पश्चिमी आज़ाद नगर में नगर निगम की स्थायी समिति अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा का निरीक्षण, आयुष्मान आरोग्य मंदिर के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने शाहदरा (दक्षिणी ज़ोन) के वार्ड संख्या 214 स्थित पश्चिमी आज़ाद नगर क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान संबंधित विकास एवं स्वास्थ्य कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त पंकज नरेश अग्रवाल, क्षेत्रीय उप आयुक्त पुंशीबा सिंह, क्षेत्रीय पार्षद सुश्री नीलम चौधरी तथा वार्ड के अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान उस सामुदायिक केंद्र के रखरखाव एवं उन्नयन कार्यों का भी जायजा लिया गया, जिसे आयुष्मान आरोग्य मंदिर में परिवर्तित किया जा रहा है। स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए, ताकि स्थानीय नागरिकों को शीघ्र ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने सामुदायिक केंद्र में संचालित एमसीडी औषधालयों का भी निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, दवाओं की उपलब्धता एवं बुनियादी सुविधाओं का मूल्यांकन किया। अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और विस्तार के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए। सत्या शर्मा ने कहा कि दिल्ली नगर निगम का उद्देश्य नागरिकों को सुलभ एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनने से स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ जल्द से जल्द मिल सके।
नारी तू नारायणी
विधु गर्ग भारतीय परिप्रेक्ष्य में “नारी तू नारायणी” एक वाक्यांश नहीं, अपितु एक संस्कार है। यह संस्कार अत्यंत पढ़ी-लिखी, ऊंचे पद पर कार्य करने वाली अथवा जीवन के किसी भी क्षेत्र में, अपना उत्कर्ष देने वाली नारी पर ही, लागू नहीं होता अपितु समाज के अति सामान्य और किसी भी वर्ग अथवा क्षेत्र से आने वाली नारी पर भी लागू होता है। नारी “मां” होती है। मातृत्व से पोषण करती है। फिर चाहे वह संतान हो, परिवार हो अथवा राष्ट्र और समाज हो। पाश्चात्य अवधारणा के विपरीत भारतीय समाज में नारी को पुरुष से बराबरी करने की आवश्यकता नहीं है। वे स्वाभाविक रूप से ही मान-सम्मान से प्रतिष्ठित है। भारतीय समाज में स्त्री और पुरुष एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी ना होकर एक दूसरे के पूरक होते हैं। भगवान शिव का “अर्धनारीश्वर स्वरूप” इसी बात को प्रतिष्ठित करता हुआ प्रतीत होता है। स्त्री, पुरुष के साथ मिलकर संपूर्ण होती है और पुरुष, स्त्री के साथ संपूर्ण माना जाता है। स्त्री-पुरुष “समाज रूपी रथ” के दो पहिए हैं, जिन्हें “संस्कार रूपी सारथी” के माध्यम से चलाया जाता है। पिछले 1000 वर्ष के गुलामी के दौर और आक्रांताओं के अत्याचारों के कारण , निश्चित रूप से भारतीय नारी पर भी कुछ प्रतिबंध लगे और उनके दुष्प्रभावों से अभी तक भी, मुक्त नहीं हुआ जा सका है। लेकिन मूल रूप से मान-सम्मान उसी रूप में प्रतिष्ठित है। नारी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की पोषक है । जब वह अपनी संतान के पोषण के साथ-साथ , अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों, तीज़-त्योहारों के माध्यम से, अपनी क्षमता के अनुसार दान-दक्षिणा देती है, भेंट-उपहार देती है अथवा बर्तन-कपड़ों से लेकर स्वर्ण-आभूषणों और महंगे आधुनिक उपकरणों की खरीददारी करती है, तो वह न केवल उत्पादन को प्रोत्साहित करती है, अपितु निर्बाध “मुद्रा-संचरण” के माध्यम से “अर्थव्यवस्था” को भी पोषित करती है। नारी “मां” के रूप में अपनी संतान की “प्रथम गुरु” होती है । जब वह नदी, वृक्ष, गऊ इत्यादि को पूजती है, तो यह समाज को पर्यावरण चेतना से जोड़ती है । शिक्षा के क्षेत्र में नारी-शक्ति का वर्चस्व स्पष्ट दृष्टिगोचर है। नारी “मां” होने के कारण अपनी संतान की नकारात्मक दुर्बुद्धि का शमन करती है और सुबुद्धि को परिष्कृत करने का कार्य करती है। समाज में इसी भाव को विस्तारित करने के उद्देश्य से रक्षा-सुरक्षा के कार्यों में लग जाती है। नारी-चेतना जब जागृत हो जाती है , तब मातृत्व-कर्तृत्व और नेतृत्व के माध्यम से, समाज और राष्ट्र का उत्थान निश्चित हो जाता है। इसके लिए किसी औपचारिक शिक्षा, धन-संपत्ति अथवा कोई उच्च पद की आवश्यकता नहीं होती है । वर्ष 1936 में मातृत्व भाव से एक-दूसरे को जोड़ने के लिए “राष्ट्र सेविका समिति” की स्थापना एक बहुत ही सामान्य नारी “लक्ष्मी बाई केलकर जी” द्वारा की गई। कर्तृत्व भाव से संगठित करते-करते “राष्ट्र सेविका समिति” को एक विशाल संगठन बना करके, “वंदनीय लक्ष्मी बाई केलकर जी” ने, संगठन की शक्ति को स्थापित किया और जीवन पर्यंत नेतृत्व करके, सुप्त पड़ी “नारी-चेतना” को जागृत किया। “नारी” जब स्वयं और परिवार से विस्तृत होकर, समाज के लिए भी, कार्य करती है तो वह स्वत: ही “नारायणी” स्वरूपा हो जाती है । वर्तमान समय में जीवन के हर क्षेत्र में, भारतीय महिला बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही है। हर क्षेत्र में हमें आज चर्चित महिलाएं दृष्टिगोचर हैं । चाहे वह खेल का मैदान हो या हिमालय की ऊंचाई, राजनीति की बिसात हो या कला की कोमलाई । उद्योग, वित्त, व्यापार, विज्ञान, तकनीक, कृषि, रक्षा-सुरक्षा इत्यादि सभी क्षेत्रों में, महिलाएं अपने योगदान को ‘मील का पत्थर’ बना रही हैं । चर्चा में रहने के कारण , नई पीढ़ी को प्रोत्साहित भी कर रही हैं । किंतु इन चर्चित विभूतियों के अतिरिक्त भी, बहुत सी महिलाएं, स्थानीय स्तर पर बहुत महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। ये महिलाएं , स्थानीय स्तर पर अपने आसपास के लोगों और समाज को प्रभावित भी कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों से इन महिलाओं के योगदान को पद्म पुरस्कार देकर प्रतिष्ठित किया जा रहा है। जिससे यह राष्ट्रीय स्तर पर भी, सब की प्रेरणा स्रोत बन रही हैं । इन पद्म पुरस्कारों से सम्मानित कुछ महिलाओं का परिचय इस प्रकार है:- त्रिपुरा की स्मृति रेखा चकमा जी हैं, जो स्थानीय पारंपरिक बुनाई पर गहन कार्य कर रही हैं ।असम की पार्वती बरुआ जी हाथियों को प्रशिक्षण देने का कार्य करती हैं, इन्होंने वैज्ञानिक तरीके से स्थानीय स्तर पर, हाथी और मनुष्य के टकराव को रोकने में अपनी भूमिका निभाई है ।बिहार की दुलारी देवी जी मिथिला पेंटिंग्स पर कार्य कर रही हैं ।उड़ीसा की सरूबाई के नाम से लोकप्रिय गायिका पूर्णमासी जी हैं, जिन्होंने 50000 से अधिक भक्ति गीतों की रचना भी की है।आंध्र प्रदेश की एन सुमंथी जी ,अपने जुनून से पहली महिला मृदंग वादिका के रूप में जानी जाती हैं।महाराष्ट्र की सिंधुताई सपकाल जी ने 1500 से अधिक बेघर बच्चों को मां का प्यार देकर के, पालन पोषण किया है । यह वे कुछ गुमनाम से नाम हैं ,जो अपने कार्य के योगदान से सामान्य “नारी” को जोश-उत्साह-विश्वास की प्रेरणा से “नारायणी” स्वरूपा हो जाते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि, आज की आधुनिक नारी पश्चिमी विमर्श भ्रम में ना उलझे। सिगरेट, शराब लिव इन रिलेशन, बहसबाजी आदि की बराबरी के चक्कर में पड़कर अपने सम्मान को कम ना करे। स्वतंत्रता के उपरांत भारतीय संविधान ने स्त्री पुरुष को समान अधिकार प्रदान किए हुए हैं। स्पष्ट है भारत में स्त्री अधिकारों का हनन संवैधानिक तौर पर भी एक अपराध ही माना जाएगा । अतः अपने अधिकारों को लेकर, स्त्री को भयाक्रांत रहने की कतई आवश्यकता नहीं है। स्त्री और पुरुष के अपने-अपने प्राकृतिक गुण और संरचना होती है। यह सामान्य रूप से दिखाई भी देती है और वैज्ञानिक रूप से सत्य भी सिद्ध होती है। इसलिए स्त्री को चाहिए कि वह अपने स्वाभाविक गुणों का विकास करें , ना कि आधुनिकता की होड़ में, हर बात में पुरुष के साथ बराबरी का दंभ भरे। अपने अंदर कौशल विकास करते हुए हर स्त्री को , मातृत्व कृर्तृत्व और नेतृत्व के गुणों को आत्मसात करने के साथ , हर दिन, कुछ मिनट अथवा कुछ घंटे बिना किसी लाभ आकांक्षा के समाज के उत्थान के लिए अवश्य देने का प्रयास करना चाहिए । समाज
महिला दिवस पर एमसीडी का ‘स्वदेशी हाट’, महिला उद्यमियों को मिला मंच
कार्यक्रम का उद्घाटन स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने किया। इस दौरान महिला कल्याण एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष रेखा रानी भी मौजूद रहीं। नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा ‘स्वदेशी हाट’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने किया। इस दौरान महिला कल्याण एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष रेखा रानी भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम में महिला स्वयं सहायता समूहों, एनजीओ और प्रशिक्षण केंद्रों द्वारा स्वदेशी उत्पादों के स्टॉल लगाए गए, जिनमें साड़ियां, वस्त्र, बैग, ज्वेलरी, बेकरी उत्पाद और हस्तनिर्मित वस्तुएं प्रदर्शित की गईं। लोगों ने इन उत्पादों की सराहना करते हुए खरीदारी भी की। स्थायी समिति अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा ने भी विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया, वहां से खरीदारी की तथा महिला उद्यमियों और विक्रेताओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच महिलाओं को अपने हुनर और स्वदेशी उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनने में मदद मिलती है। महिला कल्याण एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष श्रीमती रेखा रानी ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को प्रोत्साहित करना तथा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना है। हमें गर्व है कि बड़ी संख्या में महिला उद्यमियों ने इस ‘स्वदेशी हाट’ में भाग लेकर अपनी प्रतिभा और उत्पादों का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया, जहां लोगों के लिए हेल्थ चेकअप की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सत्या शर्मा ने स्टॉलों का भ्रमण कर महिला उद्यमियों का उत्साहवर्धन किया और कहा कि ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गोलियों की खनक में बचपन की चमक
-डॉ शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी की कलम से गर्मी की दोपहर, धूल भरी गली, और जेब में खनखनाती काँच की गोलियाँ — बस यही तो था हमारा खज़ाना। “गोलियाँ” या “काँचा” खेलना केवल खेल नहीं था, वह हमारी दोस्ती, प्रतिस्पर्धा और मासूम खुशियों का उत्सव था। ज़मीन पर उँगली से छोटा सा गड्ढा बनाना, निशाना साधते समय सांस रोक लेना, और जैसे ही अपनी गोली सटीक टकराती — मन में विजयी मुस्कान खिल उठती। कभी हारते तो उदासी भी होती, पर अगले ही पल फिर चुनौती देने को तैयार। न कोई मोबाइल, न कोई स्क्रीन — बस मिट्टी की सोंधी खुशबू और दोस्तों की खिलखिलाहट। आज जब उन पलों को याद करता हूँ, तो लगता है कि असली अमीरी जेब में नहीं, उन रंग-बिरंगी गोलियों और बेफिक्र हँसी में थी। बचपन की वही छोटी-सी दुनिया, सच में सबसे बड़ी दुनिया थी।
निगम मुख्यालय में ‘निगम आलोक पत्रिका-2025’ का लोकार्पण, हिंदी के प्रोत्साहन पर जोर
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के राजभाषा विभाग द्वारा निगम मुख्यालय, सिविक सेंटर में “निगम आलोक पत्रिका-2025” का भव्य लोकार्पण एवं हिंदी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्थायी समिति की अध्यक्षा सत्या शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वहीं अतिरिक्त आयुक्त संजीव मित्तल की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर निगम के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान “निगम आलोक पत्रिका-2025” का विधिवत विमोचन किया गया। इसके उपरांत आयोजित हिंदी कार्यशाला में प्रशासनिक कार्यों में राजभाषा हिंदी के प्रभावी उपयोग, सरल एवं सशक्त अभिव्यक्ति तथा कार्यालयीन कार्यप्रणाली में हिंदी के व्यापक संवर्धन पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। अपने संबोधन में सत्या शर्मा ने कहा कि राजभाषा हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक सुदृढ़ता का आधार है। उन्होंने कहा कि निगम में हिंदी के अधिकतम प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की अपील करते हुए प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के व्यापक उपयोग पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ।
20 साल, 300 से ज्यादा एफआईआर, फिर भी नहीं मिला न्याय
जयपुर के बड़े जमीन घोटाले में ज्ञान चंद अग्रवाल के खिलाफ नई एफआईआर, सिस्टम पर उठे सवालक्या ED की जांच से सैकड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा न्याय? जयपुर। करीब दो दशक पहले शुरू हुआ कथित जमीन घोटाला आज भी चर्चा में है। 14 दिसंबर 2025 को जयपुर के मानसरोवर थाने में एक नई एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला ज्ञान चंद अग्रवाल और M/s Shri Salasar Overseas Pvt. Ltd. से जुड़ा है। नई एफआईआर में कंपनी के साथ ज्ञान चंद अग्रवाल, प्रमोद कुमार अग्रवाल और बद्री के नाम शामिल हैं। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 316(2), 336(2), 337, 338, 339, 61(2) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है। इन धाराओं में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और विश्वासघात जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। क्या है आरोप? शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2008 में नारायण विहार, अजमेर रोड, जयपुर में 200 वर्ग गज का प्लॉट (नंबर 163) ₹5,500 प्रति वर्ग गज की दर से खरीदा गया था। 12 जून 2008 को अस्थायी अलॉटमेंट लेटर जारी किया गया। इसके अलावा विकास शुल्क के नाम पर ₹38,000 अतिरिक्त लिए गए। आरोप है कि बाउंड्री वॉल और कमरे के निर्माण के नाम पर ₹1.5 लाख नकद भी मांगे गए। बाद में प्लॉट रद्द कर दूसरा प्लॉट (नंबर 298-D) देने की बात कही गई। पूरी राशि भुगतान करने के बावजूद न तो कब्जा दिया गया और न ही कोई स्पष्ट समाधान मिला। शिकायतकर्ता का कहना है कि अप्रैल 2025 में साइट पर जाकर देखा गया तो वहां ऐसा कोई प्लॉट अस्तित्व में ही नहीं था। फोन पर पैसे लेने की बात स्वीकार की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें वर्षों तक अलग-अलग बहानों और आश्वासनों के जरिए गुमराह किया गया। 20 साल से एक जैसा पैटर्न बताया जा रहा है कि ज्ञान चंद अग्रवाल के खिलाफ जयपुर में जमीन से जुड़े ऐसे मामलों में 300 से अधिक एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। कई पीड़ितों ने एक समान तरीका अपनाए जाने की बात कही है— इन मामलों में रिटायर्ड कर्मचारी, नौकरीपेशा लोग और मध्यमवर्गीय परिवार शामिल हैं, जिन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई जमीन खरीदने में लगाई थी। एक पीड़ित ने कहा,“मैंने अपनी बेटी के भविष्य के लिए प्लॉट खरीदा था। 20 साल हो गए, न जमीन मिली और न ही पैसा वापस। कई बार पुलिस के पास गया, लेकिन आज तक न्याय नहीं मिला।” पीड़ितों की सामूहिक मांग अब कई पीड़ित एकजुट होकर सामने आए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सिस्टम और दस्तावेजों पर भरोसा किया, लेकिन वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे हैं। पीड़ितों की प्रमुख मांगें हैं— ED की एंट्री: क्या आएगा मोड़? हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में जांच शुरू की है। बताया जा रहा है कि राजस्थान पुलिस की कई एफआईआर के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। मामला करीब 150 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा बताया जा रहा है। ED के अनुसार, ज्ञान चंद अग्रवाल पर जमीन हड़पने और कई लोगों व कंपनियों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप हैं। उन्हें राजस्थान पुलिस द्वारा हिस्ट्रीशीटर घोषित किया जा चुका है और विभिन्न अदालतों से गिरफ्तारी वारंट भी जारी हैं। ED अब मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है। यदि जांच में संपत्तियों की जब्ती और नीलामी की कार्रवाई होती है, तो पीड़ितों को आंशिक राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। बड़ा सवाल: 20 साल तक न्याय क्यों नहीं? सैकड़ों एफआईआर, कई गिरफ्तारियां और अदालतों में लंबित मामले—फिर भी अब तक ठोस समाधान सामने क्यों नहीं आया? पीड़ितों का कहना है— कई परिवारों के लिए यह मामला अब सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में विश्वास का प्रश्न बन गया है। अब सबकी नजर ED की जांच और अदालत की आगामी कार्रवाई पर है। क्या इस बार 20 साल पुरानी लड़ाई को न्याय का अंत मिलेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
जिला विधिज्ञ संघ के चुनाव के लिए दस अभ्यर्थी ने किया नामांकन
औरंगाबाद। सोमवार को जिला विधिज्ञ संघ औरंगाबाद में 12 मार्च को होने वाले चुनाव को लेकर कुल दस अभ्यर्थीयो ने नामांकन किया। जिला विधिज्ञ संघ औरंगाबाद के चुनाव समिति के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता महेंद्र प्रसाद सिंह और सहायक सदस्य कामता प्रसाद सिंह, राधेश्याम प्रसाद, सरोज रंजन सिन्हा,अभय कुमार ने बताया कि महासचिव पद पर सतीश कुमार सिंह, प्रमोद कुमार सिंह और रामावतार यादव ने नामांकन किया। वरिष्ठ सदस्य पद पर यमुना प्रसाद सिंह और अनील कुमार सिंह ने नामांकन किया, संयुक्त सचिव पद पर विनय कुमार मिश्रा ने नामांकन किया। सहायक सचिव पद पर सतीश कुमार स्नेही ने नामांकन किया। पुस्तकालय अध्यक्ष पद पर त्रिपुरारी कुमार वैद्य ने नामांकन किया और कार्यसमिति सदस्य पद पर विनय द्वेवेदी ने नामांकन किया। कार्यसमिति के कुल 27 पदों पर अब तक 46 अभ्यर्थीयो ने नामांकन हेतु रसीद कटवा लिया है। ज्ञात हो कि 25 फरवरी तक नामांकन दाखिल किया जाएगा।
अखिल भारतीय राजपूत एकता मिशन द्वारा वैवाहिक परिचय सम्मेलन का आयोजन पटना।अभिभावकों के लिए अपने बच्चों हेतु उपयुक्त जीवनसाथी की तलाश आज के समय में एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसी उद्देश्य से अखिल भारतीय राजपूत एकता मिशन की ओर से रविवार, 22 फरवरी को जगजीवन राम शोध संस्थान, पटना में “राजपूत युवक-युवती वैवाहिक परिचय सम्मेलन” का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन में विवाह योग्य युवक-युवतियों के अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में 100 से अधिक अभिभावक उपस्थित रहे, जबकि अब तक लगभग 300 परिवारों ने अपना पंजीकरण कराया है। इस अवसर पर अभिभावकों को एक साझा मंच प्रदान किया गया, जहां उन्होंने अपने बच्चों की शैक्षणिक योग्यता, पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं वैवाहिक अपेक्षाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी साझा की। आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से संभावित वैवाहिक संबंधों पर गंभीरतापूर्वक विचार-विमर्श किया गया। आयोजकों ने इसे समाज में पारदर्शी, संगठित एवं सकारात्मक वैवाहिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति कार्यक्रम में बिहार विधान परिषद सदस्य डॉ. समीर कुमार सिंह, विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. रविन्द्र नारायण सिंह, आईआरएस बिनोद कुमार सिंह, प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील सिंह, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेश कुमार सिंह, बिहार पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह, सितयोग इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सचिव राजेश कुमार सिंह तथा प्रो. अजय प्रताप सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अखिल भारतीय राजपूत एकता मंच के अध्यक्ष एस.के. सिंह एवं संरक्षक प्रो. डॉ. आर.एन. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे सम्मेलन समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इस पहल को डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा जाए, ताकि देश-विदेश में बसे राजपूताना समाज के परिवारों को भी इसका लाभ मिल सके और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित हो। दहेज और दिखावे के विरुद्ध सामाजिक पहल संस्थापक अध्यक्ष एस.के. सिंह ने कहा कि संगठन समाजहित में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने सम्मेलन की सफलता का श्रेय कार्यकारिणी सदस्यों, अभिभावकों और समाज के सहयोग को दिया। उन्होंने दहेज प्रथा एवं विवाह में अनावश्यक दिखावे को समाज की गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विशेष रूप से सहायक सिद्ध होंगे। वैवाहिक संस्कारों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता संरक्षक डॉ. आर.एन. सिंह ने कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र बंधन है। बदलते सामाजिक परिवेश में वैवाहिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों को मजबूत करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वैवाहिक परिचय सम्मेलन सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण और स्वस्थ वैवाहिक परंपराओं को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम हैं। कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने भविष्य में भी ऐसे सम्मेलन नियमित रूप से आयोजित करने की घोषणा की तथा समाज के सभी वर्गों से सक्रिय सहयोग की अपील की।
महाकुंभ के भव्य आयोजन के बाद माघ मेला-2026 की तैयारियां अंतिम चरण में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक बार फिर भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित माघ मेला संपन्न कराने की तैयारी मुख्य सचिव ने प्रतीक चिन्ह के अनावरण, सेक्टरवार रंग योजना और अवसंरचनात्मक सुधारों पर बैठक में की चर्चा 7 सेक्टर्स और 7 पॉन्टून पुलों को 7 ऊर्जा चक्रों के रंगों से सजाया जाएगा हर क्षेत्र में माघ मेला का प्रतीक चिन्ह किया जाएगा अंकित लखनऊ, 10 दिसंबर। महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन के बाद अब राज्य सरकार माघ मेला-2026 को भी अभूतपूर्व, व्यवस्थित और सौंदर्यपूर्ण स्वरूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में माघ मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। अभी हाल ही में मुख्य सचिव के समक्ष प्रतीक चिन्ह का अनावरण, सेक्टरवार रंग योजना और अवसंरचनात्मक सुधारों पर विशेष चर्चा हुई थी। इस बार अनुमानित है कि प्रयागराज में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु संगम पर पवित्र स्नान करेंगे, जिनमें प्रतिदिन आने वाले लाखों कल्पवासी भी शामिल होंगे। 7 सेक्टर्स – 7 ऊर्जा चक्रों के रंगपूरा मेला क्षेत्र रंग-समन्वित थीम पर आधारित होगा। हर सेक्टर एकरूपता का अनुभव कराएगा। मेले को सुसंगत और आकर्षक रूप देने के लिए सातों सेक्टर्स और सात पॉन्टून पुलों को “सात ऊर्जा चक्रों” के अनुरूप रंगों से सजाया जाएगा। हर सेक्टर की चहारदीवारी पर 3 फुट चौड़ी सीमांकन पट्टी बनाई जाएगी, जिससे मेले का आकार दृष्टिगत रूप से स्पष्ट, व्यवस्थित और सुंदर दिखाई देगा। सभी सेक्टर्स में उत्तर प्रदेश सरकार और माघ मेला-2026 का प्रतीक चिन्ह अंकित होगा। चेंजिंग रूम होंगे अधिक सुविधाजनकविभिन्न घाटों पर उपलब्ध चेंजिंग रूम भी सेक्टरवार रंग योजना के अनुरूप तैयार किए जाएंगे। पहले की तुलना में दोगुनी क्षमता, रंग योजनाओं से मेल खाते हुए होंगे। अब 2 यूनिट में 2 के स्थान पर 4 लोग एक साथ सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इससे भीड़ प्रबंधन अधिक सुचारू और सुविधाजनक होगा तथा मेले की एकरूपता कायम रहेगी। पॉन्टून पुलों पर बढ़ेगी सौंदर्य और सुरक्षा दोनोंसातों पॉन्टून पुलों को इंद्रधनुषी सात रंगों से सजाया जाएगा। पुलों पर लगे लाइट, पोलों पर एलईडी लाइटें धार्मिक चिन्हों के साथ प्रदर्शित होंगी, जो दिन और रात दोनों समय आकर्षण का केंद्र रहेंगी। हर पुल पर रंग अनुरूप झंडे लगाए जाएंगे।यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलों पर कैनोपी का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विश्वस्तरीय अनुभव देने पर फोकसमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि माघ मेला-2026 न केवल धार्मिक भावना का प्रतीक हो, बल्कि साफ-सफाई, सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा सुविधाओं और आधुनिक अवसंरचना के मामले में भी देशभर के मेले आयोजनों के लिए एक आदर्श बने। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मेला प्रशासन श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित, व्यवस्थित, आध्यात्मिक और विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान करने में जुट गया है।
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का संस्थापक सप्ताह समारोह
नशे से बचकर ही खुद को और देश के भविष्य को बचा पाएंगे युवा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 93वें संस्थापक सप्ताह समारोह के मुख्य महोत्सव में बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ड्रग्स के साथ स्मार्टफोन का नशा भी आज युवाओं के सामने चुनौती : मुख्यमंत्री किसी न किसी रूप में घुसना चाहता है देश का दुश्मन : मुख्यमंत्री गोरखपुर, 10 दिसंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आज युवाओं के सामने दो चुनौतियां सामने हैं। एक ड्रग्स का नशा और दूसरा मोबाइल या स्मार्टफोन का नशा। इन दोनों ही नशे से बचना होगा। इनसे युवा जितना बच पाएंगे, उतना ही खुद को और देश के भविष्य को भी बचा पाएंगे। नशे से बचकर ही युवा अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन कर पाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 93वें संस्थापक सप्ताह समारोह के समापन पर आयोजित मुख्य महोत्सव की अध्यक्षता कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने युवाओं को मोबाइल फोन के नशे से दूर रहने की सलाह दी। एक शिक्षक और अभिभावक के रूप में मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि आपको सतर्क रहना होगा क्योंकि नशा माफिया तेजी के साथ युवा पीढ़ी को अपनी चपेट में लेने का कुत्सित प्रयास करता है। अकादमिक संस्थाओं को भी इसके प्रति उतना ही अलर्ट रहना पड़ेगा। सीएम योगी ने कहा कि युवाओं को इसके खिलाफ एक नई लड़ाई लड़ने के लिए अपने आप को तैयार करना पड़ेगा क्योंकि देश का दुश्मन किसी न किसी रूप में आपके बीच में घुसना चाहता है। उसको हम अवसर नहीं दें। मस्तिष्क को कुंद कर देगा स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोगमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्मार्टफोन पर युवाओं का अत्यधिक समय खर्च हो रहा है, इसको कम करना होगा। उन्होंने युवाओं को समझाया, हालांकि एकाएक यह कर पाना कठिन होगा, इसलिए धीरे-धीरे कम करिए। आवश्यक हो तभी आधा या एक घंटा तक ही आप मोबाइल फोन का इस्तेमाल करिए। समय तय करिए कि मुझे जब आवश्यक बात करनी है तभी बात करूंगा, अनावश्यक नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग आपकी आंख की साइट को प्रभावित करेगा। मस्तिष्क को कुंद कर देगा, बुद्धि, विवेक और शारीरिक क्षमता को भी यह पूरी तरह कमजोर कर देगा। इसलिए स्मार्टफोन से जितना बच सकते हैं, बचने का प्रयास करना चाहिए। तकनीक से अपने आप ही जुड़ जाएंगे रोजगार के नए अवसरसमय और तकनीक के साथ चलते हुए भविष्य की चुनैतियों के लिए खुद को तैयार करने की सीख देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ड्रोन और रोबोटिक्स के एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। हममें से कोई व्यक्ति उससे अपने आप को अलग नहीं कर सकता। हमें करना भी नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें उस मानसिकता से भी उबरना पड़ेगा कि तकनीक आएगी तो रोजगार के अवसर कम करेगी। यह तथ्य सही नहीं है बल्कि तकनीक आएगी रोजगार के नए अवसर अपने आप ही जुड़ जाएंगे। हमें अपने आप को उसके अनुरूप शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करना होगा। हिम्मत न हारने वाला ही जीतता हैसमारोह में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में जीतता वही है जो हिम्मत नहीं हारता है और धैर्य बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि जीवन में हार तभी होती है जब हम हमारा दृष्टिकोण नकारात्मक होता है। दूसरों को कोसने की बजाय, अंधकार को धिक्कारने की बजाय, यदि हम ‘आओ मिलकर दीया जलाएं’ का काम करने लग जाएं, हर व्यक्ति मिलकर एक साथ आगे बढ़ने लग जाए तो कहीं भी अंधकार नहीं रहेगा। शार्ट कट से नहीं मिलेगी सफलतामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और टीम वर्क का महत्व समझाते हुए कहा कि यह केवल एक गेम में नहीं बल्कि पूरी जनरेशन में उपयोगी होता है। हमें अपने आप को स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से, टीम वर्क से जोड़ना पड़ेगा। कहा कि यह भी याद रखना होगा, शॉर्ट कट का रास्ता कभी जीवन में सफलता नहीं प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति और संस्था को हमेशा इस बात के लिए तैयार होना होगा कि तकनीक जितना आसान जीवन को कर रही है, उतनी ही चुनौतियां और कठिनाई भी हमारे सामने प्रस्तुत कर रही है। युवाओं और अकादमिक संस्थाओं को उसके प्रति अपने आप को तैयार करना होगा। संस्थाओं और मेधावियों को किया गया पुरस्कृतसंस्थापक सप्ताह के मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं में से उत्कृष्ट संस्था, उत्कृष्ट शिक्षक, उत्कृष्ट कर्मचारी, उत्कृष्ट परिचारक और स्नातकोत्तर, स्नातक एवं हाईस्कूल-इंटर के उत्कृष्ट विद्यार्थियों तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया। मंच से करीब डेढ़ सौ पुरस्कार वितरित किए गए। करीब सात सौ पुरस्कार, संस्थाओं के माध्यम से वितरित किए जाएंगे। प्रो यूपी सिंह स्मृति ग्रंथ सहित दो पुस्तकों का हुआ विमोचनसंस्थापक समारोह के मुख्य महोत्सव में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. यूपी सिंह स्मृति ग्रंथ और एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ की पुस्तक ‘जीवन मूल्य प्रमाण पत्र संग्रह पाठ्यक्रम’ का विमोचन हुआ। इस दौरान सीएम योगी ने प्रो. यूपी सिंह स्मृति ग्रंथ की प्रकाशन संस्था प्लाक्षा के प्रबंध निदेशक सौरभ सिंह को स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया। संस्थापक सप्ताह के मुख्य महोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह में स्वागत संबोधन महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह, आभार ज्ञापन महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष राजेश मोहन सरकार और संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, महायोगी गुरु गोरखनाथ राज्य आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के. रामचंद्र रेड्डी, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर की कुलपति प्रो. कविता शाह, मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मीरजापुर की कुलपति प्रो. शोभा गौड़, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, देवीपाटन शक्तिपीठ के महंत मिथिलेशनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, भारत