मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बहाली और 2026 की एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने की मांग

देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और प्री-एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में सोमवार को विभिन्न सामाजिक, महिला, छात्र और जन संगठनों ने नागरिक मार्च निकाला। उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच के नेतृत्व में निकला मार्च गांधी पार्क से शुरू होकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ा। सचिवालय के निकट पुलिस ने मार्च रोक दिया। आयोजकों के अनुसार, इस दौरान धक्का-मुक्की हुई और आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया गया। इसके कारण वे ज्ञापन नहीं सौंप सके।
मार्च में सीटू, एसएफआई, किसान सभा, नौजवान सभा, जनवादी महिला संगठन, इप्टा सहित कई संगठनों तथा सीपीएम, सीपीआई, आप और यूकेडी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हिरासत में लिए गए प्रमुख लोगों में कमला पंत, निर्मला बिष्ट और डॉ. रवि चोपड़ा शामिल थे।
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि प्री-एसआईआर और एसआईआर के दौरान उत्तराखंड में लगभग 17.05 लाख नाम हटाए गए, जबकि करीब 4.01 लाख नाम जोड़े गए। उन्होंने नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। उचित जांच और निर्धारित प्रक्रिया के बिना किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।
संगठनों ने वर्ष 2026 की एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने, हटाए गए नामों की बहाली, स्वतंत्र ऑडिट, बूथ स्तर पर शिकायत निवारण शिविर और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण की मांग की। उन्होंने कहा कि मताधिकार की रक्षा के लिए निर्वाचन प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए।