योगी ने बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से प्रभावित प्रदेश के 9,18,091 किसानों के खातों में रिमोट का बटन दबाकर 493 करोड़ रुपये कृषि निवेश अनुदान हस्तांतरित किए। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने महज आठ से दस दिन में किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराया है। इस वर्ष बरसात के दौरान आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को करीब एक हजार करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। कांग्रेस राज में 100 रुपये चलते थे, किसान तक पहुंचते थे 15मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के शासन में 100 रुपये भेजे जाते थे तो लाभार्थी तक महज 15 रुपये पहुंचते थे। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी इसे स्वीकार किया था। बाकी पैसा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लोग हजम कर जाते थे। अब जिस किसान को 25 हजार रुपये स्वीकृत होते हैं, उसके खाते में पूरे 25 हजार पहुंचते हैं। न कोई बिचौलिया सेंध लगा सकता है और न किसी प्रकार की कटौती होती है। जनहानि पर 24 घंटे में चार लाख, दुर्घटना पर पांच लाख की सहायतामुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आपदा में जनहानि होने पर परिवार को 24 घंटे के भीतर चार लाख रुपये उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। आकाशीय बिजली समेत दुर्घटना के मामलों में पात्र किसान, बटाईदार और उनके परिवारों को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत पांच लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। पूरी तरह क्षतिग्रस्त आवासों के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना से 1.20 लाख रुपये अलग से दिए जा रहे हैं। आंशिक मकान क्षति और पशुहानि पर भी सहायता मिलेगी। पूर्व में 1,29,326 किसानों को फसल क्षति के लिए करीब 78 करोड़ रुपये तथा जनहानि, पशुहानि और मकान क्षति के मामलों में 225.93 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। सड़कों की मरम्मत और कटान रोकने के लिए धन की कमी नहींमुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से कटान रोकने के कार्य तत्काल शुरू करें। सिंचाई विभाग को पर्याप्त धनराशि दी गई है। पीडब्ल्यूडी, नगर विकास विभाग और विकास प्राधिकरण मौसम साफ होते ही क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत शुरू कराएं। आपदा राहत और आवागमन बहाल करने के लिए जितना धन चाहिए, सरकार उपलब्ध कराएगी। आकाशीय बिजली से बचाव के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम और वर्षा मापने के लिए रेन गेज लगाए गए हैं। नागरिकों को मोबाइल पर मौसम संबंधी अलर्ट भी भेजे जा रहे हैं। 15 अक्टूबर से प्रभावित जिलों में खुलेंगे धान क्रय केंद्रमुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिन जिलों में अतिवृष्टि हुई है, वहां 15 अक्टूबर से धान, ज्वार, बाजरा और मक्का के क्रय केंद्र खोले जाएंगे। अन्य जिलों में सोमवार से खरीद शुरू हो रही है। किसानों की उपज खरीदने की कोई सीमा नहीं होगी। भुगतान सीधे खाते में पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि सरकार 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये कर्ज माफ कर चुकी है। 16 लाख निजी नलकूपों की बिजली निशुल्क की गई है और 22 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों को सौंपे सहायता राशि के चेकमुख्यमंत्री योगी ने कार्यक्रम में आपदा प्रभावित लाभार्थियों को सहायता राशि के प्रतीकात्मक चेक सौंपे। इनमें सदर क्षेत्र की रेशमा देवी, चंदन कुमार पासवान, इंद्रावती, सविता देवी, चुन्नी देवी और सीमा देवी, कैंपियरगंज के बहराइची, बेचन प्रसाद, जोकखन, संपत और परमहंस शामिल रहे। इसके अलावा सदर क्षेत्र के चंद्रप्रकाश द्विवेदी और धरणीधर तथा गोला क्षेत्र के गिरजापति त्रिपाठी, कमलेश, रामदरश, जनार्दन प्रसाद और राणा प्रताप सिंह को भी चेक प्रदान किए गए। सहायता राशि डीबीटी से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई। कृषि मंत्री बोले- किसानों के लिए खोला सरकार ने खजानाकृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों को प्राथमिकता दी है। अब तक कृषि क्षेत्र में 69,163 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। गन्ना मूल्य 280 से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। गन्ना किसानों को 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से नौ वर्षों में 6,125 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई है। सांसद रवि किशन बोले- संकट में किसानों के साथ सरकारसांसद रवि किशन ने कहा कि पिछली सरकारों में किसान कर्ज और आर्थिक संकट से परेशान रहते थे। योगी सरकार ने कर्जमाफी, गन्ना भुगतान और आपदा राहत को प्राथमिकता दी। अब किसानों को सहायता के लिए भटकना नहीं पड़ता। संकट आने पर सरकार उनके साथ खड़ी रहती है। मिशन शक्ति की रैली को दिखाई हरी झंडीमुख्यमंत्री योगी ने मिशन शक्ति के छठे चरण के अंतर्गत जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्कूटी सवार महिला पुलिसकर्मियों और महिलाओं ने रैली में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कृषि, उद्यान, मत्स्य पालन और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना समेत विभिन्न विभागों के स्टॉलों का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में ये रहे मौजूदकार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सांसद रवि किशन, महापौर डॉ. मंगलेश
योगी सरकार ने किसानों के लिए मायावती-अखिलेश से तीन गुना ज्यादा बजट जारी किया : कृषि मंत्री
खुद को धरतीपुत्र और किसानपुत्र कहने वालों ने कुछ नहीं किया, योगी सरकार ने किसानों के लिए खोला खजाना : सूर्य प्रताप शाही कृषि मंत्री ने कहा-योगी सरकार ने किसानों को समय पर बीज, बिजली और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की लखनऊ। बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से फसल क्षति से प्रभावित प्रदेश के नौ लाख से अधिक किसानों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहत राशि सौंपी। गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों के लिए खजाना खोल दिया है। उन्होंने कहा कि खुद को धरतीपुत्र और किसानपुत्र कहने वाली पिछली सरकारों ने किसानों के लिए अपेक्षित काम नहीं किया, जबकि योगी सरकार ने उनके मुकाबले तीन गुना से अधिक राशि खर्च की है। शाही ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट में 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपए के कर्ज माफ करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष मायावती की सरकार ने किसानों पर 10,207 करोड़ रुपए और अखिलेश यादव सरकार ने करीब 12 हजार करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि योगी सरकार अब तक किसानों पर ₹69,163 करोड़ खर्च कर चुकी है। कृषि मंत्री ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों को समय पर बीज, बिजली और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। पिछले वर्ष प्रदेश में रिकॉर्ड 752 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के समय आपदा राहत के लिए केंद्र सरकार से मिले 3,200 करोड़ रुपए में से केवल 800 करोड़ रुपए वितरित किए गए थे। योगी सरकार बनने के बाद शेष राशि में से 1,200 करोड़ रुपए सात दिनों के भीतर किसानों के खातों में भेजे गए। शाही ने कहा कि गन्ना किसानों के हित में गन्ने का मूल्य बढ़ाकर ₹400 प्रति क्विंटल किया गया। पिछली सरकार ने पांच वर्षों में करीब ₹62 हजार करोड़ का गन्ना भुगतान किया था, जबकि योगी सरकार ने दस वर्षों में ₹3.25 लाख करोड़ का भुगतान किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 105 चीनी मिलें 15 दिनों के भीतर भुगतान कर रही हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि वर्ष 2017-18 से अब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को ₹6,125 करोड़ की क्षतिपूर्ति दी गई है। वर्ष 2025-26 में आपदा से प्रभावित 7.31 लाख किसानों को इस योजना के माध्यम से ₹812.76 करोड़ दिए गए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष बीमा कराने वाले किसानों की संख्या पिछले वर्ष के लगभग 18 लाख से बढ़कर 23 से 24 लाख हो गई है। मुख्यमंत्री ने इनके सर्वे और क्षतिपूर्ति वितरण में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। शाही ने कहा कि जालौन में भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करीब ₹5 करोड़ किसानों को अंतरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने किसानों के लिए ऐसे प्रयास किए होते तो उन्हें गरीबी और बदहाली का सामना नहीं करना पड़ता।
‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के तहत कांग्रेस का सर्वोच्च न्यायालय कूच, उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में सैकड़ों नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने किया प्रतिभाग
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे एवं गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन। लोकतंत्र एवं संविधान की रक्षा के लिए कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगाः-गणेश गोदियाल, कुलदीप कुमार देहरादून /नई दिल्ली: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर देशभर में चलाये जा रहे ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे एवं गिरफ्तारी की मांग को लेकर आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी के आह्वान पर नई दिल्ली में आयोजित सर्वोच्च न्यायालय मार्च में उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल के नेतृत्व में प्रदेश के सैकड़ों वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं, विधायकों, पूर्व विधायकों, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल के नेतृत्व में उत्तराखण्ड से पहुंचे कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने नई दिल्ली के बाराखंबा रोड से सर्वोच्च न्यायालय की ओर कूच करते हुए निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में जोरदार नारेबाजी की तथा देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, संविधान एवं नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव प्रणाली सुनिश्चित किये जाने की मांग उठाई। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का वोट सबसे बड़ी ताकत है और इस ताकत को कमजोर करने का किसी भी संस्था अथवा सरकार को कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। निर्वाचन आयोग जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर देश की जनता के मन में पैदा हो रहे संदेह लोकतंत्र के भविष्य के लिए अत्यन्त चिन्ताजनक हैं। श्री गणेश गोदियाल ने कहा कि देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन कांग्रेस पार्टी द्वारा मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं, मतदाताओं के नाम काटे जाने तथा चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर उठाये जा रहे गम्भीर सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए तथा कांग्रेस पार्टी उनके तत्काल इस्तीफे एवं कथित अनियमितताओं में आपराधिक संलिप्तता की जांच कर कानूनी कार्रवाई एवं गिरफ्तारी की मांग करती है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान मताधिकार प्रदान करता है, लेकिन यदि मतदाता सूची की शुचिता और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर ही प्रश्नचिह्न लगने लगें तो लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को अपने राजनीतिक हितों के अनुरूप संचालित करने का प्रयास कर रही है, जिसका कांग्रेस पार्टी प्रत्येक स्तर पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती रहेगी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी लगातार देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, संविधान एवं आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में चलाया जा रहा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान केवल कांग्रेस पार्टी का राजनीतिक आन्दोलन नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता की रक्षा का अभियान है। चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष श्री प्रीतम सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड में भी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा लगातार गम्भीर सवाल उठाये गये हैं। अनेक स्थानों पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाये जाने के प्रयासों तथा मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं के सम्बन्ध में निर्वाचन अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गये, लेकिन इन शिकायतों पर प्रभावी एवं पारदर्शी कार्रवाई नहीं होने से निर्वाचन प्रक्रिया के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर देश के नागरिकों के मताधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि जिस देश में वोट सुरक्षित नहीं होगा, उस देश में लोकतंत्र भी सुरक्षित नहीं रह सकता। इसलिए कांग्रेस का यह संघर्ष किसी व्यक्ति अथवा पद के विरुद्ध मात्र नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को बचाने के लिए है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र जनता की आवाज दबाने से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से मजबूत होता है। कांग्रेस पार्टी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक अपना संघर्ष जारी रखेगी। चुनाव प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष डॉ0 हरक सिंह रावत ने कहा कि देश की जनता अब अपने मताधिकार एवं लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुकी है। यदि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई और विपक्ष द्वारा उठाये जा रहे गम्भीर सवालों का संतोषजनक समाधान नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी अपने आन्दोलन को और अधिक व्यापक रूप देगी। कूच में उत्तराखण्ड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष श्री प्रीतम सिंह, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सहप्रभारी श्री सुरेन्द्र शर्मा एवं श्री मनोज यादव, चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, पश्चिम बंगाल प्रभारी श्री प्रकाश जोशी, उपनेता प्रतिपक्ष श्री भुवन कापड़ी, पूर्व सांसद श्री प्रदीप टम्टा, विधायक श्री विक्रम सिंह नेगी, श्री लखपत बुटोला एवं श्री फुरकान अहमद, पूर्व विधायक श्री ललित फर्स्वाण, प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष श्रीमती गोदावरी थापली, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री संजय पालीवाल, श्री सी.पी. सिंह, श्री जयेन्द्र रमोला, श्रीमती अरुणा कुमार, श्री हिमांशु गाबा, श्री राकेश राणा, श्री सोमेन्द्र बोरा एवं श्री प्रशांत खंडूरी आर्येन्द्र शर्मा, संजय सैनी, संजय जैन, तेलूराम प्रधान, प्रदीप थपलियाल, राजवीर चौहान, मोहित शर्मा, सूरत सिंह नेगी, विपुल जैन, विनीत भट्ट, दिनेश कौशल, दिनेश चौहान, महेश जोशी, रामयश सिंह, दिनेश कौशलसहित उत्तराखण्ड के सैकड़ों कांग्रेस नेताओं, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया। कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’, ‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’, ‘संविधान का सम्मान करो’, ‘मताधिकार की रक्षा करो’ तथा ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त इस्तीफा दो’ जैसे नारे लगाते हुए निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता एवं चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित किये जाने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल ने स्पष्ट किया कि जब तक देश के प्रत्येक पात्र नागरिक का मताधिकार सुरक्षित नहीं होता तथा निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान नहीं
11 हजार कन्याओं के पूजन का संकल्प
राकेश कुमार देहरादून। महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल के नेतृत्व में कैंट विधानसभा के अंतर्गत बल्लूपुर मंदिर एवं वार्ड 41 इंदिरापुरम में दुर्गा मंदिर सीमा द्वार शिव शक्ति मंदिर में शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल जी के नेतृत्व में नौ दिवसीय कन्या पूजन प्रारंभ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन के अंतर्गत नौ दिनों में कुल 11,000 कन्याओं का पूजन करने का संकल्प लिया गया है। कार्यक्रम के तहत प्रत्येक दिन 1,100 से अधिक कन्याओं का पूजन कर मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जा रही है। इस आयोजन का उद्देश्य सनातन संस्कृति, नारी शक्ति के सम्मान तथा धार्मिक परंपराओं के प्रति जनजागरण का संदेश देना है।महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल ने बताया कि पहला नवरात्रा मां शैलपुत्री की आराधना के साथ शुभारंभ किया गया। मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा -अर्चना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर 1,100 कन्याओं का पूजन कर उन्हें देवी स्वरूप मानते हुए तिलक लगाया गया तथा पुष्प, चुनरी, प्रसाद एवं भोजन अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल ने कहा कि मां शैलपुत्री शक्ति, धैर्य, दृढ़ संकल्प और आस्था की प्रतीक हैं। नवरात्र का प्रथम दिन हमें जीवन में सकारात्मकता, साहस और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कन्या पूजन हमारी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है, जो समाज को बेटियों के प्रति सम्मान, स्नेह और समानता का भाव रखने का संदेश देता है।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। बेटियों का सम्मान, उनकी सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तीकरण प्रत्येक व्यक्ति एवं परिवार की जिम्मेदारी है।मां ब्रह्मचारिणी की पूजा -अर्चना एवं कन्या पूजननवरात्र के द्वितीय दिवस पर मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के साथ 1,100 कन्याओं का पूजन किया गया। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग, संयम, साधना और दृढ़ इच्छाशक्ति की प्रतीक हैं। उनके स्वरूप से हमें अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने तथा कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।इस अवसर पर आयोजन में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से समाज एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल जी ने कहा कि नवरात्र केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक दायित्वों को समझने का अवसर भी है। कन्या पूजन के माध्यम से हम यह संकल्प लेते हैं कि समाज में प्रत्येक बेटी को सम्मान, सुरक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों। इस अवसर पर कैंट की विधायक श्रीमती सविता कपूर ने भी कन्याओं का विधिवत पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष सुमित पांडे आशीष शर्मा महिला मोर्चा अध्यक्ष सुमन सिंह पार्षद शेखर नौटियाल सहित सैकड़ो मां स्वरूप कन्या उपस्थिति रही।
एसआईआर के विरोध में देहरादून में नागरिक मार्च, प्रदर्शनकारी हिरासत में
मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बहाली और 2026 की एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने की मांग देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और प्री-एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में सोमवार को विभिन्न सामाजिक, महिला, छात्र और जन संगठनों ने नागरिक मार्च निकाला। उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच के नेतृत्व में निकला मार्च गांधी पार्क से शुरू होकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ा। सचिवालय के निकट पुलिस ने मार्च रोक दिया। आयोजकों के अनुसार, इस दौरान धक्का-मुक्की हुई और आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया गया। इसके कारण वे ज्ञापन नहीं सौंप सके। मार्च में सीटू, एसएफआई, किसान सभा, नौजवान सभा, जनवादी महिला संगठन, इप्टा सहित कई संगठनों तथा सीपीएम, सीपीआई, आप और यूकेडी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हिरासत में लिए गए प्रमुख लोगों में कमला पंत, निर्मला बिष्ट और डॉ. रवि चोपड़ा शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि प्री-एसआईआर और एसआईआर के दौरान उत्तराखंड में लगभग 17.05 लाख नाम हटाए गए, जबकि करीब 4.01 लाख नाम जोड़े गए। उन्होंने नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। उचित जांच और निर्धारित प्रक्रिया के बिना किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। संगठनों ने वर्ष 2026 की एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने, हटाए गए नामों की बहाली, स्वतंत्र ऑडिट, बूथ स्तर पर शिकायत निवारण शिविर और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण की मांग की। उन्होंने कहा कि मताधिकार की रक्षा के लिए निर्वाचन प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए।
अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर जीकेसी के सांस्कृतिक समारोह में कलाकारों ने बांधा समां
पटना। ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) की कला-संस्कृति इकाई की ओर से सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर विशेष सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न शहरों से जुड़े कलाकारों ने गायन और वादन की प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। जीकेसी के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि अमिताभ बच्चन अपनी अभिनय प्रतिभा, मेहनत, अनुशासन और संघर्ष के बल पर भारतीय सिनेमा में विशिष्ट पहचान बना चुके हैं। उन्होंने अपने शानदार फिल्मी सफर से कायस्थ समाज को भी गौरवान्वित किया है। कला और संस्कृति समाज को जोड़ने के साथ कलाकारों को प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करती है। मैनेजिंग ट्रस्टी रागिनी रंजन ने अमिताभ बच्चन को भारतीय सिनेमा की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व और लंबा फिल्मी सफर कलाकारों की पीढ़ियों को प्रेरित करता है। कार्यक्रम में शालिनी बैरागी, मृणालिनी अखौरी, जुबिन सिन्हा, नवीन श्रीवास्तव, कुमार संभव, स्तुति श्रीवास्तव, आशीष कुमार, अभिषेक माथुर और यश माथुर सहित कई कलाकारों ने गीत-संगीत की प्रस्तुतियां दीं। तनिष्क श्रीवास्तव ने गिटार वादन से समारोह को आकर्षक बनाया। कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के ग्लोबल कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम कुमार और महासचिव पवन सक्सेना ने आयोजन की सफलता पर कलाकारों एवं सहयोगियों के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम के समन्वय में शिवानी गौड़ सहित अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समारोह में जीकेसी के कई पदाधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित थे।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का विरोध-प्रदर्शन: राजनीतिक व्यंग्य, जनाक्रोश और लोकतांत्रिक मर्यादा
लेखक: सुनील सिंह राठौर लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन जनता की आवाज उठाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। जब नागरिक किसी नीति, व्यवस्था, राजनीतिक दल या सार्वजनिक निर्णय से असहमत होते हैं, तो वे धरना, प्रदर्शन, नारेबाजी और जनसभाओं के जरिए अपनी बात रखते हैं। इसी राजनीतिक संस्कृति में व्यंग्य और प्रतीकात्मक नामों का भी इस्तेमाल होता है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम को यदि किसी विरोध-प्रदर्शन के संदर्भ में देखा जाए, तो यह राजनीतिक व्यंग्य, असंतोष और सार्वजनिक विमर्श के स्वरूप पर चर्चा का अवसर प्रदान करता है। हालांकि, इस नाम से जुड़े किसी विशिष्ट संगठन, घटना, स्थान या तारीख की पुष्टि के बिना विरोध-प्रदर्शन के वास्तविक कारणों और घटनाक्रम के बारे में निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा। इसलिए इस विषय को लोकतांत्रिक विरोध, राजनीतिक भाषा और जनभागीदारी के व्यापक संदर्भ में समझना जरूरी है। विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र की पहचान भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में विरोध-प्रदर्शन नागरिकों को अपनी असहमति व्यक्त करने का अधिकार देता है। संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण और निरस्त्र होकर एकत्र होने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। इन अधिकारों के साथ कानून के तहत लागू उचित प्रतिबंधों का पालन करना भी आवश्यक है। किसी संगठन या समूह का विरोध-प्रदर्शन तभी सार्थक माना जा सकता है, जब वह अपने मुद्दों को स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखे। केवल नारे लगाने या विरोधियों पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करने से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता। जनता यह जानना चाहती है कि प्रदर्शन किस मांग को लेकर किया जा रहा है, उससे किन लोगों का हित जुड़ा है और संबंधित पक्ष समस्या के समाधान के लिए क्या प्रस्ताव रखता है। राजनीतिक व्यंग्य और नामकरण की भूमिका राजनीति में व्यंग्य का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है। व्यंग्य के माध्यम से राजनीतिक दलों, नेताओं और सरकारी नीतियों की आलोचना की जाती है। कार्टून, पोस्टर, नारों और प्रतीकात्मक नामों के जरिए लोग अपनी नाराजगी व्यक्त करते हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ जैसे नाम का इस्तेमाल भी किसी संदर्भ में व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति हो सकता है, लेकिन उसका वास्तविक अर्थ संबंधित घटना और उसके आयोजकों के वक्तव्यों से ही स्पष्ट होगा। राजनीतिक व्यंग्य लोकतंत्र को जीवंत बना सकता है, बशर्ते उसका उद्देश्य सार्वजनिक मुद्दों पर सवाल उठाना हो। दूसरी ओर, यदि किसी बहस में केवल अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल होने लगे, तो मूल मुद्दा पीछे छूट सकता है। स्वस्थ लोकतांत्रिक विमर्श में आलोचना के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए, लेकिन तथ्यों और तर्कों का महत्व भी कम नहीं होना चाहिए। जनता के मुद्दे केंद्र में रहें किसी भी विरोध-प्रदर्शन की प्रासंगिकता इस बात से जुड़ी होती है कि वह जनता के जीवन से जुड़े प्रश्नों को कितना प्रभावी ढंग से सामने लाता है। बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार, नागरिक सुविधाएं और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषयों पर जनता की अपेक्षाएं लगातार बनी रहती हैं। यदि कोई संगठन इन विषयों पर प्रदर्शन करता है, तो उसे अपनी मांगों के समर्थन में तथ्य प्रस्तुत करने चाहिए। संबंधित विभाग या संस्था का पक्ष भी सामने आना चाहिए, ताकि नागरिकों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिल सके। इससे राजनीतिक बहस केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहने के बजाय समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकती है। मीडिया की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। पत्रकारों को विरोध-प्रदर्शन की खबर प्रकाशित करते समय आयोजकों की मांगें, प्रशासन की प्रतिक्रिया, प्रदर्शन का स्थान और उपलब्ध तथ्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना चाहिए। किसी नारे या विवादास्पद नाम को पूरी घटना का सार बना देना पाठकों को अधूरी तस्वीर दे सकता है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन और कानून का सम्मान लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य नागरिकों के अधिकारों का सम्मान भी जरूरी है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान यातायात, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और आवश्यक सेवाओं को अनावश्यक रूप से बाधित नहीं किया जाना चाहिए। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह कानून के अनुसार व्यवस्था बनाए रखे और प्रदर्शनकारियों के वैध अधिकारों की रक्षा करे। इसी प्रकार, प्रदर्शनकारियों की मांगों से असहमत लोगों को भी अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है। किसी विचार से असहमति का जवाब हिंसा, धमकी या व्यक्तिगत अपमान से देने के बजाय तर्क और तथ्यों से दिया जाना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि विभिन्न विचारों के बीच संवाद बना रहे। निष्कर्ष ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से जुड़े विरोध-प्रदर्शन का वास्तविक मूल्यांकन करने के लिए उसके उद्देश्य, आयोजकों, मांगों और घटनाक्रम की पुष्टि आवश्यक है। केवल नाम के आधार पर किसी संगठन या प्रदर्शन के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक व्यंग्य और विरोध-प्रदर्शन दोनों की जगह है। लेकिन इनकी सार्थकता तभी बढ़ती है, जब वे सार्वजनिक मुद्दों को सामने लाएं, जवाबदेही की मांग करें और नागरिकों को तथ्यपरक जानकारी दें। अंततः लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक समूह की पहचान उसके नाम या नारों से अधिक उसके विचारों, कार्यों और जनता के सामने रखे गए मुद्दों से होती है। विरोध का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार की संभावनाओं को सामने लाना भी होना चाहिए।लेखक शिक्षाविद एवं समाजसेवी हैं
देश में अराजकता-अव्यवस्था का पर्याय बनी कांग्रेस: सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने कहा- यूपी की जनता ने 1985 से कांग्रेस को नकारा, देशभर में जनाधार खो चुकी है कांग्रेस हार छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं व न्यायपालिका को भी कठघरे में खड़ा कर रही कांग्रेस: सीएम योगी चुनाव जीत जाएं तो पुरुषार्थ, हार जाएं तो ईवीएम दोषी, भारत की जागरूक जनता स्वीकार नहीं करेगी अराजकता: सीएम योगी मुख्यमंत्री की चेतावनी- अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों से कांग्रेस को बचा-खुचा जनसमर्थन भी गंवाना पड़ेगा गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से देश की राजधानी दिल्ली में लगातार देखा जा रहा है कि कांग्रेस व इंडिया गठबंधन न केवल आम जन को परेशान, बल्कि अव्यवस्था व अराजकता पैदा कर देश की संवैधानिक संस्थाओं को भी कठघरे में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। पहचान का संकट खड़ा करने और भ्रष्ट मंसूबों के कारण कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अपनी साख पूरी तरह खो चुके हैं और उनके इस गैर-राजनीतिक व्यवहार को देश की जनता भली-भांति देख रही है। चुनाव जीते तो पुरुषार्थ और हारने पर ईवीएम दोषीइलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों से बातचीत में सीएम योगी ने कहा, आश्चर्य है कि चुनाव जीतने पर इनका पुरुषार्थ और हारने पर ईवीएम और इलेक्शन कमीशन दोषी हो जाता है। न्यायालय अगर मेरिट के आधार पर कोई फैसला देता है, तो माननीय न्यायालय को भी कठघरे में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास किया जाता है। तमाम प्रकार की धमकियां देने का प्रयास होता है। ऐसे ही तमाम अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना, गाली-गलौच करना और अव्यवस्था फैलाना कांग्रेस की नियति का हिस्सा बन चुका है। कांग्रेस के लोग अपने नेतृत्व को बदलेंमुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को यह समझना चाहिए कि जनता उन्हें हर बार क्यों ठुकरा रही है। 1985 के बाद से यूपी में कांग्रेस फिर नहीं आ पाई। यूपी की जनता ने कांग्रेस को 41 वर्ष पहले ही विदा कर दिया था। देश के अन्य राज्यों में भी लोगों का कांग्रेस से मोहभंग हो चुका है और वे इससे मुक्ति पा चुके हैं। कांग्रेस के लोगों को चाहिए कि वे अपने अकर्मण्य, भ्रष्टाचारी और जनता का विश्वास खो चुके नेतृत्व को बदलें। भारत में अराजकता न फैलाने और भारत की संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास न करें। अराजकता स्वीकार नहीं करेगी जनतासीएम योगी ने कहा कि भारत की जनता लोकतांत्रिक दृष्टि से बड़ी जागरूक है। वह इस अराजकता को स्वीकार नहीं करेगी। ऐसा नहीं है कि जनता बहुत दिनों और बहुत देर तक यह सब बर्दाश्त करेगी। अगर कांग्रेस व उनके सहयोगी दलों ने अपने असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक कृत्य बंद नहीं किए तो उन्हें बचा-खुचा जनाधार भी गंवाना पड़ेगा। युवाओं को गुमराह करने से बाज आएमुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस देश में अराजकता फैलाने से बाज आए। जनता-जनार्दन और युवाओं को गुमराह करने से बाज आए। मेरिट के आधार पर और मुद्दों पर चर्चा कर के स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बने। यह देश के लोकतंत्र और जनता के हित में भी होगा।