पश्चिमी आज़ाद नगर में नगर निगम की स्थायी समिति अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा का निरीक्षण, आयुष्मान आरोग्य मंदिर के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने शाहदरा (दक्षिणी ज़ोन) के वार्ड संख्या 214 स्थित पश्चिमी आज़ाद नगर क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान संबंधित विकास एवं स्वास्थ्य कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त पंकज नरेश अग्रवाल, क्षेत्रीय उप आयुक्त पुंशीबा सिंह, क्षेत्रीय पार्षद सुश्री नीलम चौधरी तथा वार्ड के अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान उस सामुदायिक केंद्र के रखरखाव एवं उन्नयन कार्यों का भी जायजा लिया गया, जिसे आयुष्मान आरोग्य मंदिर में परिवर्तित किया जा रहा है। स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए, ताकि स्थानीय नागरिकों को शीघ्र ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने सामुदायिक केंद्र में संचालित एमसीडी औषधालयों का भी निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, दवाओं की उपलब्धता एवं बुनियादी सुविधाओं का मूल्यांकन किया। अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और विस्तार के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए। सत्या शर्मा ने कहा कि दिल्ली नगर निगम का उद्देश्य नागरिकों को सुलभ एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनने से स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ जल्द से जल्द मिल सके।
नारी तू नारायणी
विधु गर्ग भारतीय परिप्रेक्ष्य में “नारी तू नारायणी” एक वाक्यांश नहीं, अपितु एक संस्कार है। यह संस्कार अत्यंत पढ़ी-लिखी, ऊंचे पद पर कार्य करने वाली अथवा जीवन के किसी भी क्षेत्र में, अपना उत्कर्ष देने वाली नारी पर ही, लागू नहीं होता अपितु समाज के अति सामान्य और किसी भी वर्ग अथवा क्षेत्र से आने वाली नारी पर भी लागू होता है। नारी “मां” होती है। मातृत्व से पोषण करती है। फिर चाहे वह संतान हो, परिवार हो अथवा राष्ट्र और समाज हो। पाश्चात्य अवधारणा के विपरीत भारतीय समाज में नारी को पुरुष से बराबरी करने की आवश्यकता नहीं है। वे स्वाभाविक रूप से ही मान-सम्मान से प्रतिष्ठित है। भारतीय समाज में स्त्री और पुरुष एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी ना होकर एक दूसरे के पूरक होते हैं। भगवान शिव का “अर्धनारीश्वर स्वरूप” इसी बात को प्रतिष्ठित करता हुआ प्रतीत होता है। स्त्री, पुरुष के साथ मिलकर संपूर्ण होती है और पुरुष, स्त्री के साथ संपूर्ण माना जाता है। स्त्री-पुरुष “समाज रूपी रथ” के दो पहिए हैं, जिन्हें “संस्कार रूपी सारथी” के माध्यम से चलाया जाता है। पिछले 1000 वर्ष के गुलामी के दौर और आक्रांताओं के अत्याचारों के कारण , निश्चित रूप से भारतीय नारी पर भी कुछ प्रतिबंध लगे और उनके दुष्प्रभावों से अभी तक भी, मुक्त नहीं हुआ जा सका है। लेकिन मूल रूप से मान-सम्मान उसी रूप में प्रतिष्ठित है। नारी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की पोषक है । जब वह अपनी संतान के पोषण के साथ-साथ , अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों, तीज़-त्योहारों के माध्यम से, अपनी क्षमता के अनुसार दान-दक्षिणा देती है, भेंट-उपहार देती है अथवा बर्तन-कपड़ों से लेकर स्वर्ण-आभूषणों और महंगे आधुनिक उपकरणों की खरीददारी करती है, तो वह न केवल उत्पादन को प्रोत्साहित करती है, अपितु निर्बाध “मुद्रा-संचरण” के माध्यम से “अर्थव्यवस्था” को भी पोषित करती है। नारी “मां” के रूप में अपनी संतान की “प्रथम गुरु” होती है । जब वह नदी, वृक्ष, गऊ इत्यादि को पूजती है, तो यह समाज को पर्यावरण चेतना से जोड़ती है । शिक्षा के क्षेत्र में नारी-शक्ति का वर्चस्व स्पष्ट दृष्टिगोचर है। नारी “मां” होने के कारण अपनी संतान की नकारात्मक दुर्बुद्धि का शमन करती है और सुबुद्धि को परिष्कृत करने का कार्य करती है। समाज में इसी भाव को विस्तारित करने के उद्देश्य से रक्षा-सुरक्षा के कार्यों में लग जाती है। नारी-चेतना जब जागृत हो जाती है , तब मातृत्व-कर्तृत्व और नेतृत्व के माध्यम से, समाज और राष्ट्र का उत्थान निश्चित हो जाता है। इसके लिए किसी औपचारिक शिक्षा, धन-संपत्ति अथवा कोई उच्च पद की आवश्यकता नहीं होती है । वर्ष 1936 में मातृत्व भाव से एक-दूसरे को जोड़ने के लिए “राष्ट्र सेविका समिति” की स्थापना एक बहुत ही सामान्य नारी “लक्ष्मी बाई केलकर जी” द्वारा की गई। कर्तृत्व भाव से संगठित करते-करते “राष्ट्र सेविका समिति” को एक विशाल संगठन बना करके, “वंदनीय लक्ष्मी बाई केलकर जी” ने, संगठन की शक्ति को स्थापित किया और जीवन पर्यंत नेतृत्व करके, सुप्त पड़ी “नारी-चेतना” को जागृत किया। “नारी” जब स्वयं और परिवार से विस्तृत होकर, समाज के लिए भी, कार्य करती है तो वह स्वत: ही “नारायणी” स्वरूपा हो जाती है । वर्तमान समय में जीवन के हर क्षेत्र में, भारतीय महिला बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही है। हर क्षेत्र में हमें आज चर्चित महिलाएं दृष्टिगोचर हैं । चाहे वह खेल का मैदान हो या हिमालय की ऊंचाई, राजनीति की बिसात हो या कला की कोमलाई । उद्योग, वित्त, व्यापार, विज्ञान, तकनीक, कृषि, रक्षा-सुरक्षा इत्यादि सभी क्षेत्रों में, महिलाएं अपने योगदान को ‘मील का पत्थर’ बना रही हैं । चर्चा में रहने के कारण , नई पीढ़ी को प्रोत्साहित भी कर रही हैं । किंतु इन चर्चित विभूतियों के अतिरिक्त भी, बहुत सी महिलाएं, स्थानीय स्तर पर बहुत महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। ये महिलाएं , स्थानीय स्तर पर अपने आसपास के लोगों और समाज को प्रभावित भी कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों से इन महिलाओं के योगदान को पद्म पुरस्कार देकर प्रतिष्ठित किया जा रहा है। जिससे यह राष्ट्रीय स्तर पर भी, सब की प्रेरणा स्रोत बन रही हैं । इन पद्म पुरस्कारों से सम्मानित कुछ महिलाओं का परिचय इस प्रकार है:- त्रिपुरा की स्मृति रेखा चकमा जी हैं, जो स्थानीय पारंपरिक बुनाई पर गहन कार्य कर रही हैं ।असम की पार्वती बरुआ जी हाथियों को प्रशिक्षण देने का कार्य करती हैं, इन्होंने वैज्ञानिक तरीके से स्थानीय स्तर पर, हाथी और मनुष्य के टकराव को रोकने में अपनी भूमिका निभाई है ।बिहार की दुलारी देवी जी मिथिला पेंटिंग्स पर कार्य कर रही हैं ।उड़ीसा की सरूबाई के नाम से लोकप्रिय गायिका पूर्णमासी जी हैं, जिन्होंने 50000 से अधिक भक्ति गीतों की रचना भी की है।आंध्र प्रदेश की एन सुमंथी जी ,अपने जुनून से पहली महिला मृदंग वादिका के रूप में जानी जाती हैं।महाराष्ट्र की सिंधुताई सपकाल जी ने 1500 से अधिक बेघर बच्चों को मां का प्यार देकर के, पालन पोषण किया है । यह वे कुछ गुमनाम से नाम हैं ,जो अपने कार्य के योगदान से सामान्य “नारी” को जोश-उत्साह-विश्वास की प्रेरणा से “नारायणी” स्वरूपा हो जाते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि, आज की आधुनिक नारी पश्चिमी विमर्श भ्रम में ना उलझे। सिगरेट, शराब लिव इन रिलेशन, बहसबाजी आदि की बराबरी के चक्कर में पड़कर अपने सम्मान को कम ना करे। स्वतंत्रता के उपरांत भारतीय संविधान ने स्त्री पुरुष को समान अधिकार प्रदान किए हुए हैं। स्पष्ट है भारत में स्त्री अधिकारों का हनन संवैधानिक तौर पर भी एक अपराध ही माना जाएगा । अतः अपने अधिकारों को लेकर, स्त्री को भयाक्रांत रहने की कतई आवश्यकता नहीं है। स्त्री और पुरुष के अपने-अपने प्राकृतिक गुण और संरचना होती है। यह सामान्य रूप से दिखाई भी देती है और वैज्ञानिक रूप से सत्य भी सिद्ध होती है। इसलिए स्त्री को चाहिए कि वह अपने स्वाभाविक गुणों का विकास करें , ना कि आधुनिकता की होड़ में, हर बात में पुरुष के साथ बराबरी का दंभ भरे। अपने अंदर कौशल विकास करते हुए हर स्त्री को , मातृत्व कृर्तृत्व और नेतृत्व के गुणों को आत्मसात करने के साथ , हर दिन, कुछ मिनट अथवा कुछ घंटे बिना किसी लाभ आकांक्षा के समाज के उत्थान के लिए अवश्य देने का प्रयास करना चाहिए । समाज
महिला दिवस पर एमसीडी का ‘स्वदेशी हाट’, महिला उद्यमियों को मिला मंच
कार्यक्रम का उद्घाटन स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने किया। इस दौरान महिला कल्याण एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष रेखा रानी भी मौजूद रहीं। नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा ‘स्वदेशी हाट’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने किया। इस दौरान महिला कल्याण एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष रेखा रानी भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम में महिला स्वयं सहायता समूहों, एनजीओ और प्रशिक्षण केंद्रों द्वारा स्वदेशी उत्पादों के स्टॉल लगाए गए, जिनमें साड़ियां, वस्त्र, बैग, ज्वेलरी, बेकरी उत्पाद और हस्तनिर्मित वस्तुएं प्रदर्शित की गईं। लोगों ने इन उत्पादों की सराहना करते हुए खरीदारी भी की। स्थायी समिति अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा ने भी विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया, वहां से खरीदारी की तथा महिला उद्यमियों और विक्रेताओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच महिलाओं को अपने हुनर और स्वदेशी उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनने में मदद मिलती है। महिला कल्याण एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष श्रीमती रेखा रानी ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को प्रोत्साहित करना तथा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना है। हमें गर्व है कि बड़ी संख्या में महिला उद्यमियों ने इस ‘स्वदेशी हाट’ में भाग लेकर अपनी प्रतिभा और उत्पादों का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया, जहां लोगों के लिए हेल्थ चेकअप की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सत्या शर्मा ने स्टॉलों का भ्रमण कर महिला उद्यमियों का उत्साहवर्धन किया और कहा कि ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गोलियों की खनक में बचपन की चमक
-डॉ शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी की कलम से गर्मी की दोपहर, धूल भरी गली, और जेब में खनखनाती काँच की गोलियाँ — बस यही तो था हमारा खज़ाना। “गोलियाँ” या “काँचा” खेलना केवल खेल नहीं था, वह हमारी दोस्ती, प्रतिस्पर्धा और मासूम खुशियों का उत्सव था। ज़मीन पर उँगली से छोटा सा गड्ढा बनाना, निशाना साधते समय सांस रोक लेना, और जैसे ही अपनी गोली सटीक टकराती — मन में विजयी मुस्कान खिल उठती। कभी हारते तो उदासी भी होती, पर अगले ही पल फिर चुनौती देने को तैयार। न कोई मोबाइल, न कोई स्क्रीन — बस मिट्टी की सोंधी खुशबू और दोस्तों की खिलखिलाहट। आज जब उन पलों को याद करता हूँ, तो लगता है कि असली अमीरी जेब में नहीं, उन रंग-बिरंगी गोलियों और बेफिक्र हँसी में थी। बचपन की वही छोटी-सी दुनिया, सच में सबसे बड़ी दुनिया थी।
निगम मुख्यालय में ‘निगम आलोक पत्रिका-2025’ का लोकार्पण, हिंदी के प्रोत्साहन पर जोर
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के राजभाषा विभाग द्वारा निगम मुख्यालय, सिविक सेंटर में “निगम आलोक पत्रिका-2025” का भव्य लोकार्पण एवं हिंदी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्थायी समिति की अध्यक्षा सत्या शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वहीं अतिरिक्त आयुक्त संजीव मित्तल की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर निगम के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान “निगम आलोक पत्रिका-2025” का विधिवत विमोचन किया गया। इसके उपरांत आयोजित हिंदी कार्यशाला में प्रशासनिक कार्यों में राजभाषा हिंदी के प्रभावी उपयोग, सरल एवं सशक्त अभिव्यक्ति तथा कार्यालयीन कार्यप्रणाली में हिंदी के व्यापक संवर्धन पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। अपने संबोधन में सत्या शर्मा ने कहा कि राजभाषा हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक सुदृढ़ता का आधार है। उन्होंने कहा कि निगम में हिंदी के अधिकतम प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की अपील करते हुए प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के व्यापक उपयोग पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ।
20 साल, 300 से ज्यादा एफआईआर, फिर भी नहीं मिला न्याय
जयपुर के बड़े जमीन घोटाले में ज्ञान चंद अग्रवाल के खिलाफ नई एफआईआर, सिस्टम पर उठे सवालक्या ED की जांच से सैकड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा न्याय? जयपुर। करीब दो दशक पहले शुरू हुआ कथित जमीन घोटाला आज भी चर्चा में है। 14 दिसंबर 2025 को जयपुर के मानसरोवर थाने में एक नई एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला ज्ञान चंद अग्रवाल और M/s Shri Salasar Overseas Pvt. Ltd. से जुड़ा है। नई एफआईआर में कंपनी के साथ ज्ञान चंद अग्रवाल, प्रमोद कुमार अग्रवाल और बद्री के नाम शामिल हैं। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 316(2), 336(2), 337, 338, 339, 61(2) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है। इन धाराओं में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और विश्वासघात जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। क्या है आरोप? शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2008 में नारायण विहार, अजमेर रोड, जयपुर में 200 वर्ग गज का प्लॉट (नंबर 163) ₹5,500 प्रति वर्ग गज की दर से खरीदा गया था। 12 जून 2008 को अस्थायी अलॉटमेंट लेटर जारी किया गया। इसके अलावा विकास शुल्क के नाम पर ₹38,000 अतिरिक्त लिए गए। आरोप है कि बाउंड्री वॉल और कमरे के निर्माण के नाम पर ₹1.5 लाख नकद भी मांगे गए। बाद में प्लॉट रद्द कर दूसरा प्लॉट (नंबर 298-D) देने की बात कही गई। पूरी राशि भुगतान करने के बावजूद न तो कब्जा दिया गया और न ही कोई स्पष्ट समाधान मिला। शिकायतकर्ता का कहना है कि अप्रैल 2025 में साइट पर जाकर देखा गया तो वहां ऐसा कोई प्लॉट अस्तित्व में ही नहीं था। फोन पर पैसे लेने की बात स्वीकार की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें वर्षों तक अलग-अलग बहानों और आश्वासनों के जरिए गुमराह किया गया। 20 साल से एक जैसा पैटर्न बताया जा रहा है कि ज्ञान चंद अग्रवाल के खिलाफ जयपुर में जमीन से जुड़े ऐसे मामलों में 300 से अधिक एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। कई पीड़ितों ने एक समान तरीका अपनाए जाने की बात कही है— इन मामलों में रिटायर्ड कर्मचारी, नौकरीपेशा लोग और मध्यमवर्गीय परिवार शामिल हैं, जिन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई जमीन खरीदने में लगाई थी। एक पीड़ित ने कहा,“मैंने अपनी बेटी के भविष्य के लिए प्लॉट खरीदा था। 20 साल हो गए, न जमीन मिली और न ही पैसा वापस। कई बार पुलिस के पास गया, लेकिन आज तक न्याय नहीं मिला।” पीड़ितों की सामूहिक मांग अब कई पीड़ित एकजुट होकर सामने आए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सिस्टम और दस्तावेजों पर भरोसा किया, लेकिन वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे हैं। पीड़ितों की प्रमुख मांगें हैं— ED की एंट्री: क्या आएगा मोड़? हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में जांच शुरू की है। बताया जा रहा है कि राजस्थान पुलिस की कई एफआईआर के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। मामला करीब 150 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा बताया जा रहा है। ED के अनुसार, ज्ञान चंद अग्रवाल पर जमीन हड़पने और कई लोगों व कंपनियों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप हैं। उन्हें राजस्थान पुलिस द्वारा हिस्ट्रीशीटर घोषित किया जा चुका है और विभिन्न अदालतों से गिरफ्तारी वारंट भी जारी हैं। ED अब मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है। यदि जांच में संपत्तियों की जब्ती और नीलामी की कार्रवाई होती है, तो पीड़ितों को आंशिक राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। बड़ा सवाल: 20 साल तक न्याय क्यों नहीं? सैकड़ों एफआईआर, कई गिरफ्तारियां और अदालतों में लंबित मामले—फिर भी अब तक ठोस समाधान सामने क्यों नहीं आया? पीड़ितों का कहना है— कई परिवारों के लिए यह मामला अब सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में विश्वास का प्रश्न बन गया है। अब सबकी नजर ED की जांच और अदालत की आगामी कार्रवाई पर है। क्या इस बार 20 साल पुरानी लड़ाई को न्याय का अंत मिलेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
जिला विधिज्ञ संघ के चुनाव के लिए दस अभ्यर्थी ने किया नामांकन
औरंगाबाद। सोमवार को जिला विधिज्ञ संघ औरंगाबाद में 12 मार्च को होने वाले चुनाव को लेकर कुल दस अभ्यर्थीयो ने नामांकन किया। जिला विधिज्ञ संघ औरंगाबाद के चुनाव समिति के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता महेंद्र प्रसाद सिंह और सहायक सदस्य कामता प्रसाद सिंह, राधेश्याम प्रसाद, सरोज रंजन सिन्हा,अभय कुमार ने बताया कि महासचिव पद पर सतीश कुमार सिंह, प्रमोद कुमार सिंह और रामावतार यादव ने नामांकन किया। वरिष्ठ सदस्य पद पर यमुना प्रसाद सिंह और अनील कुमार सिंह ने नामांकन किया, संयुक्त सचिव पद पर विनय कुमार मिश्रा ने नामांकन किया। सहायक सचिव पद पर सतीश कुमार स्नेही ने नामांकन किया। पुस्तकालय अध्यक्ष पद पर त्रिपुरारी कुमार वैद्य ने नामांकन किया और कार्यसमिति सदस्य पद पर विनय द्वेवेदी ने नामांकन किया। कार्यसमिति के कुल 27 पदों पर अब तक 46 अभ्यर्थीयो ने नामांकन हेतु रसीद कटवा लिया है। ज्ञात हो कि 25 फरवरी तक नामांकन दाखिल किया जाएगा।
घबराइए मत, हर समस्या का होगा प्रभावी समाधान : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
जनता दर्शन में सीएम योगी ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं अफसरों से बोले मुख्यमंत्री, हर पीड़ित की समस्या का हो समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण गंभीर बीमारियों में इलाज के लिए मिलेगी भरपूर आर्थिक मदद : मुख्यमंत्री गोरखपुर। मंगलवार को गोरखपुर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास करने के बाद बुधवार सुबह जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने समस्या लेकर आए लोगों से आत्मीयता से संवाद करते हुए कहा, ‘घबराइए मत, हर समस्या का प्रभावी समाधान कराया जाएगा।’ जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने पास में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और उसका समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण व पारदर्शी निराकरण कराएं। बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने के निर्देश दिए। जनता दर्शन में महिलाओं की संख्या अधिक रही। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे। आत्मीयता के पुट में ‘कहां से आए हैं, क्या बात है’, कहते हुए एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। भरोसा दिया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। किसी को भी परेशान होने या चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना पत्रों को उन्होंने अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए। कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर उन्होंने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। एक महिला ने मकान जला दिए जाने की शिकायत की तो मुख्यमंत्री ने जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी, सरकार भरपूर आर्थिक मदद देगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी। गुड़-रोटी खिलाकर सीएम ने की गोसेवा, मोर को भी दुलारागोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान बुधवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से गुड़-रोटी खिलाया। गोशाला में सीएम योगी के पहुंचने पर मोर भी उनके पास आ जाते हैं। मुख्यमंत्री ने मोर को भी दुलारा और अपने हाथों से रोटी खिलाया।
क्या है स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho? जिसे रेलमंत्री भी कर चुके हैं इस्तेमाल — माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को टक्कर देने वाला भारतीय टेक दिग्गजक्या है स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho? जिसे रेलमंत्री भी रहे इस्तेमाल, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को देगा टक्कर

स्वदेशी प्लेटफॉर्म Zoho: भारतीय टेक्नोलॉजी की दुनिया में क्रांति भारत ने पिछले कुछ वर्षों में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। इन्हीं में से एक चमकता हुआ नाम है Zoho Corporation, जो पूरी तरह से भारतीय स्वदेशी सॉफ्टवेयर कंपनी है। यह प्लेटफॉर्म न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों को चुनौती दे रहा है। रेलमंत्री समेत कई सरकारी अधिकारी हैं इसके यूज़र Zoho की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत के रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की पुष्टि की थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि वे Zoho का प्रयोग करते हैं क्योंकि यह “पूरी तरह भारतीय और सुरक्षित” है।यह बयान आने के बाद Zoho का नाम देशभर में ट्रेंड करने लगा और लोगों ने इस प्लेटफॉर्म को विदेशी विकल्पों के मुकाबले अपनाने की दिशा में रुचि दिखानी शुरू की। क्या है Zoho? Zoho Corporation एक भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी है जिसकी स्थापना 1996 में श्रीधर वेम्बू (Sridhar Vembu) ने की थी। इसका मुख्यालय चेन्नई और अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित है।Zoho कई तरह के क्लाउड-आधारित बिज़नेस टूल्स और एप्लिकेशन प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं: इन सेवाओं के ज़रिए कंपनियां अपने पूरे बिज़नेस सिस्टम को डिजिटल रूप से चला सकती हैं — बिना माइक्रोसॉफ्ट 365 या गूगल वर्कस्पेस पर निर्भर हुए। Zoho क्यों है खास? दुनिया में बढ़ता प्रभाव Zoho के आज 100 मिलियन (10 करोड़) से ज़्यादा यूज़र हैं। यह 180 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है।भारत के अलावा अमेरिका, जापान, सिंगापुर और यूरोप में भी Zoho का बड़ा ग्राहक आधार है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब Zoho के टूल्स को अपने सिस्टम में इंटीग्रेट कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल को दे रहा है टक्कर Zoho का पूरा ईकोसिस्टम (ईमेल, डॉक्यूमेंट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, अकाउंटिंग, CRM आदि) इसे सीधे तौर पर Microsoft 365 और Google Workspace के बराबर खड़ा करता है।जहां विदेशी प्लेटफॉर्म्स के लिए भारत को केवल एक “मार्केट” के रूप में देखा जाता है, वहीं Zoho ने भारत को “इनोवेशन सेंटर” बना दिया है। संस्थापक का विज़न Zoho के सीईओ श्रीधर वेम्बू का कहना है — “हमारा लक्ष्य सिर्फ सॉफ्टवेयर बेचना नहीं, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।” वेम्बू ने ग्रामीण क्षेत्रों में Zoho के R&D सेंटर खोलकर यह साबित किया है कि भारत के छोटे कस्बों से भी विश्वस्तरीय तकनीक विकसित की जा सकती है। निष्कर्ष Zoho आज भारत की उस नई टेक पहचान का प्रतीक बन चुका है जो “Made in India, Built for the World” की भावना को साकार करता है।रेलमंत्री से लेकर छोटे स्टार्टअप तक, हर कोई इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म की ओर रुख कर रहा है। आने वाले समय में Zoho, भारत की डिजिटल स्वतंत्रता की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।
Flipkart Big Billion Days: नहीं करना होगा इंतजार, iPhone 17 समेत प्रीमियम स्मार्टफोन्स की 10 मिनट में होगी डिलिवरी

Flipkart 10 Minutes Delivery: ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म Flipkart अगले हफ्ते से साल की सबसे बड़ी सेल Big Billion Days लेकर आ रहा है। इस बार ग्राहक सिर्फ भारी डिस्काउंट्स का ही मजा नहीं लेंगे, बल्कि फटाफट डिलिवरी का अनुभव भी कर पाएंगे। खास बात यह है कि अब आपको घंटों इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि Flipkart Minutes सेवा के तहत कुछ चुनिंदा प्रोडक्ट्स सिर्फ 10 मिनट में घर पर डिलीवर हो जाएंगे। फ्लिपकार्ट मिनट्स क्या है? Flipkart Minutes दरअसल ई-कॉमर्स कंपनी की क्विक डिलिवरी सेवा है। इसका मकसद ग्राहकों तक प्रोडक्ट्स को बेहद कम समय में पहुंचाना है। इस बार बिग बिलियन डेज सेल के दौरान इस सेवा का फायदा 19 शहरों और लगभग 3000 पिन कोड्स में दिया जाएगा। यानी बड़े शहरों के साथ-साथ अब टियर-2 शहरों जैसे अंबाला, गुवाहाटी, जयपुर, लखनऊ, कानपुर और पटना के लोगों को भी यह सुविधा मिलेगी। सिर्फ 10 मिनट में मिलेगा iPhone 17 अब तक लोग नए iPhone 17 को खरीदने के लिए ऐपल स्टोर्स के बाहर घंटों लाइन में खड़े नजर आ रहे थे। लेकिन अब यही फोन फ्लिपकार्ट से सिर्फ 10 मिनट में आपके घर तक पहुंच जाएगा। इसके साथ ही कई और प्रीमियम स्मार्टफोन्स को भी इसी क्विक डिलिवरी लिस्ट में शामिल किया गया है।